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केंद्र के फैसले से आदिवासी, दलित व अल्पसंख्यक डरे एनआरसी-एनपीआर लागू हुआ तो शांति व्यवस्था बिगड़ेगी
आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो, रांची महाधर्मप्रांत के सहायक बिशप थियोडोर मस्करेनहस, सिमडेगा के बिशप विसेंट बरवा, खूंटी के बिशप बिनय कंडुलना, हजारीबाग के बिशप आनंद जोजो और गुमला के बिशप पॉल लकड़ा शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नए विधानसभा स्थित सीएम कार्यालय में मिले। मिशनरी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले से होने वाली परेशानियों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सीएए को केंद्र सरकार ने लागू कर दिया है, लेकिन संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ करके इसे लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि सीएए को पूरी तरह रद्द किया जाए या संविधान के अनुरूप उसे लागू किया जाए। बिशप मस्करेनहस ने कहा कि एनआरसी पर सरकार अपनी बातों को स्पष्ट रूप से नहीं रख रही है। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह एनआरसी लागू कर रही है या नहीं?
बोले... जनगणना सूची में सरना कोड शामिल करें व धर्म लिखने का विकल्प दें
उन्होंने कहा कि जनगणना 2011 की प्रणाली के अनुसार ही नई जनगणना कराई जाए और जनगणना सूची में सरना कोड को शामिल करने व आदिवासियों को अपना धर्म लिखने का विकल्प दिए जाने तक एनपीआर को स्थगित रखा जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले से आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक काफी डरे हुए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर देश के आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर पड़ सकता है। क्योंकि, उनके पास न तो रहने का ठिकाना होता है न ही पक्की नौकरी, जिसके कारण उन्हें कागजात जुटाने के लिए भटकना पड़ेगा। एनआरसी और बिना संशोधन के एनपीआर लागू हुआ तो देश की शांति व्यवस्था बिगड़ेगी। इसलिए, राज्य सरकार को इस तरह के कानून को जबरन थोपने का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इन कानूनों को लागू करना ही है तो उसे संविधान के तहत लागू करें, जो हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और आजादी के अधिकार को नुकसान पहुंचाए बिना जीने और रहने का अधिकार देता है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आदिवासियों-अल्पसंख्यक के हित में फैसला लेने का आग्रह किया। मौके पर रांची आर्च डायसिस के सचिव फादर सुशील टोप्पो, पीआरओ फादर आनंद डेविड खलको और रांची एग्च डायसिस के एजुकेशन इंचार्ज फादर मुकुल कुल्लू शामिल थे।