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उपवास का उद्देश्य अपने आप को दीन बनाना और दु:खियों की सेवा करना

एक वर्ष पहले
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चालीसा का पुण्यकाल

रांची | उपवास एक धार्मिक क्रिया है। यह एक ईश्वरीय आदेश है। उपवास के सही तरीके और अर्थ के संबंध में बाइबल बताती है कि, मनुष्य अपने आपको दीन करे। अन्याय से बनाए हुए दासों और अंधेरा सहने वालों को छुड़ा लेना। हमें दासत्व के सभी बंधनों को तोड़ देना है। अपनी रोटी भूखों को बांटना है। अनाथ और इधर उधर भटकते-फिरते हुए लोगों को अपने घर ले जाना है। किसी भी नंगे को देख कर उन्हें वस्त्र पहनाना है और समाज में सभी लोगों से अपने आप को नहीं छुपाना है और जरुरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना है। बाइबल हमें इस उपवास काल के दो पहलुओं से अवगत कराती है। इस 40 दिनों के उपवास काल के संबंध में बाइबल में लिखा है कि अपने वस्त्र नहीं अपने मन ही को फाड़ कर अपने परमेश्वर की ओर फिरो। उपरोक्त बाईबल के वचनों से हमें उचित उपवास के बारे में शिक्षा मिलती है। इस कथन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि उपवास का उद्देश्य परमेश्वर की ओर आना है।
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