ये वक्त है ब्रांड्स, गाड़ियां और टेक्नीक से आगे कुछ सोचने का

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Mar 27, 2020, 07:22 AM IST
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करनबीर सिंह सीबिया | चंडीगढ़

मैंने जीवन भर बहुत काम किया है। चार इंस्टीट्यूशन चलाने के अलावा कई सोशल एक्टीविटीज सेे भी जुड़ा हुआ हूं। हैरिटेज एंड लिटरेचर को लेकर संगरूर में बहुत सारा काम सिर पर लिया हुआ है। ये सारे काम करते हुए मैं कभी थका तो नहीं, लेकिन ये जरूर सोचता रहा कि फुरसत का वक्त कब आएगा। अब बिना किसी वॉर्निंग के जब ये फुरसत का वक्त सामने आ ही गया है तो मैं इसे बाहें खोलकर स्वीकार कर रहा हूं। कोरोना का संकट टालने के लिए हमारा अपने घरों में बने रहना जरूरी है। इसलिए इसमंे हमारा पूरा सहयोग होना चाहिए लेकिन इससे अलावा ये वक्त और क्या करने का है?

मैं अपनी कहूं तो मेरे लिए यह समय सेल्फ रिएलाइजेशन का है। यह सोचने का है कि ब्रांड्स, गाड़ियां और तकनीक के चक्कर में हम कहां आकर खड़े हो गए हैं। हमने अपना सुख-चैन किन चीजों को पाने के लिए खर्च कर डाला है। इस वक्त को बहुत सोचने और समझने मंे लगाने की जरूरत है। मैं इन दिनों अपने काम को लेकर बहुत ज्यादा चिंता नहीं कर रहा। लेकिन इस बात पर बहुत चिंतन कर रहा हूं कि आखिर जीवन का मकसद क्या है? हम अगर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते हैं तो किसी मंजिल की तलाश में? क्या पाते हैं और उसकी कीमत के रूप में क्या खो डालते हैं। अपने रिश्तों को संभालने में मेहनत नहीं कर पाते। उन्हें सहेजने के लिए जो कुछ करना होता है उस पर काम नहीं कर पाते। इन दिनों मुझे यह बात बहुत अच्छी तरह समझ आ रही है कि हम बहुत कम चीजों में गुजारा कर सकते हैं। अपने कई काम खुद कर सकते हैं। हमारी जरूरतों की डोर खुद हमारे हाथ में ही होती है। उसे जितनी बढ़ाना चाहो, बढ़ाते रह सकते हो। इसका कोई अंत नहीं। मैं इन दिनों अपने और अपने समाज के बारे में काफी चीजें सोच रहा हूं। निश्चित तौर पर इस लॉकडाउन के बाद जीवन में बदलाव आएंगे। मैं समझता हूं कि ये बदलाव बहुत पॉजिटिव होंगे। मैं व्यक्तिगत रूप से इस समय को एक ऐसे मौके के तौर पर देख रहा हूं, जिसमें जिंदगी ने एक तयशुदा वक्त देकर आपसे अपना लेखाजोखा चेक करने को कहा है। खुद देखिए क्या कमाया, क्या लुटाया। क्या अच्छा रहा कहां कमी रह गई। इस समय को लेकर बहुत नेगेटिव होने की जरूरत नहीं है। अपने घरवालों के साथ बैठना। खाना-पीना। उसके साथ काम में हाथ बंटाना। ये सब कितना सुख दे सकता है। इस बारे में सोचिए।

गोल्फ खेलने और स्विमिंग करने के ऑप्शन इस वक्त अगर बंद हो भी गए हैं तो घर पर बैठकर कई तरह के योग और फिटनेस एक्सरसाइज के ऑप्शन खुले हैं। उन्हें ट्राई करते रह सकते हैं। कहने का मतलब है कि कुदरत ने हमें ये जो मौका दिया है उसका भरपूर इस्तेमाल करें। नई चीजें सीखें। नए िसरे से जिंदगी को तरतीब दें।

हम लाेग लाइफ में किसी तरह के चैलेंज को भूल ही गए थे

लंबे अरसे से हम ऐसी नींद सो रहे थे, जिसमें सुख ही सुख था। किसी तरह की हड़बड़ी या फिर दुख का अंदेशा नहीं था। कोरोना लॉकडाउन एक तरह की दस्तक है, जिससे हम चौंककर जाग गए हैं। अब अपने इर्द-गिर्द देख रहे हैं कि कैसे क्या हो रहा है और हम इसमें क्या कर सकते हैं। ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के बीच के डिस्टेंस को इस दौरान कम किया जा सकता है। सोशल डिस्टेंसिंग को बरकरार रखते हुए भी। जिन लोगों से बहुत दिनों से मिले नहीं उनके हालचाल पूछिए। उनसे फोन पर बातें कीजिए। उन्हें अहसास दिलाइए कि आप उनके साथ हैं। इस वक्त का सबसे अच्छा इस्तेमाल होगा खुद को खुद के साथ कुछ समय के लिए अकेला छोड़ने पर। खुद को भी स्पेस देकर।

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