Hindi News »Abhivyakti »Editorial» The New York Times Column By Dainik Bhaskar

मित्र देशों पर युद्ध थोपने जैसा फैसला लिया है ट्रम्प ने

आर्थिक विश्लेषकों को जिस ‘ट्रेड वॉर’ की आशंका थी, वह शुरू हो गया है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स एडिटोरियल बोर्ड | Last Modified - Jun 04, 2018, 01:02 AM IST

मित्र देशों पर युद्ध थोपने जैसा फैसला लिया है ट्रम्प ने

अमेरिका का वर्तमान ट्रम्प प्रशासन कभी चीन के साथ प्रतिस्पर्धा की बात करता है, तो कभी यूरोप में अपने साथियों को नाराज करता है। कभी अप्रवासियों को लेकर ऐसे फैसले करता है, जिससे सिलिकॉन वैली की कंपनियां नाराज हो जाती हैं, तो कभी पड़ोसी देश मैक्सिको सीमा पर दीवार उठाने की बात करता है। ऐसे कई विवादास्पद फैसलों एवं बातों से दुनिया को चौंकाने वाले ट्रम्प प्रशासन ने हाल ही में फिर वही बात की है। परन्तु इस बार किसी एक देश को नाराज करने वाली नहीं, बल्कि अमेेरिका के सभी प्रमुख मित्र देशों को नाराज करने वाली बात है। हाल ही में ट्रम्प प्रशासन ने स्टील एवं एल्यूमीनियम धातु के आयात पर टैरिफ लागू कर दिया है। इसके असर से यूरोपीय संघ, मैक्सिको और कनाडा भी सीधे प्रभावित होंगे, जबकि इसके पहले मार्च में कहा गया था कि इन सहयोगियों को 10 से 25 फीसदी रियायत दी जाएगी।


वाणिज्य मंत्री विल्बर रोज़ ने कहा कि मार्च में ट्रम्प प्रशासन ने रियायत दिए जाने की बात जरूर की थी, लेकिन अब वार्ताएं काफी लंबी हो चुकी है। उसे यहीं रोकना चाहिए। उन्होंने पिछले शुक्रवार से ही टैरिफ लागू करने का एेलान कर दिया। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि चीन से आयातित स्टील एवं एल्यूमीनियम रोकने एवं उनके साथ प्रतिस्पर्धा कम करने के लिए ऐसा करना जरूरी है। हालांकि, कई लोग हैं जिन्हें इस फैसले की गंभीरता का अहसास नहीं है। परन्तु यह सच है कि केवल दो धातुओं को लेकर किए गए इस फैसले का व्यापक असर होने वाला है। अमेरिका में ऐसी हजारों जरूरी चीजें इन धातुओं से बनाई जाती हैं, जो वाहनों से लेकर रक्षा उत्पादों तक में काम आती हैं। अमेरिका ने चीन को रोके रखने के लिए ऐसा किया, जबकि सच यह है कि अब उसका अपने सहयोगियों एवं अन्य देशों के साथ ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा। शुक्रवार से लागू इस फैसले को उसका बिगुल बजना भी कह सकते हैं। तत्काल व्यवस्था से लागू किए गए टैरिफ के फैसले के पीछे एक सच यह हो सकता है कि ट्रम्प प्रशासन ने चीन को कुछ रियायत देने की बातें कही थीं, जिसे लेकर उसकी आलोचना हो रही है। यह भी कहा जा रहा है कि इस फैसला का उद्देश्य सीधा चीन से नहीं जुड़ता है। एक अन्य विचार यह है कि इसके जरिये प्रतिस्पर्धा का स्तर कम करना है।


ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि नए टैरिफ लागू होने के बाद अब चीन अपने यहां की उपरोक्त धातुएं मौजूदा टैरिफ की चिंता किए बिना चाहे जिस देश में नहीं भेज सकेगा। हालांकि अब तक इस बात के सबूत नहीं मिले हैं। चीन से अमेरिका पहुंचाया जाने वाला कुछ स्टील ऐसा भी होता है, जिसे किसी तीसरे देश में पहले रिप्रोसेस्ड किया जाता है, हालांकि यह वैधानिक प्रक्रिया के तहत होता है यानी अमेरिका को इसकी जानकारी होती है। यहां बात केवल चीन को प्रभावित करने की नहीं है, बल्कि 28 देशों वाले यूरोपीय संघ, कनाडा और मैक्सिको की भी है। इन देशों में अमेरिका के उत्पाद निर्यात होते हैं। टैरिफ लागू होने का असर बिज़नेस और कर्मचारियों पर पड़ेगा। संभव है कि इस फैसले के बाद अमेरिका के ये सहयोगी दूसरे देशों का रुख करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक फैसले ने अमेरिका को उसके सहयोगियों से दूर कर दिया है।


