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अस्पतालोें में टीमों के दौरे: एमसीआई की टीम रिपाेर्ट तैयार कर ले गई साथ, ना तो यहां हॉस्टल ना ही ट्रांस्पोर्ट की सुविधा

2 वर्ष पहले
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डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला के अस्पतालों में एमसीआई के अलावा स्टेट टीमों ने दौरा कर अपनी-अपनी रिपाेर्ट तैयार कर ली हैं। मेडिकल कॉलेज में तीसरे सत्र के लिए जहां इंस्पेक्शन का कार्य एमसीआई की टीम ने किया वहीं यदि इस सत्र को ओके रिर्पोट के बाद चलाने को हरी झंडी मिलती है तो यहां प्रशिक्षु डॉक्टर्स की तादाद 300 हो जाएगी। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि दूसरा सत्र होने के बाद भी अभी तक ना तो यहां के प्रशिक्षु डॉक्टर्स को स्थाई कॉलेज हॉस्टल की सुविधा मिल पाई है न ही उनके लिए कॉलेज की अपनी परिवहन सुविधा जुट पाई है। तीसरे सत्र के शुरु होते ही यहां के प्रशिक्षुओं को रुरल व अर्बन मेडिकल कॉलेज ट्रेनिंग केंद्र टौणीदेवी और भोटा में भी प्रेक्टिकली तौर पर जा कर ट्रेनिंग का एक हिस्सा पुरा करना है। ऐसे में जाहिर है परिवहन सुविधा अपनी नहीं होने के कारण उन्हें हायर किए वाहनों से ही वहां पहुंचाना पड़ेगा। यही हाल यहां हॉस्टल न होने से उन्हें इसके लिए बाहरी क्षेत्रों में ही कमरे या पीजी सुविधा को लेने पर विवश होना पड़ेगा। हालांकि सूत्रों की मानें तो इस रिर्पोट में जरुर करीब आधा दर्जन बिंदुओं को चिन्हित किया गया है जिन्हें अब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को पूरा करना होगा। नहीं तो तीसरे सत्र से हाथ भी धोना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग टौणीदेवी के बीएमओ डॉ. आरके अग्नीहोत्री का कहना है कि कायाकल्प के लिए अस्पताल का चयन हुआ है। स्टेट टीम ने दौरा किया है।

यहां भी मात्र दो ही अस्पताल: मेडिकल कॉलेज बेशक तीसरे सत्र के लिए टीम का दौरा हुआ हो लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि कायाकल्प के लिए जिला के अस्पतालों का भी हाल इतना सुखद नहीं है। यहां के सिविल अस्पताल सुजानपुर और टौणीदेवी ही इसके लिए क्वालीफाई कर सके हैं। यहां का दौरा कायाकल्प योजना के तहत स्टेट की टीम में डब्ल्यूएचओ कंस्लटेंट चंडीगढ़ डॉ. हरविंद्र सारंग, दिल्ली से डॉ. जय गोपाल वोहरा ओर आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डॉ. धीमान ने दौरा पूरा कर अपनी रिर्पोट तैयार की जिसे वह राज्य को सौंपेगी। जहां से यह क्लीयर हो पाएगा कि आखिर किस अस्पताल ने कायाकल्प किया और इनामी राशि के हकदार कौन अस्पताल है।
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