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डाउनलोड करेंरायपुर। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने और सरकार बनने की संभावनाओं को लेकर राजधानी में तीन दिन पहले भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में जहां जश्न का माहौल था वहीं शनिवार को सन्नाटा पसरा था। जहां ढोल -मांदर की थाप व पटाखों की गूंज सुनाई दे रही थी वहां पिन ड्राप साइलेंस था। पूरा दफ्तर जहां खचाखच भरा था, वहां कोई नजर नहीं आ रहा था। कर्नाटक में सरकार नहीं बनाने के मलाल को लेकर कुछ भी कहने को लेकर भाजपा नेता कन्नी काट रहे थे। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि खरीदी बिक्री की बात सही नहीं है, दरअसल मुख्यमंत्री बुकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा ने स्वच्छ प्रजातंत्र, स्वच्छ लोकतंत्र के सम्मान में इस्तीफा दिया है।
- कौशिक ने भास्कर से कहा कि येदियुरप्पा को लगा कि बहुमत उनके पास नहीं है। इसलिए उन्होंने त्यागपत्र दिया। आपको याद होगा, प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने भी सदन में बहुमत न होने पर त्यागपत्र दिया था। जबकि वे उस वक्त भी बड़े दल के सरकार के मुखिया थे। कौशिक ने कहा कि विपक्ष के विधायकों को खरीदने के आरोप गलत हैं। सरकार बनाने की कोशिश हर कोई करता है। संख्या बढ़ाने भी जोर-आजमाइश करता है। यदि बहुमत मिल जाए तो ठीक है। नहीं तो बहुमत का सम्मान करते हुए इस्तीफा देता है।
जेडीएस और कांग्रेस का अनैतिक गठबंधन
- भाजपा प्रवक्ता और विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के त्यागपत्र के लिए जेडीएस और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। सुंदरानी ने कहा कि दोनों दलों ने अनैतिक गठबंधन बनाया। जबकि कर्नाटक की जनता ने भाजपा को सरकार बनाने बनाने के लिए वोट दिया था। येदियुरप्पा ने मूल्यों की नैतिकता को लेकर त्यागपत्र दिया। हम अनैतिक रास्ते नहीं अपनाते हैं। प्रजातांत्रिक मूल्यों पर विश्वास रखते हैं। इस वजह से संख्या के गणित को बढ़ा नहीं पाए। कांग्रेस के विधायकों को खरीदने के आरोप मनगढ़ंत हैं, यदि ऐसा करते तो सरकार नहीं बना लेते।
कंटेंट : जॉन राजेश पॉल
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