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डाउनलोड करेंजोधपुर. बच्चों को अपराध से हटाकर समाज से जोड़ने का काम सरकारी बालगृह कर रहा है। इस चुनौती को अनूठे अंदाज और नए प्रयोगों के साथ पूरा कर रहा है जोधपुर का बाल सुधार गृह। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. बीएल सारस्वत गीत-संगीत सिखाकर बच्चों के मन में करुणा, दया और प्रेम के भाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। सारस्वत के आह्वान पर स्टाफ, एनजीओ व बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी भी बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ उनकी रुचि के काम सिखा रहे हैं। इसका असर भी दिखने लगा है। भूलवश या परिस्थितिवश अपराध की राह पर आए ये बालक अब ट्रेंड पेंटर से लेकर एक्टर तक बन रहे हैं।
कला को मिले प्रोत्साहन-प्रशिक्षण से प्रोफेशनल आर्टिस्ट बना
संप्रेक्षण गृह में बालक रमेश (परिवर्तित नाम) की पेंटिंग व चित्रकला में रुचि थी। वर्ष 2017 में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य रूपवती देवड़ा व राजेंद्र सोनी को ये प्रतिभा पता चली तो उसे रंग, कूची-ब्रश उपलब्ध कराए गए। रमेश ने भी किशोर गृह की दीवारों पर एक से एक उम्दा पेंटिंग्स बना डाली, अपनी कला को खूब निखारा। राज्य स्तर पर निदेशालय के आयुक्त व विशिष्ट शासन सचिव ने उसे सम्मानित किया। सकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट से उसके केस का जल्द निस्तारण का अनुरोध किया। आज रमेश प्रोफेशनल आर्टिस्ट के रूप में 15-20 हजार रुपए कमा रहा है।
प्रतिभा को पहचान मिली तो अब एप और एलबम बना रहा
वर्ष 2015 में पीपाड़ से दुष्कर्म के मामले में संप्रेक्षण गृह में एक किशोर आया था। बाल सुधार गृह में काउंसलिंग के साथ छुपी प्रतिभा बाहर लाने की कोशिशें हुईं। असर भी हुआ, स्वतंत्रता दिवस समारोह में किशोर ने नृत्य व अभिनय की प्रस्तुति स्टेज पर दी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। संप्रेक्षण गृह से निकला तो अभिनय की राह पर निकल पड़ा। अपने कस्बे में स्टूडियो खोलकर शूटिंग के साथ वीडियो एल्बम बनाना शुरू कर दिया। साथ में क्षेत्र के कई नामी आर्टिस्ट को जोड़ा। इसी 8 मार्च को ‘माय रोल’ मोबाइल एप और ‘मेरी आस तुमसे’ एलबम जारी किए। आज वह अपने क्षेत्र में रोल मॉडल है।
एक्टिविटीज जो ‘जेल’की सोच बदल सुधार गृह बनाती हैं
- संगीत व वाद्य यंत्र सिखाते हैं। कार्यक्रमों में बच्चे प्रस्तुति देते हैं।
- बाल कल्याण सप्ताह में चित्रकला, गायन, नृत्य, भाषण जैसी प्रतियोगिताएं।
- रिवाइंडिंग, कंप्यूटर प्रशिक्षण व पेंटिंग प्रशिक्षण। रोजगार के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों से सहयोग। - काउंसलिंग में पारिवारिक पृष्ठभूमि का पता कर उस अनुसार सरकारी योजनाओं से जोड़ते हैं।
- किसी भी बालक के जन्मदिन पर स्टाफ व बाल कल्याण समिति सदस्यों व इससे जुड़े एनजीओ उस बालक से केक कटवाते हैं।
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