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डाउनलोड करेंजयपुर. डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीएसटीआई) की जयपुर टीम ने सोमवार को करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। गिरोह फर्जी फर्में बना उनके फर्जी बिलों से टैक्स चोरी करता था। प्राथमिक जांच में 57 करोड़ की टैक्स चोरी के सबूत मिले हैं। यह आंकड़ा 500 करोड़ रु. तक पहुंच सकता है। राजस्थान, मप्र, यूपी व दिल्ली में 21 ठिकानों पर एक साथ छापे मारी की कार्रवाई की गई। गिरोह के 3 सदस्यों गुर्जर की थड़ी निवासी पंकज खंडेलवाल, गाजियाबाद निवासी संदीप व रामकुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें से एक जयपुर का कर सलाहकार भी है। इनके पास से 48 लाख रु. नकद भी बरामद हुए।
- जांच अधिकारी नवीन माली ने कोर्ट को बताया कि खंडेलवाल का मानसरोवर के मध्यम मार्ग स्थित ओके प्लस बिल्डिंग में कार्यालय है। जहां वह कर-सलाहकार के रूप में फर्मों के रजिस्ट्रेशन का काम करता है। आरोपी मृत व्यक्तियों और फर्जी पतों पर कई फर्मों का रजिस्ट्रेशन करता था। इन्हीं फर्मों के राम कुमार सिंह बिना माल सप्लाई किए फर्जी बिल जारी करता था।
- इन बिलों एक-दो अन्य फर्जी फर्मों में सौदे दिखाए जाते। जिससे जांच एजेंसियां कभी भी उन तक नहीं पहुंच सके। अंत में बिल ऐसे व्यवसायियों को दे दिया जाता जिसे बिना माल केवल बिल की जरूरत होती थी। इन व्यवसायियों से बैंक खाते में बिलों का पूरा भुगतान लिया जाता।
- टैक्स की रकम काट कर मास्टर माइंड संदीप अग्रवाल संबंधित व्यवसायी की बताई गई दूसरी फर्म में वापस जमा करा देता। टैक्स की यह रकम सरकारी खाते में कभी भी जमा ही नहीं कराई जाती। दूसरी और बिल लेने वाला व्यवसायी अपने खाते में इस रकम का टैक्स क्रेडिट दिखा देता था। आरोपी केवल बिलों के बदले 2.5 से 3.5 प्रतिशत व्यवसायी से नकद लेते थे। इस तरह दो तरीकों से कमाई का जरिया बन गया था।
48 लाख की नकदी और 57 करोड़ के बिल बरामद
- दो आरोपियों से बिल जारी करने के बड़ी संख्या में दस्तावेज मिले हैं। निदेशालय के अधिवक्ता आरएन यादव और बनवारी लाल ने कोर्ट को बताया कि राम कुमार सिंह से दो फर्मों के नाम से 107 करोड़ रुपए के बिल जारी किए। जिनसे 19 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की गई। उसके घर से 18 लाख रुपए नकद मिले। जिनका कोई हिसाब नहीं था। इसी तरह सरगना संदीप अग्रवाल से बरामद दस्तावेजों से 16 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की। उसके घर से 30 लाख रुपए से ज्यादा की नकदी बरामद हुई।
- रामकुमार ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह सारा काम संदीप के निर्देशों पर करता था।57 करोड़ रु. टैक्स चोरी के दस्तावेज बरामद, जांच पूरी होने पर यह आंकड़ा 500 करोड़ रु. तक पहुंचने की आशंका
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