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फ्रेंडशिप : अपनी इज़्ज़त का कितना ख़्याल है?

मस्ती-मज़ाक और हल्केपन में फ़र्क़ होता है। दोस्ती में घनिष्ठता के लिए घर-परिवार-समाज में अपनी इज़्ज़त दांव पर न लगाएं।

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2018, 04:44 PM IST
कोई कितना ही घनिष्ठ क्यों न हो, उसके घर जाएं तो अपने कपड़ों से लेकर लहज़े का ख़्याल रखें। कोई कितना ही घनिष्ठ क्यों न हो, उसके घर जाएं तो अपने कपड़ों से लेकर लहज़े का ख़्याल रखें।

रिलेशनशिप डेस्क. दफ़्तर में, साथियों के बीच, नाते-रिश्तेदारों के बीच कौन नहीं चाहेगा सब उनकी इज़्ज़त करें, उन्हें सम्मान दें। लेकिन यह मान किसी के दिल में एक दिन में नहीं जगाया जा सकता। आप घनिष्ठता बनाना चाहते हैं, यह ठीक है। लेकिन इसके लिए अनौपचारिकता का रास्ता अपनाना ज़रूरी नहीं। यह मानवीय प्रकृति है कि हम एक बार किसी से मिलने पर उनके बारे में कोई भी धारणा बना लेते हैं। ठीक उसी प्रकार सभी लोग हमारे व्यवहार, तौर-तरीक़ों पर भी ध्यान देते हैं। ऐसे में उन बातों या कार्यों से हमें बचना चाहिए जो आपका क़द दूसरों की नज़रों में कम कर सकते हैं।

आप कैसे पेश आते हैं, वो अहम है
हम जो कहते हैं, किसी के लिए जो कुछ करते हैं, वह सीधे तौर पर हमारे मन में उनके प्रति इज़्ज़त का सूचक है। जैसे दोस्त के घर आने पर टीवी या फोन में व्यस्त रहना, पानी के लिए जग या बोतल पकड़ा देना या बिना हैंडल वाले कप में चाय दे देना, यह क्रियाएं आपके लिए दोस्ती की बेतकल्लुफ़ी हो सकती है, लेकिन दोस्त को अपमानजनक लग सकती हैं। जैसा बर्ताव हम अपने लिए चाहते हैं वैसा ही दूसरों के साथ करना होगा। ख़ास मित्र परिवार की तरह ही होते हैं लेकिन समय-समय पर यह दर्शाना भी ज़रूरी है कि आप उनके अस्तित्व का भी विशेष सम्मान करते हैं।

भावनाओं को न लगे ठेस
आप किसी को कैसा तोहफ़ा देते हैं यह भी मायने रखता है। यहां बात मूल्य की नहीं भावनाओं की है। जन्मदिन हो या ख़ास मौक़ा हम तोहफ़े यह सोचकर नहीं ले जाते कि वह माइंड नहीं करेगा कि आज नहीं लाए। कल फलां जगह से 'कुछ अच्छा सा' ले आएंगे। लेकिन शायद ही किसी का 'कल' कभी आया हो। साथ ही यदि कोई निमंत्रण पत्र देने आता है तो हम केवल उससे कार्यक्रम स्थल का पता पूछ कर रह जाते हैं। विज़िटिंग कार्ड भी बिना पढ़े ही जेब में रख लेते हैं। निमंत्रण पत्र को देखना, पढ़ना और ख़ुशी व्यक्त करना, उसी समय बधाई देना भी सम्मान दर्शाने का ही एक तरीक़ा होता है।

