ट्रैवल

--Advertisement--

पूर्व का स्कॉटलैंड : बादलों का डेरा, हिल स्टेशन, हरियाली के बीच झरनों की खूबसूरती यानी शिलांग

मेघालय का अर्थ मेघों का निवास होता है। इसका यह नाम यहां दुनिया में सर्वाधिक बारिश होने की वजह से पड़ा।

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 12:36 PM IST
शिलांग शहर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलिफेंट फॉल एक चर्चित पर्यटन स्थल है। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू’ है। इसका मतलब तीन चरणों में पानी का गिरना होता है। शिलांग शहर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलिफेंट फॉल एक चर्चित पर्यटन स्थल है। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू’ है। इसका मतलब तीन चरणों में पानी का गिरना होता है।

लाइफस्टाइल डेस्क. मेघालय की राजधानी शिलांग तो वैसे भी बेहद खूबसूरत जगह है लेकिन मानसून के मौसम में यहां की खूबसूरत दोगुनी हो जाती है। इस मौसम में शिलांग के झरनों के पानी का बहाव तेज हो जाता है। इसके अलावा यहां की पहाड़ियों पर फैली हरियाली आपको खुशियों से सराबोर कर देगी। मेघालय का अर्थ मेघों का निवास होता है। इसका यह नाम यहां दुनिया में सर्वाधिक बारिश होने की वजह से पड़ा। यह भारत के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है।

6 प्वाइंट्स : पूर्व के स्कॉटलैंड यानी मेघालय की खूबसूरती से जुड़े
1.
राजधानी शिलांग की यात्रा भारत की बेमिसाल संस्कृति और भौगोलिक विविधता से रूबरू कराती है। यहां झरने, हरी-भरी वादियां, धरती का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान और पेड़ की जड़ों व शाखाओं से बने खूबसूरत पुल देखने को मिलते हैं। पूर्व का स्कॉटलैंड कहे जाने वाले शिलांग की वास्तुकला और खान-पान में भी ब्रिटिश झलक देखने को मिलेगी।

2. शिलांग के आसपास कई झरने हैं, लेकिन बहुत ऊंचाई पर स्थित हाथी झरना सबसे प्रसिद्ध है। यहां से शिलांग शहर और आसपास के गांवों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। शिलांग तो वैसे भी बेहद खूबसूरत जगह है लेकिन मानसून के मौसम में यहां की खूबसूरत दोगुनी हो जाती है। इस मौसम में शिलांग के झरनों के पानी का बहाव तेज हो जाता है। इसके अलावा यहां की पहाड़ियों पर फैली हरियाली आपको खुशियों से सराबोर कर देगी।

3. शिलांग पीक शिलांग की सबसे ऊंची चोटी है। यहां से आप पूरे शिलांग शहर का विहंगम नजारा देख सकते हैं। देश-विदेश से हर साल इसे देखने के लिए लाखों पयर्टक आते हैं। यहां के स्थानीय जनजातीय लोगों का मानना है कि उनके देवता लीशिलांग इस पर्वत पर रहते हैं।

4. स्प्रेड ईगल फॉल शिलांग का सबसे चौड़ा झरना है। बाज की तरह का दृश्य दिखाई देने की वजह से इस झरने का नाम स्प्रेड ईगल फॉल पड़ा। शिलांग की खासी जनजाति इस झरने को 'उरकालियर झरना' पुकारती है।

5. शिलांग शहर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलिफेंट फॉल एक चर्चित पर्यटन स्थल है। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू’ है। इसका मतलब तीन चरणों में पानी का गिरना होता है। यहां की खूबसूरत सड़कों का नजारा देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इस झरने को एलिफेंट फॉल नाम अंग्रेजों ने दिया, क्योंकि यहां की एक चट्टान हाथी से काफी मिलती-जुलती थी। इस झरने में काली चट्टान के ऊपर से दुधिया पानी बहता है।

6. शिलांग से दो नेशनल हाईवे गुजरते हैं। एक 40 किलोमीटर का जो शिलांग को गुवाहाटी से जोड़ता है और दूसरा 44 किलोमीटर का जो शिलांग को त्रिपुरा और मिजोरम से जोड़ता
है। शिलांग पहुंचने का सबसे बढ़िया माध्यम गुवाहाटी से ट्रेन या फ्लाइट है। गुवाहाटी से बस व टैक्सी भी उपलब्ध हैं।

फैक्ट्स एंड फिगर्स
1966 मी. समुद्र तल से ऊपर है शिलांग की सबसे ऊंची चोटी शिलांग पीक।
1695 मीटर की ऊचाई पर बसे शिलांग में मौसम हमेशा खुशगवार बना रहता है।
56 किमी दूर है शिलांग से चेरापूंजी, जो दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला स्थान है। यहां के नजारे बेहद रोमांचक हैं।

उमियम झील मेघालय की राजधानी शिलांग से उत्तर दिशा में 15 किलोमीटर दूर पहाड़ों में स्थित है। इसे आमतौर पर बारापानी झील भी कहा जाता है। उमियम झील मेघालय की राजधानी शिलांग से उत्तर दिशा में 15 किलोमीटर दूर पहाड़ों में स्थित है। इसे आमतौर पर बारापानी झील भी कहा जाता है।
X
शिलांग शहर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलिफेंट फॉल एक चर्चित पर्यटन स्थल है। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू’ है। इसका मतलब तीन चरणों में पानी का गिरना होता है।शिलांग शहर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलिफेंट फॉल एक चर्चित पर्यटन स्थल है। इस झरने का स्थानीय नाम ‘का कशैद लाई पातेंग खोहस्यू’ है। इसका मतलब तीन चरणों में पानी का गिरना होता है।
उमियम झील मेघालय की राजधानी शिलांग से उत्तर दिशा में 15 किलोमीटर दूर पहाड़ों में स्थित है। इसे आमतौर पर बारापानी झील भी कहा जाता है।उमियम झील मेघालय की राजधानी शिलांग से उत्तर दिशा में 15 किलोमीटर दूर पहाड़ों में स्थित है। इसे आमतौर पर बारापानी झील भी कहा जाता है।
Click to listen..