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किसानों को मिला अंग्रेजी में सर्वे फॉर्म, बोले-हिंदी में दीजिए तो भरेंगे
नामकुम प्रखंड सभागार में किसानों के फसल बीमा को लेकर केंद्रीय टीम किसानों से मुलाकात की। किसानों से बातचीत के दौरान जब केंद्रीय टीम के सदस्यों के सामने किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित अपनी समस्याएं और फसल बीमा कराने के पश्चात बीमा की राशि कभी न मिलने की शिकायत की तो केंद्रीय टीम के सदस्य उपस्थित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, किसानों से उलझ गए। जनप्रतिनिधियों और किसानों ने केंद्रीय टीम से उनका परिचय, पदनाम, विभाग का नाम जानना चाहा तो शुरू में उन्होंने आनाकानी की, लेकिन जब उपस्थित किसानों ने कहा कि जब तक आप अपना परिचय नहीं बताएंगे हम लोग कोई फीडबैक देने के लिए बाध्य नहीं हैं। किसानों व केंद्रीय टीम के सदस्यों के बीच हो रही नोंक-झोंक को देखते हुए उपस्थित जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बीच-बचाव करते हुए केंद्रीय टीम के सदस्यों को अपना परिचय देने, आने का उद्देश्य स्पष्ट करने को कहा। परिचय में पता चला यह कि ये टीम केंद्रीय टीम के सदस्य नहीं थे बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय की तरफ से भेजे गए एक रिसर्च हैं, जिन्हें फसल बीमा के फीडबैक के संबंध में जानकारी लेने के लिए भेजा गया था। टीम द्वारा उपस्थित किसानों को एक फॉर्मेट उपलब्ध कराया गया। उस फॉर्मेट को भरकर देने के लिए कहा गया, लेकिन वह फॉर्मेट पूरी तरह अंग्रेजी में था। जबकि उपस्थित किसानों का माध्यम से बिल्कुल विपरीत है। तब किसानों ने कहा कि पहले फॉर्मेट को हिंदी में बनाकर लाएं तभी भरकर देंगे। किसानों ने यह भी कहा कि पहले पूर्व में किए बीमा की राशि का भुगतान करें तभी आने वाले समय में फसल बीमा कराएंगे। बैठक में नामकुम प्रमुख रीता रजनी, जिप सदस्य आरती कुजूर, पंचायत समिति सदस्य अंजली लकड़ा, जिला सहकारिता पदाधिकारी प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी, लैम्पस मैनेजर नीरज कुमार, मुखिया रामअवतार केरकेट्टा आदि किसान उपस्थित थे।