फिश शॉप में हुई चोरी, नहीं मिला क्लेम तो लोक अदालत ने दिलाए 31 हजार रुपए

Panchkula Bhaskar News - सेक्टर-20 की मार्केट में चल रही फिश शॉप में चोरी होने के बाद शॉप ओनर ने इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांगा। क्लेम नहींं...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:36 AM IST
Panchkula News - theft in the fish shop the claim was not received by the lok adalat
सेक्टर-20 की मार्केट में चल रही फिश शॉप में चोरी होने के बाद शॉप ओनर ने इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांगा। क्लेम नहींं दिए जाने पर मामले की शिकायत लोक अदालत में की। लोक अदालत की ने इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया है। सेक्टर-19 के साथ लगते बलटाना निवासी नवप्रीत सिंह की सेक्टर-20 के एससीओ नंबर-290 की फर्स्ट फ्लोर स्थित कैबिन नंबर 5 में फिश क्यू नाम से शॉप है। उन्होंने फर्म को बजाज एलाइंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 6 लाख रुपए तक का 11 अप्रैल, 2013 को करवाया था। करीब 2 महीने बाद 9 जून, 2013 की रात को वह दुकान बंद घर गए। अगले दिन की सुबह 10 जून, 2013 को दुकान पर अपने पिता के साथ पहुंचे तो पाया कि दुकान का शीशा टूटा था और अंदर से सामान गायब था। चोरी में फिश फुड्स, फिल्टर, लाइट, टैप्स सहित अन्य चीजें हो चोरी हुई थी। दुकान में पीछे का दरवाजा व शीशा तोड़कर चोरी की गई थी। शिकायतकर्ता ने शिकायत सेक्टर-19 की चौकी में दी। इस पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। करीब महीने बाद भी चोर का पता नहीं लगने पर शिकायतकर्ता ने इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन दिया और 1.65 लाख रुपए क्लेम मांगा। इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। 12 दिसंबर, 2013 को कंपनी के भेजे गए लेटर में कहा गया कि क्लेम के तहत कुछेक हजार रुपए दिए जा सकते हैं बड़ी राशि नहीं दी जा सकती। शिकायतकर्ता ने कई बार इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांगा लेकिन नहीं सुनी। हारकर उसने शिकायत लोक अदालत में कर दी। अदालत के जज चमन लाल कोच्चर, सदस्य आर मित्तल और भूषण भाटिया की बेंच ने मामले में फैसला सुनाया है।

लोक अदालत

कंपनी ने की थी कम्प्लेंट खारिज करने की मांग...

मामले की प्रोसिडिंग के मुताबिक इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दी गई दलील में कहा गया कि चोरी होने की जानकारी मिलते ही सर्वेयर की ड्यूटी लगाई गई और उसकी ओर से 9 दिसंबर 2013 को सबमिट की गई रिपोर्ट में कुल 1983 रुपए का लॉस बताया गया। यहां तक कि सर्वेयर की ओर से कई बार कंज्यूमर से मुलाकात करने की कोशिश की गई और उसे रिमाइंडर भी भेजा गया, लेकिन शिकातकर्ता की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। यहां तक कि शिकायतकर्ता ने एक भी स्टॉक रजिस्टर मेंटेन नहीं किया है और न ही खरीदे गए सामान के कोई भी कागजात उसके पास हैं। ऐसे में उसके खिलाफ दी गई शिकायत को खारिज किए जाने की मांग की गई।

ये सुनाया फैसला... लोक अदालत के फैसले में यह साफ तौर पर कहा गया कि चूंकि शिकायतकर्ता की ओर से 1.65 लाख रुपए के क्लेम का कोई प्रूफ सुनवाई के दौरान प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए यह क्लेम नहीं मिल पाएगा। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि दुकान में चोरी हुई है और उसमें क्षति हुई है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश है कि शिकायतकर्ता को 15 हजार रुपए की राशि बतौर क्लेम दी जाए। साथ ही मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए 5 हजार और मुकदमे की राशि के लिए 11 हजार रुपए दिए जाए।

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