जिले की दस बड़ी समस्याएं, शहरवासियों को इनसे निजात दिलाने में सरकारी तंत्र अभी तक फेल / जिले की दस बड़ी समस्याएं, शहरवासियों को इनसे निजात दिलाने में सरकारी तंत्र अभी तक फेल

Yamunanagar News - शहरवासियों के सामने आज भी दस बड़ी समस्याएं विकराल रूप धारण किए खड़ी हैं। लाख कोशिश के बावजूद अधिकारी इन समस्याओं से...

Bhaskar News Network

Nov 07, 2018, 02:26 AM IST
Yamunanagar - ten major problems in the district the government system in failing to get rid of them so far
शहरवासियों के सामने आज भी दस बड़ी समस्याएं विकराल रूप धारण किए खड़ी हैं। लाख कोशिश के बावजूद अधिकारी इन समस्याओं से लोगों को निजात दिलाने में अभी तक पूरी तरह असफल रहे हैं। फाइलों पर योजनाएं तो बनती जा रहीं हैं पर अभी तक इन समस्याओं के निवारण के लिए कभी ठोस पहल नहीं हो पाने से धरातल पर कुछ नहीं बदल रहा। अब तो शहरवासियों को भी लगने लगा है कि इन समस्याओं का शायद अभी कोई अंत नहीं है। उन्हें इंतजार है एेसे अधिकारी की जो योजनाओं का फाइलों से निकालकर धरातल पर कुछ करंे और उन्हें इन समस्याओं से निजता दिलाए।


सालों से फाइलों में बन रहीं हैं योजनाएं, अभी तक नहीं हुआ समाधान, इंतजार में शहरवासी

पहली: कैल प्लांट 4 साल से पड़ा है बंद

जगाधरी-अम्बाला हाइवे पर पूरे जिले के कचरे के निस्तारण के लिए स्थापित कैल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ही आज बड़ी मुसीबत बन गया है। करीब चार साल से बंद प्लांट में हजारों टन कूड़ा पड़ा है। यहां से उठती दुर्गंध पर्यावरण को दूषित कर रही है। जब प्लांट के भीतर जगह नहीं रही तो नगर निगम के वाहनों ने प्लांट के गेट के पास भी कूड़ा डंप करना शुरू कर दिया है।

छठवीं: बुनियादी सुविधाएं भी खस्ताहाल

शहर की हद में 217 अवैध कॉलोनियां हैं। इनमें से 53 कॉलोनियों को अभी सरकार ने वैध घोषित किया है। 50 फीसदी आबाद होने के बावजूद इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं की बेहद कमी है। न तो इन कॉलोनियों में सड़कें हैं न ही पानी निकासी की कोई व्यवस्था। बरसाती दिनों में इन कॉलोनियों की कच्ची सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती हैं। यहां से निकलना बड़ी मुसीबत होता है।

दूसरी: बाइपास बना फिर भी जानें जा रहीं हैं

उम्मीद थी कि नया बाइपास बनने से शहर के भीतर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। शहर के भीतर अब भी मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति है। दिन में हैवी ट्रक व ओवर लोड वाहन शहर के अंदर से जा रहे हैं। इन पर ट्रैफिक पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में भी कोई कमी नहीं आई है।

सातवीं : प्रदूषण से विस्तार लेती बीमारियां

शहर में प्रदूषण तेजी से विस्तार ले रहा है। शहर में मेटल व प्लाइवुड की छोटी-बड़ी हजारों इकाइयां हैं। शुगर व पेपर मिल के साथ थर्मल प्लांट भी है। औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां रोज प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी वजह से लोग बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं। वायु के साथ जल प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। औद्योगिक इकाइयों का जहरीला पानी सीधे यमुना नहर में जा रहा है।

तीसरी: शहर में कानून व्यवस्था पूरी तरह लचर

लचर कानून व्यवस्था से शहर असुरक्षित हो रहा है। खासतौर पर यहां रेप की वारदातों में इजाफा हुआ है। कई छोटी बच्चियां भी जुर्म का शिकार हुईं हैं। हत्या, लूट, चोरी, स्नेचिंग व धोखाधड़ी जैसी वारदातें लगातार बढ़ रहीं हैं। ऐसी वारदातों को रोकने के लिए कोई ठोस नीति भी पुलिस बनाने में पूरी तरह फेल रही। पिछले दिनों एसपी की कोठी के पास से कार समेत व्यापारी का रात साढ़े नौ बजे अपहरण कर लिया गया।

आठवीं : हर एरिया में टूटी सड़कें टूटी पड़ी हैं

शहर की टूटी सड़कें भी बड़ी मुसीबत बन रही हैं। विश्वकर्मा चौक से कैल तक करीब 13 किलोमीटर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इस पर पीडब्ल्यूडी दारा कभी मिट्टी तो कभी तारकोल वाली गिट्टी से डलवाई जा रही है। लेकिन वाहनों के दबाव में दो दिन बाद फिर से ये उखड़ जाती हैं। अग्रसेन चौक से बुड़िया तक की सड़क की हालत बेहद खस्ता है। सेक्टर्स की ज्यादातर सड़कों पर भी गड्ढों की भरमार है।

चौथी: अवैध खनन और ओवरलोडिंग होना

अवैध खनन व ओवरलोडिंग भी जिले में एक गंभीर समस्या बन गई है। प्रशासन की ओर से दोनों समस्याओं के समाधान के लिए कभी ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। किसान लगातार अवैध खनन व ओवरलोडिंग के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। किसानों की आवाज को दबाया जा रहा है। खनन माफिया इतना ताकतवर है कि जो उसका विरोध करता है उसके खिलाफ ही केस दर्ज करा दिया जाता है।

नौवीं: शहर में स्वास्थ्य सेवाएं भी लचर हैं

शहर में दो सिविल अस्पताल हैं। दोनों में न तो अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक हैं न ही सुविधाएं। चिकित्सकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़ें हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं है। प्राइवेट अस्पतालों में ही लोगों को महंगा उपचार लेने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। ठोस व्यवस्था न होने से मौसमी बुखार व डेंगू से हर साल लोग दम तोड़ रहे हैं।

पांचवी: करोड़ों खर्च फिर भी सफाई बेहाल

शहर की सफाई पर हर साल करीब 15 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी व्यवस्था से हर नागरिक दुखी है। प्रतिदिन शहर से 200-225 टन कूड़ा निकलता है। लेकिन इसका सही से उठान नहीं हो पा रहा। न तो कूड़ा उठ पा रहा है न ही नाले नालियों की सफाई हो रही है। अव्यवस्थित सफाई की वजह से स्वच्छता सर्वेक्षण में भी शर्मनाक प्रदर्शन हो रहा है। अभी शहर की रैंकिंग 313 हैं।

दसवीं: शहर की अव्यवस्थित ट्रांसपोर्ट सेवा

अव्यवस्थित ट्रांसपोर्ट सेवा भी शहर की एक गंभीर समस्या है। लकड़ी से लदी ट्रॉलियां व सड़क किनारे खड़े ट्रक बड़ी मुसीबत बन रहे हैं। अग्रसेन चौक से बुडिया रोड़ तक व विश्वकर्मा चौक से लेकर खजूरी मोड़ तक सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व ट्रकों के कारण लोगों को रास्ता नहीं मिलता। इनसे टकराकर या फिर इनकी चपेट में हर साल दर्जनों लोग मौत का शिकार हो जाते हैं।

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