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विशेष अदालत : केसों के रिकॉर्ड ट्रांसफर की प्रक्रिया सुस्त, HC ने सभी जिला कोर्ट को लिखा पत्र

3 वर्ष पहले
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भोपाल.    सांसद विधायकों के आपराधिक मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए राजधानी में गठित स्पेशल कोर्ट में अब तक 3 विधायकों से जुड़े सिर्फ 7 केस ही ट्रांसफर होकर आ सके हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी केसों के रिकॉर्ड ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी सुस्त है। हाईकोर्ट ने एक बार फिर सभी जिला न्यायालयों को पत्र जारी कर अप्रैल माह के अंत तक मौजूदा सांसद-विधायकों से जुड़े सभी आपराधिक मुकदमें भोपाल ट्रांसफर करने के निर्देश जारी किए हैं। भोपाल स्पेशल कोर्ट में अब तक जिन नेताओं के केस ट्रांसफर होकर आए हैं, उनमें दो विधायक कांग्रेस के, जबकि एक भाजपा का है। तीनों ही विधायकों के केसों में डे-टू-डे बेसिस पर ट्रॉयल जारी है।

 

ऐसी है तीनों विधायकों के केसों में ट्रायल की स्थिति

गोपाल परमार, भाजपा : पेशी - 7 अप्रैल

आगर-मालवा से विधायक गोपाल परमार के खिलाफ 4 आपराधिक केस ट्रांसफर होकर स्पेशल कोर्ट में आ चुके हैं। इनमें से दो केसों में 7 अप्रैल को सुनवाई होनी है। ये केस 5 साल पूर्व एसडीएम कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान विवाद से जुड़े हैं, इनमें गवाह-साक्ष्य पेशी पर लगातार सुनवाई जारी है। एक अन्य केस में 27 मार्च को परमार कोर्ट में पेश हो चुके हैं, जो 15 वर्ष पूर्व आगर-मालवा में बिजली कार्यालय में हंगामा, तोड़फोड़ और बिजली कर्मचारियों से मारपीट से जुड़ा हुआ है।

 

निशंक जैन, कांग्रेस : पेशी -20 अप्रैल

गंजबासौदा के विधायक निशंक जैन और उनके भाई आदेश जैन ने 9 साल पहले विजय जैन के घर में घुसकर मारपीट और जान से मारने की धमकी दी थी। केस फैसले की स्थिति में है, लेकिन फैसला देने पर हाईकोर्ट ने सशर्त रोक लगा रखी है। इसी घटना से जुड़ा एक अन्य केस विधायक के भाई के नाम से विदिशा कोर्ट में चल रहा है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने 9 मई 2016 को इन दोनों केसों का फैसला एक साथ देने का आदेश दिया था।

 

जीतू पटवारी, कांग्रेस : पेशी - 10 अप्रैल

पुलिस जवान से अभद्रता और मारपीट के 10 साल पुराने एक केस में स्पेशल कोर्ट ने राऊ विधायक जीतू पटवारी के खिलाफ एक दिन पूर्व ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पटवारी को 10 अप्रैल को न्यायालय में पेश होना है। अभियोजन के मुताबिक इंदौर के खुडेल थाना क्षेत्र में 11 दिसंबर 2007 को वाहन चेकिंग के दौरान पटवारी ने प्रधान आरक्षक कैलाश के साथ अभद्रता और सरकारी काम में दखलंदाजी की थी।

 

सर्वाधिक केस सरकारी काम में बाधा डालने के
सांसद-विधायकों पर सबसे ज्यादा केस सरकारी काम में बाधा डालने और लोकसेवकों से विवाद के हैं। इसके अलावा हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलवा, दंगा जैसे गंभीर आपराधिक मामले भी नेताओं के खिलाफ दर्ज हैंै। करीब 50% केस एक दशक से ज्यादा पुराने हैं। हाईकोर्ट सूत्रों के मुताबिक मौजूदा सांसद-विधायकों के खिलाफ छोटे-बड़े 135 केस अलग-अलग जिलों की अदालतों में चल रहे हैं।

 

हर माह सुप्रीम कोर्ट को भी भेजी जानी है प्रोग्रेस रिपोर्ट
सांसद-विधायकों के आपराधिक मामलों के शीघ्र विचारण के लिए गठित स्पेशल कोर्ट की कार्यवाही की प्रोग्रेस रिपोर्ट हर माह सुप्रीम कोर्ट भेजी जानी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही मप्र हाईकोर्ट ने 26 फरवरी को भोपाल में सांसद-विधायकों के लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष कोर्ट का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साल के अंदर मौजूदा सांसद-विधायकों के खिलाफ लंबित सभी केसों का निराकरण करने के आदेश दिए हैं।

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