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रास चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार पर अाज विचार, कांग्रेस में संशय बरकरार

एक वर्ष पहले
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प्रदेश भाजपा ने रविवार को पार्टी की केंद्रीय कमेटी को झारखंड से राज्यसभा उम्मीदवार बनाने के लिए तीन नेता, रघुवर दास, दीपक प्रकाश और रवींद्र राय के नाम की अनुशंसा कर दी। अब सोमवार को दिल्ली में होनेवाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में उम्मीदवार का फैसला हो जाने की पूरी संभावना है। इधर सत्ताधारी गठबंधन के कांग्रेसी उम्मीदवार के नाम पर रविवार को भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। गठबंधन के प्रमुख सहयोगी झामुमो ने दूसरा उम्मीदवार तय करने की पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस पर छोड़ दी है। लेकिन कांग्रेस में चल रही माथापच्ची के बीच अभी तक किसी एक उम्मीदवार के नाम पर सहमति नहीं बनी है। दूसरी सीट के लिए वोटों के जुगाड़ की भागीरथी प्रयास की जरूरत को देखते हुए इतना ही कहा जा रहा है कि संभव है कि ऊपर से ही उम्मीदवार टपकेगा। राज्यसभा चुनाव के लिए रविवार को यहां प्रदेश भाजपा चुनाव समिति की हुई बैठक में कई लोगों के नाम आए। नामों की स्क्रूटनी के लिए प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, नेता विधायक दल बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह को अधिकृत किया गया। देर शाम हुए विमर्श के बाद तीन नाम भेजे गए। इस संदर्भ में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष से भी बात हुई।

गुरुजी 11 को 12 बजे करेंगे नामांकन दाखिल कांग्रेस के विधायक भी बनेंगे प्रस्तावक

झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन 11 मार्च को लगभग 12 बजे विस परिसर में निर्वाचन पदाधिकारी के पास नामांकन करेंगे। विधानसभा के सचिव ही राज्यसभा में निर्वाचन पदाधिकारी होते हैं। इसलिए उनके चैंबर में गुरुजी अपना नामांकन दाखिल करेंगे। मालूम हो कि रास चुनाव में नामांकन दाखिल करने के लिए 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। 10 विधायकों का प्रस्तावक बनना होता है। गठबंधन की मजबूती दर्शाने के लिए गुरुजी के प्रस्तावक कांग्रेस के विधायक भी बनेंगे।

बाबूलाल मरांडी का मामला तकनीकी पेंच में फंसा

झाविमो के भाजपा में विलय पर निर्वाचन अायोग की संपुष्टि के बाद बाबूलाल मरांडी का मामला एक बार फिर तकनीकी पेंच में फंस गया है। निर्वाचन अायोग ने झाविमो का भाजपा में विलय पर मुहर लगा दी है। झाविमो के चुनाव चिन्ह को भी फ्रीज कर दिया है। इस स्थिति में अब स्पष्ट करना अनिवार्य हो गया है कि विधानसभा के भीतर बाबूलाल मरांडी अब किस दल के विधायक हैं। क्योंकि अब उनका चुनाव चिन्ह कंघी और पार्टी रहा ही नहीं। इससे स्पीकर के ऊपर मरांडी के मामले में तकनीकी दबाव भी बढ़ गया है। निर्वाचन अायोग के फैसले के बाद वह नये परिप्रेक्ष्य में विधिक राय लेकर अंतिम फैसला करेंगे।

झामुमो ने कांग्रेस पर छोड़ी दूसरा नाम तय करने की जिम्मेदारी

रविवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक में रायशुमारी करते वरिष्ठ नेता।
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