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कर्नाटक में सबसे बड़े दल को मिला सरकार बनाने का न्योता तो ऐसी ही मांग बिहार और गोवा में उठी

3 वर्ष पहले
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नेशनल डेस्क. कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया। जिसके बाद येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ली। येदियुरप्पा को 15 दिन में विधायकों का बहुमत साबित करना है। राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 113 विधायक चाहिए लेकिन बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं..ऐसे में राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।  राहुल गांधी ने कहा है कि कर्नाटक में संविधान का मजाक बनाया जा रहा है। इस बीच गोवा और बिहार से भी आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले को आधार बनाकर बिहार में RJD और गोवा में कांग्रेस कह रही है कि प्रदेश में उनकी सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उन्हें सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

 

दिल्ली से गोवा के लिए निकले कई बड़े कांग्रेस नेता 
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांग्रेस के गोवा प्रभारी चेला कुमार कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि दिल्ली से कांग्रेस के आला नेता गोवा के लिए निकल चुके हैं। वो दूसरों दलों के नेताओं के साथ शु्क्रवार को राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं।
- कांग्रेस का कहना है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 17 सीटें जीती। लेकिन राज्यपाल ने 13 सीट जीतने वाली बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया। 

 

तेजस्वी यादव ने भी की मांग
कर्नाटक से शुरू हुआ सियासी ड्रामा बिहार तक पहुंच चुका है। प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 'प्रदेश में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है। हम मांग करते हैं कि राज्यपाल महोदय बिहार सरकार को भंग कर कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में आरजेडी को सरकार बनाने का मौका दें।' 

 

कर्नाटक में ऐसा क्या हुआ?
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलीं। परिणाम आने के बाद कांग्रेस-जेडीएस का गठबंधन हो गया। दोनों की सीटें मिला दें तो इन्हें बहुमत के लिए जरूरी सीटों से ज्यादा 116 सीटें मिल जाती हैं।  दोनों ने  सरकार बनाने का दावा करने के लिए राज्यपाल से भी मुलाकात की। लेकिन राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया। राज्यपाल ने ये मौका सबसे बड़ी पार्टी होने का तर्क देते हुए बीजेपी को दिया। जिसके बाद लगातार राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले का विरोध हो रहा है।