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डाउनलोड करेंअशोकनगर(एमपी)। जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर ग्राम बर्रा में आज भी ग्रामीणों के बीच एक किवदंती है। इसके अनुसार गांव में नीम और इमली के पेड़ लोगों को जरूरत पड़ने पर धन देते थे। इसके लिए ग्रामीण को मन्नत मांगनी पड़ती थी और दूसरे दिन उसे पेड़ के पास पैसा मिल जाता था। ग्रामीणों के मुताबिक धन मिलने की परंपरा एक कुम्हार की गलती से अब बंद हो चुकी है। उसने धन देने वाले पेड़ से अपना गधा बांध दिया था तब से पेड़ ने धन देना बंद कर दिया है।
गांव के बुजुर्गों का कहना-बेटी की शादी के लिए मिलता था धन
- लोगों ने बताया कि खूटियादास महाराज का मंदिर है, जहां इमली व नीम के पेड़ लगे हुए हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि यहां बेटियों की शादी के लिए मन्नत मांगने पर धन मिलता था।
- कई लोगों ने बेटियों की शादियों के लिए धन भी लिया। एक बार किसी कुम्हार ने अपनी बेटी की शादी के लिए धन मांगा था। अगले दिन सुबह जब वो इन पेड़ों के पास पहुंचा नगदी रुपए रखे मिले थे।
- धन वापस करने की जो मोहलत उसने दी थी, उस समय तक उसके पास रुपए का इंतजाम नहीं हुआ था और वो अपना गधा इमली के पेड़ से बांध गया था।
- तब से किसी को धन नहीं मिला। इस किंवदंती के बारे में गांव में पहुंचकर जब पड़ताल की तो लोगों ने इस बात को सत्य बताया। हालांकि कोई भी इस घटना से जुड़ा सबूत पेश नहीं कर पाया।
अंधविश्वास: चबूतरा भी नहीं बदल पाते लोग
इन दोनों पेड़ों के बीच में खूटियादास (गौंड बाबा) का मंदिर है। सालों पुराना यह मंदिर मिट्टी के चबूतरे पर बना है। जिसे बदलकर पक्का निर्माण कराने के प्रयास कई लोग कर चुके हैं लेकिन जो भी चबूतरा बनाने का प्रयास करता है उस चबूतरे के पास जा ही नहीं पाता। जिन लोगों के मकान इस मंदिर से लगे हुए हैं वे अपनी दीवार तक नहीं गिरा पाते। यहां दूर दराज से भी लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
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