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महिलाओं में होने वाले 5 प्रमुख कैंसर, लक्षणों को समय से पहचानें ताकि बढ़ने से रोका जा सके

गायनी आॅन्कोलॉजिस्ट डॉ. सभ्यता गुप्ता से जानते हैं इन कैंसर को लक्षणों के आधार पर कैसे पहचानें...

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 05:53 PM IST

हेल्थ डेस्क. भारत में महिलाओं को सर्वाधिक होने वाले 5 प्रमुख कैंसर चिन्हित किए गए हैं। हर साल क़रीब 7 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। सही समय पर रोग की पहचान हो जाए तो इस जंग में जीत जिंदगी की होगी। भारतीय महिलाओं में आमतौर पर स्तन, गर्भाशय, कोलोरेक्टल, अंडाशय और मुंह का कैंसर के मामले अधिक देखते जाते हैं। एक सर्वे के मुताबिक़ भारत में सर्वाइकल कैंसर से हर आठ मिनट में एक महिला की मृत्यु हो जाती है। डॉ. सभ्यता गुप्ता, गायनी आॅन्कोलॉजिस्ट, मेदांता-मेडिसिटी से जानते हैं इन कैंसर को लक्षणों के आधार पर कैसे पहचानें...

प्रमुख कारण कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी
2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में कैंसर का पता तीसरे या चौथी स्टेज में लगता है जिससे मरीज के बचने की आशंका कम रह जाती है। महिलाओं में कैंसर के कई कारण हैं। स्तन और ओवेरियन कैंसर के 6-8 प्रतिशत मामले आनुवंशिक होते हैं। जीवनशैली से जुड़े कारणों में मोटापा, धूम्रपान व शराब का सेवन शामिल है। कई मामलों में मासिक धर्म जल्दी शुरू होना या देर से बंद होना भी इसका कारण हो सकते हैं। बाहरी तौर पर वायु प्रदूषण, संक्रमित खाद्य पदार्थों का सेवन और प्रदूषित जल कैंसर के जोखिम को अधिक बढ़ा देता है। विश्व कैंसर रिपोर्ट के अनुसार 2012 में 5.37 लाख महिलाएं कैंसर से पीड़ित थीं वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 4.77 लाख था। यह आंकड़ा बढ़ रहा है इसलिए जागरूकता की बेहद जरूरत है।

महिलाओं को होने वाले कैंसर

1. ब्रेस्ट कैंसर
शहरी महिलाओं में यह कैंसर सबसे अधिक पाया जाता है। ग्रामीण महिलाओं में यह दूसरा सामान्य तौर पर पाया जाने वाला कैंसर है। आजकल कम उम्र में ही स्तन कैंसर के मामले
सामने आने लगे हैं। यह स्तन में असामान्य रूप से कोशिकाओं के परिवर्तन और वृद्धि होने से होता है, यही कोशिकाएं मिलकर ट्यूमर बनाती हैं।
लक्षण- दूध जैसा सफेद पदार्थ या खून आना, स्तन की त्वचा पर नारंगी रंग का स्पॉट दिखाई देना। कोई गांठ, अग्रभाग का धंसा हुआ होना, आकार में बदलाव होना।

2. सर्वाइकल कैंसर
इंडियन काउंसिल फॉर सर्वाइकल रिसर्च के मुताबिक़ सर्वाइकल कैंसर से भारत में वर्ष 2015 के दौरान क़रीब 63 हजार महिलाओं की मृत्यु हुई थी। यह ह्यूमन पैपिलोमा नामक
वायरस से होता है जो यौन संबंध से फैलता है। यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा से शुरू होता है, जो गर्भाशय का सबसे निचला हिस्सा है। यहां से यह कैंसर धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है।
लक्षण- रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव होना, सामान्य से अधिक रक्तस्राव, असामान्य डिस्चार्ज चेतावनी के संकेत हैं।

3. कोलोरेक्टल कैंसर
महिलाओं में यह तीसरा सबसे आम कैंसर है। यह बड़ी आंत को प्रभावित करता है। अधिकतर मामलों में इसकी शुरुआत कोशिकाओं के नॉन कैंसरस ट्यूमर के रूप में होती है जिसे नजरअंदाज किया जाए तो यह कैंसर बन सकता है।
लक्षण- डायरिया या कब्ज़ समेत पेट सम्बंधित परेशानी सेना, चार हफ्ते से अधिक समय तक मल में बदलाव, मलद्वार से खून आना, पेट में दर्द रहना, वज़न घटना और कमजोरी या थकान।

4. अंडाशय का कैंसर
अंडाशय या ओवेरियन कैंसर 30 से 65 वर्ष की उम्र की महिलाओं में अधिक होता है। जिनके परिवार में पेट, अंडाशय, स्तन या गर्भाशय के कैंसर का कोई इतिहास रहा हो उनमें इस कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
लक्षण- पेल्विस (पेडू) या पेट के निचले हिस्से में दर्द, अपच, बार-बार पेशाब आना, भूख न लगना, पेट में सूजन और फूलना।

5. मुंह का कैंसर
मुंह का कैंसर महिलाओं को भी उतना ही प्रभावित करता है जितना पुरूषों को। प्रमुख कारण तम्बाकू या शराब का अधिक सेवन है।
लक्षण- मुंह में लाल या सफेद निशान, गांठ बनना, होंठों या मसूड़ों में खराबी, सांस में बदबू की समस्या, दांतों का कमजोर होना और वजन बेहद कम होना। इनमें से कोई भी लक्षण के पाए जाने पर तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।