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सूर्यदेव के सारथि अरुण और भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ में क्या है कनेक्शन?

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2018, 05:00 PM IST

रामायण में सूर्यदेव के सारथि अरुण के दो पुत्रों के बारे में भी बताया गया है। इनका नाम जटायु और संपाति है।

The interesting fact of Mahabharata, the caravan of Lord Surya, Lord Vishnu's vehicle

रिलिजन डेस्क। भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ सूर्यदेव के रथ के सारथि अरुण हैं, दोनों ही सगे भाई हैं। ये गिद्ध की प्रजाति के पक्षी माने गए हैं। इनके पिता कश्यप ऋषि हैं। रामायण में जो जटायु सीता को बचाने के लिए रावण से लड़ा और उसके हाथों मारा गया वो अरुण का ही पुत्र है। जटायु के एक और भाई संपाति का भी रामायण में जिक्र मिलता है। संपाति ने ही सीता की खोज में समुद्र किनारे तक पहुंचे वानरों को लंका का रास्ता बताया था।

- महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थीं। इनमें से एक का नाम विनता था। विनता ने महर्षि कश्यप की बहुत सेवा की।


- प्रसन्न होकर महर्षि ने विनता से वरदान मांगने को कहा। विनता ने कहा कि मुझे दो महापराक्रमी पुत्र चाहिए। महर्षि कश्यप ने विनता को ये वरदान दे दिया।


- समय आने पर विनता ने 2 अंडे दिए। इन्हें दासियों ने गरम बर्तनों में रख दिया। पांच सौ वर्ष होने पर भी जब उन अंडों से विनता के पुत्र बाहर नहीं निकले तो उन्हें चिंता होने लगी। जिज्ञासावश विनता ने एक अंडा फोड़ दिया।

- उस अंडे के शिशु का शरीर आधा ही बन पाया था। उस शिशु ने अपनी माता से कहा कि- दूसरे अंडे के साथ ऐसा न करना। इससे उत्पन्न शिशु महापराक्रमी होगा।

- इतना कहकर वह शिशु आकाश में उड़ गया और सूर्यदेव के रथ का सारथि हुआ। उसका नाम अरुण रखा गया।

- समय आने पर दूसरे अंडे से पक्षीराज गरुड़ का जन्म हुआ। गरुड़ ही स्वर्ग जाकर देवताओं से अमृत कलश ले आए थे।

- जब भगवान विष्णु ने गरुड़ का पराक्रम देखा तो उन्हें अपना वाहन बना लिया और अमर होने का वरदान भी दिया।

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