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डाउनलोड करेंग्वालियर. चार युवकों ने सीआईडी में कार्यरत हवलदार की 14 साल की बेटी नौवीं कक्षा की छात्रा को टेंपो में बंधक बनाकर करीब साढ़े तीन घंटे तक न सिर्फ छेड़छाड़ की बल्कि उसे झाड़ियों में भी ले गए। गनीमत रही कि कुछ लोगों ने इन युवकों को देख लिया और छात्रा उनकी कैद से आजाद हो गई। लेकिन इसके बाद पुलिस ने भी अमानवीयता की हद पार कर दी। घटना के बाद छात्रा और उसके पिता को करीब डेढ़ घंटे तक एक थाने से दूसरे थाने पर भेजा गया। वरिष्ठ पुलिस अफसरों से शिकायत करने के बाद देर शाम अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
उन्होंने मेरा मोबाइल बंद कर दिया, जबर्दस्ती पकड़कर छेड़ते रहे, झाड़ियों में भी ले गए
मैं नौवीं की छात्रा हूं। जीडीए दफ्तर के पास अंग्रेजी की कोचिंग पढ़ने जाती हूं। शनिवार सुबह 8.30 बजे कोचिंग के लिए घासमंडी से किलागेट तक पैदल गई और फिर टेंपो में बैठ गई। उस समय टेंपो में एक आंटी बैठी थीं। सेवानगर से पहले आंटी उतर गईं। नूरगंज पर चार लड़के टेंपो में बैठे। टेंपो में उन चार लड़काें और मेरे अलावा कोई सवारी नहीं थी। लड़कों ने पहले गंदी फब्तियां कसना शुरू किया। इसके बाद मुझसे छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया। एक लड़के ने मेरा मोबाइल छीनकर बंद कर दिया। चारों ने मुझे जबरदस्ती पकड़ लिया। जब मैं चिल्लाने लगी तो मेरा मुंह दबाकर जान से मारने की धमकी दी। कहा-टेंपो से नीचे फेंक देंगे। जीडीए ऑफिस के सामने टेंपो पहुंचा तो मैं फिर चीखी। टेंपो वाले अंकल भी उनसे मिले हुए थे। चारों ने उनसे कहा- टेंपो मत रोकना। इसके बाद यह लोग फूलबाग से इंदरगंज फिर मोतीमहल, पड़ाव, स्टेशन होते हुए गोला का मंदिर के पास कटारे फार्म हाउस तक मुझे ले गए। दोपहर करीब 12.15 बजे लड़कों ने मुझे उतारकर टेंपो वाले को भगा दिया और झाड़ियों में ले जाकर मेरे साथ अश्लील हरकतें करने लगे। तभी दो लोग आते दिखे तो चारों लड़के भागकर कहीं छिप गए। मैं झाड़ियों से भागकर सड़क पर आ गई। मैंने मोबाइल चालू कर पापा को कॉल कर घटना बताई। पापा की एक दूसरे टेंपो वाले से बात भी कराई। हजीरा तक इस टेंपो वाले ने मुझे छोड़ा। यहां से पापा साथ ले गए। अब भी मेरी आंखों के सामने से वह नजारा नहीं हट रहा है। उनके हाथ कांटे जैसे चुभ रहे थे। मैं सामने आने पर आरोपियों को पहचान लूंगी।- पीड़ित छात्रा
पिता का दर्द : मैं पुलिस का कर्मचारी हूं फिर भी मुझे इस थाने से उस थाने घुमाते रहे
मेरी बेटी दो घंटे तक घर नहीं पहुंची। फोन किया तो मोबाइल बंद मिला। मैंने कोचिंग पर फोन किया तो पता लगा वह कोचिंग पहुंची ही नहीं। इसके बाद मैं पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा। पुलिसवालों ने मुझे ग्वालियर थाने जाने को कहा। वहां पहुंचा तो मुझे पड़ाव थाने जाने को कहा। इस बीच दोपहर 12.45 बजे बेटी का फोन आया। उसने घटना के बारे में बताया। मैं हजीरा से उसको लेकर पड़ाव थाने गया तो वहां से ग्वालियर थाने जाने को कहा गया। इस पर मेरे भाई ने एएसपी को फोन किया। इसके बाद ग्वालियर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। मैं पुलिस विभाग का ही कर्मचारी हूूं और मेरे विभाग के कर्मचारियों ने ही मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया। -पीड़ित छात्रा के पिता
भास्कर विचार : पुलिस के लिए शर्म की बात
ग्वालियर पुलिस के लिए यह घटना बेहद शर्मनाक है। भीड़ भरे इलाके से टेंपो में सवार हुई छात्रा के साथ चार बदमाश साढ़े तीन घंटे तक छेड़छाड़ करते रहे। टेंपो तीन थानों पड़ाव, इंदरगंज, ग्वालियर थाने की सीमा से गुजरा। कई चेकिंग प्वॉइंट पर निकले, किसी ने न टेंपो में झांका न ही बदमाशों को पुलिस का भय था। पुलिस ने घटना के बाद अमानवीयता की हद पार कर पीड़िता व पिता को डेढ़ घंटे तक घुमाया।
सीधी बात : सतेन्द्र तोमर, एएसपी
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