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डाउनलोड करेंग्वालियर. पीएमटी फर्जीवाड़े की जांच कर रही सीबीआई ने बुधवार को विशेष न्यायालय में 17 आरोपियों (छात्र, सॉल्वर, दलाल) के विरुद्ध पूरक चालान पेश किया। हालांकि साक्ष्यों के अभाव में सीबीआई ने 6 आरोपियों को क्लीन चिट दी है। सीबीआई ने न्यायालय में एक आवेदन भी प्रस्तुत किया जिसमें प्रकरण की शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। इस पर तर्क के लिए अगली सुनवाई 1 जून निर्धारित की है।
-पीएमटी कांड की जांच के लिए मप्र सरकार ने एसआईटी गठित की थी। शुरुआती जांच के बाद चार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, वहीं बाद में 13 और के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया।
- व्यापमं कांड का खुलासा होने पर एसआईटी ने वर्ष 2010 में हुए पीएमटी फर्जीवाड़े में एक एफआईआर दर्ज की थी। शुरुआत में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके बाद 13 और लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। एसआईटी ने मामले की जांच कर चालान भी पेश किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई सौंप दी गई।
इन आरोपियों के खिलाफ पेश किया चालान
- सीबीआई ने जितेन्द्र तिजोरिया, बादाम सिंह, धर्मेंद्र शाक्य, राजवीर जाटव, विनोद शाक्य, हरीश शाक्य, सोबरन सोलंकी, रमेश सोलंकी, साबिर अली, कुलेंद्र यादव, प्रभात चौधरी के खिलाफ चालान पेश किया जबकि धुआं राम गुर्जर, कैलाश, शोभाराम, अरुण कुमार गौर, राकेश उमराव, ज्ञान सिंह को क्लीन चिट दी।
इन्हें दी गई क्लीन चिट
- धुआंराम गुर्जर, कैलाश, शोभाराम, अरुण कुमार गौर, राकेश उमराव, ज्ञान सिंह जाट को क्लीन चिट दे दी। इनके खिलाफ सीबीआई को कोई सबूत नहीं मिला। जबकि एसआईटी ने इन्हें आरोपी बनाया था।
- जितेन्द्र तिजोरिया व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने अतिरिक्त जांच की। चालान पेश करने के लिए सीबीआई लगातार समय ले रही थी, लेकिन बुधवार को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सौरव वर्मा व जांच अधिकारी राकेश श्रीवास्तव विशेष सत्र न्यायालय में उपस्थित हुए।
सीबीआई ने इंदौर कोर्ट में भी पेश किया चालान
जीआरएमसी में फर्जी तरीके से प्रवेश लेने वाले सत्र 2010 के निष्काषित छात्र जितेंद्र केन और रंग विजय प्रताप सिंह के खिलाफ सीबीआई ने इंदौर कोर्ट में चालान पेश किया है। इस मामले में जीआरएमसी के स्टूडेंट सेक्शन के इंचार्ज की गवाही भी हुई है। जीआरएमसी में फर्जी तरीके से कुछ छात्रों ने प्रवेश लिया था। इनमें फर्जी छात्रों के खिलाफ 2014 में तत्कालीन डीन ने एफआईआर दर्ज कराकर इन्हें कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
- एसआईटी ने आरोपितों को गिरफ्तार कर वर्ष 2010 में हुए फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। सीबीआई ने मामले की तीन साल जांच की। जबकि एसआईटी ने 90 दिन में चालान पेश कर दिया था।
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