अदब का रखें ख़ास ख़्याल
आपके तौर-तरीक़े व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ कहते हैं। कोई कितना ही घनिष्ठ क्यों न हो, उसके घर जाएं तो अपने कपड़ों से लेकर लहज़े का ख़्याल रखें। आख़िर मित्र के घर पर मित्र के साथ परिवार भी होता है। उनकी नज़रों में आपके मित्र की इज़्ज़त भी आप ही से होगी। आपका लहज़ा आपके दोस्त के लिए बेशक सामान्य होगा लेकिन उनके परिवार को यह बातें खटक सकती हैं। यूं ही बरमूडा और चप्पल पहनकर चले जाना, आपके लिए अनौपचारिकता या घरेलू रिश्तों का ऐलान हो सकता है, लेकिन वहां मौजूद अन्य लोगों की निगाह में यह आपकी छवि को बिगाड़ने में मदद करेगा।

मज़ाक और राज़ कभी नहीं
दोस्त एक दूसरे की हर अच्छी-बुरी आदतों से वाक़िफ़ होते हैं। आपस में तो मज़ाक चलता रहता है लेकिन कभी अनजाने में भी दूसरों के सामने उनका मज़ाक न बनाएं। मज़ाक जगह और परिस्थिति देखकर किया जाता है। कभी अपने परिवार के सामने तो हम उम्र दोस्तों के बीच भी कोई मज़ाक की बात उनका दिल दुखा सकती है। एक-दूसरे के राज़ के बारे में भी यही बात लागू होती है। अगर किसी ने आपको अपने राज़ संभालने का ज़िम्मा दिया है तो उनकी निजता का सम्मान करें।

'मैं' से रहें दूर
एक अच्छा दोस्त अच्छा श्रोता भी होता है। हर बार अपने बारे में ही बात न करें। अगर कोई कुछ बात करे तो उन्हें टोकें नहीं। हो सकता है आप किसी बात पर सहमत न हों, लेकिन पहले बात पूरी सुनें और फ़िर अपनी प्रतिक्रिया दें। किसी तीसरे दोस्त के बारे में कुछ भी कहने या मज़ाक बनाने से बचें, क्योंकि इससे उनके मन में यह भावना घर कर सकती है कि यदि ये दूसरों की बातें मुझे बता रहे हैं तो ज़ाहिर है कि मेरी बातें भी दूसरों को बताते होंगे। ग़ौर करने लायक बात यह है कि हम सब मित्रों-परिचितों में लोकप्रिय होना चाहते हैं। चाहते हैं कि सब कहें कि आप उनके घनिष्ठ हैं, लेकिन इस राह पर सावधानी से चलना ही मक़सद तक पहुंचाएगा। इज़्ज़त करें, इज़्ज़त पाएं।
- जिज्ञासा खवाल 

दोस्त एक दूसरे की हर अच्छी-बुरी आदतों से वाक़िफ़ होते हैं। आपस में तो मज़ाक चलता रहता है लेकिन कभी अनजाने में भी दूसरों के सामने उनका मज़ाक न बनाएं। दोस्त एक दूसरे की हर अच्छी-बुरी आदतों से वाक़िफ़ होते हैं। आपस में तो मज़ाक चलता रहता है लेकिन कभी अनजाने में भी दूसरों के सामने उनका मज़ाक न बनाएं।
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कोई कितना ही घनिष्ठ क्यों न हो, उसके घर जाएं तो अपने कपड़ों से लेकर लहज़े का ख़्याल रखें।कोई कितना ही घनिष्ठ क्यों न हो, उसके घर जाएं तो अपने कपड़ों से लेकर लहज़े का ख़्याल रखें।
दोस्त एक दूसरे की हर अच्छी-बुरी आदतों से वाक़िफ़ होते हैं। आपस में तो मज़ाक चलता रहता है लेकिन कभी अनजाने में भी दूसरों के सामने उनका मज़ाक न बनाएं।दोस्त एक दूसरे की हर अच्छी-बुरी आदतों से वाक़िफ़ होते हैं। आपस में तो मज़ाक चलता रहता है लेकिन कभी अनजाने में भी दूसरों के सामने उनका मज़ाक न बनाएं।
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