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डाउनलोड करेंपिछले लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सीटों पर क़ब्ज़ा करने वाली भारतीय जनता पार्टी बीते सात फ़रवरी को हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ तीन सीटों तक सिमट के रह गई. विजेंदर कुमार, ओम प्रकाश शर्मा और जगदीश प्रधान, बस इन तीन विधायकों पर पूरे सरकार को घेरने की ज़िम्मेदारी दिल्ली के मतदाताओं ने डाल दी है.
रोहिणी सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है. विजेंदर कुमार ने आम आदमी पार्टी के सीएल गुप्ता को हराया. विजेंदर कुमार को 59,866 वोट मिले जबकि गुप्ता 54,499 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे. यहां टक्कर कुछ इस तरह थी कि तीसरे नंबर पर रहे सुखबीर शर्मा को सिर्फ़ 3,399 वोट मिल सके.
भाजपा सिमटी इकाई अंक मेंस्थिति यह रही कि भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच का जितना अंतर है, कांग्रेस को उतने वोट भी नहीं मिल सके. ज़ाहिर है, विजेंदर कुमार और सीएल गुप्ता को छोड़ सभी उम्मीदवारों की ज़मानत तक दर्ज हो गई.
रोहिणी में भाजपा की हार सिर्फ़ 2013 में हुई थी. इसके अलावा वो यहां से हमेशा जीतती आई है. पिछली बार विजेंदर कुमार को शीला दीक्षित और अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ नई दिल्ली में उतारा गया था और वे बुरी तरह हार गए थे.
विपक्ष के अकेले अनुभवी सदस्यविजेंदर अकेले भाजपा विधायक हैं, जिनके पास विधानसभा का अनुभव है. सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ वे अकेले आम आदमी पार्टी के 67 सदस्यों से कैसे मोर्चा संभालेंगे, यद देखना वाक़ई दिलचस्प होगा.
भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश शर्मा ने विश्वासनगर सीट पर भी कब्ज़ा कर लिया है. उन्होंने आम आदमी पार्टी के अतुल गुप्ता को 11,000 वोट के बड़े अंतर से शिकस्त दी.
मुस्तफ़ाबाद सीट भी भारतीय जनता पार्टी की झोली में गई. जगदीश प्रधान ने कांग्रेस के हसन अहमद को 5,000 वोटों के अंतर से हराया. पिछली बार वे यहां से चुने गए थे, पर इस बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी.
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