बहुत से देश अब ये चाहेंगे कि चीन अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करे। मेटल आधारित अमेरिकी उत्पादों का प्रतिनिधित्व करने वाली एल्यूमीनियम एसोसिएशन के अध्यक्ष हैदी ब्रॉक ने साफ कहा कि ट्रम्प के इस फैसले से उन्हें बहुत निराशा हुई है। इस फैसले में चीन की चुनौतियों से निपटने का असर कम है, जबकि सहयोगियों से मतभेद बढ़ाने वाला असर ज्यादा है। अब होगा यह कि अमेरिकी उत्पादकों को एल्यूमीनियम और अन्य रॉ मटेरियल हासिल करने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जब कोई चीज समय पर उपलब्ध नहीं होती है तो कीमतें भी बढ़ती हैं और उत्पाद की गुणपत्ता भी प्रभावित होती है। राष्ट्रपति ट्रम्प को शायद अंदाजा नहीं होगा कि उनके फैसलों से किसी देश की राजनीति कितनी प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए मैक्सिको को देखिए, वहां एक जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। इन चुनावों में वामपंथी आंद्रे लोपेज ओब्राडोर प्रमुख उम्मीदवार हैं। कई विशेषज्ञों को डर है कि अगर वे राष्ट्रपति चुन लिए जाते हैं तो मैक्सिको में सत्तावादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा और वे लोकतंत्र को अप्रभावी बना सकते हैं।


संभव है कि ट्रम्प टैरिफ के फैसले से यह प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हों कि जो भी देश अमेरिका के साथ धोखाधड़ी करेगा, उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रम्प को अपने संसद सदस्यों की तरफ से चीनी कंपनी जेडटीई को रियायत देने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसी कंपनी की बात है, जिसने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए ईरान एवं उत्तर कोरिया को एडवांस टेक्नोलॉजी हस्तांतरित की। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों को देश की सुरक्षा के लिए जोखिम माना है। कुछ ही दिन पहले ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि जेडटीई अमेरिकन सेमीकंडक्टर और अन्य उपकरण की खरीद जारी रख सकती है।


अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते में चीनी रोजगारों को संरक्षण देने की बात भी शामिल है। जबकि ट्रम्प प्रशासन ने ही इसके पहले जेडटीई पर भारी जुर्माना लगाने के साथ उसे प्रतिबंधित श्रेणी में डालने की बात कही थी। उनके रुख में यह बदलाव संदिग्ध है क्योंकि चीन ने ट्रम्प की बेटी इवान्का के बिजनेस को एक ट्रेडमार्क दिया है। इसके अतिरिक्त चीन की एक सरकारी कंपनी ने इंडोनेशिया के व्यावसायिक समूह के होटल एवं गोल्फ कोर्स में थीम पार्क बनाने की डील की है, वह समूह ट्रम्प परिवार के बिज़नेस में सहयोगी है।


राष्ट्रपति ट्रम्प को अगर ऐसा लगता है कि वे अपने फैसलों से यह छवि स्थापित करना चाहते हैं कि वे उद्योंगों एवं कर्मचारी वर्ग के लिए चैंपियन की तरह हैं, तो उन्हें ऐसी गलतियां करने से खुद को रोकना होगा। उन्होंने दो महत्वपूर्ण धातुओं पर टैरिफ लागू करके न केवल अमेरिका के सहयोगियों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि अमेरिकी नेतृत्व को कमजोर करने वाला काम किया है। इसकी बजाय उन्हें स्टील एवं एल्यूमीनियम से जुड़े उद्योगों की समस्याओं पर गौर करना चाहिए। उन्हें यह भी देखना होगा कि वे अमेरिका के कर्मचारी वर्ग के लिए क्या कर रहे हैं, कहीं उनके फैसलों से उन्हें नुकसान तो नहीं पहुंच रहा।
© The New York Times

दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Editorial

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×