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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: आनंदर करने वाला बेटा मां के घर नहीं रह सकता

3 वर्ष पहले
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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मां का अनादर करने वाले बेटे के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि मां का अनादर व उससे अशिष्टता का बर्ताव करने वाले बेटे को मां के घर में रहने का अधिकार नहीं है। पिछले दिनों एक मां ने अपने बेटे के प्रताड़ना से परेशान होकर मालाबार हिल स्थित फ्लैट के घर का ताला बदल दिया था। इसके बाद बेटे ने अपनी पत्नी के साथ मां के खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी।

 

क्या है कोर्ट का फैसला?
- सोमवार को बांबे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसजे काथावाल ने इस याचिका पर सुनवाई की। जज ने कहा कि बेटे का अपनी मां के घर में कोई अधिकार नहीं है। अगर, बेटे पर मां को प्रताड़ित करने, अपमानित करने और परेशान करने का आरोप है तो वह (बेटा) घर के भीतर घुसने के अधिकार का भी दावा नहीं कर सकता है। 

 

क्या था मां का तर्क?
- पेशे से डॉक्टर बुजुर्ग मां ने अदालत में अपने वकील के जरिए अपना पक्ष रखा कि पिछले कई वर्षों से वह अपने बेटे की वजह से शारीरिक व मानसिक यातना का लगातार सामना कर रही है। फिर भी, उसके बेटे के आचरण में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। इसलिए भयभीत होकर मैंने पुलिस थाने में भी बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

 

बेटे की सफाई
- हालांकि, बेटे ने दलील दी कि मां ने बहन के इशारे पर ऐसा किया है और मां के आरोपों को निराधार बताया। वहीं, मां ने बेटे के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि मेरी बेटी के पास अपना घर है। उसके पति का खुद का कारोबार है। 

 

मां को मिलेगी सुरक्षा
- मामले से जुडे़ दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने बुजुर्ग महिला को सुरक्षा का आश्वासन दिया और बेटे को कहा कि वह अदालत के अधिकारी की मौजूदगी में फ्लैट में रखी अपनी चीजें  ले जा सकता है। अदालत ने मालाबार हिल पुलिस थाने को निर्देश दिया है कि बुजुर्ग महिला को जब भी जरूरत हो तुरंत सहयोग प्रदान करे। 

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