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डाउनलोड करेंदर्द का रिश्ता ऐसा... इनमें से कोई विराज और हेलीश की मां नहीं है, लेकिन दुख इतना है कि हर कोई रो रहा है, क्योंकि ये किसी की तो मां हैं। डिंडोली की मानसी सोसाइटी की हर महिला अनलॉक कार में हुई दोनों बच्चों की मौत से गहरे सदमे में दिखी। हर किसी की आंख में आंसू थे। इन मांओं की चीखें मौत के मातम के सन्नाटे को चीरती हुई हर किसी के दिल को झकझोर रही थी।
सूरत. शहर के डिंडोली की मानसी रेजिडेंसी में रहने वाले दो परिवारों ने सोमवार को एक साथ अपने इकलौते चिराग खो दिए। दोपहर साढ़े 12 बजे घर से नमकीन लाने निकले दोनों बच्चे बाहर खड़ी कार में बैठ गए। बैठते ही कार का गेट लॉक हो गया। तपती धूप में कई घंटे लॉक रहने के कारण तपिश और घुटन के चलते दोनों बच्चों की सांसें थम गईं। ये था मामला...
- डेढ़ बजे से परिजन और सोसाइटी के लोग बच्चों को तलाश रहे थे। पुलिस को भी सूचना दे दी थी। शाम 7 बजे कार के पास कुत्तों के भौंकने पर पता चला कि दोनों अंदर लॉक हैं। कांच तोड़कर दोनों को अस्पताल ले गए, जहां मृत घोषित कर दिया गया। दोनों की चमड़ी झुलस गई थी, फफोले पड़ चुके थे। मानसी रेजिडेंसी के मकान नंबर 67 में रहने वाले निखिल जरीवाला ने 4 वर्षीय विराज और मकान नंबर 62 के महेश रुपावाला ने 5 वर्षीय हेलीश को इस घटना में खो दिया। विराज जूनियर केजी में और हेलीश सीनियर केजी में पढ़ता था और 7 जुलाई को उसका बर्थडे था।
मृतक की मां को पांच महीने से घबराहट थी, कहा- पता नहीं था बच्चों के साथ ऐसा होगा
- हेलीश की मां जेनी रूपावाला ने कहा, हेलीश और विराज में गहरी दोस्ती थी। दोनों हमेशा साथ ही रहते थे। साथ ही खेलते थे, साथ ही खाते थे। यहां तक कि दोनों साथ नहाते भी थे। हादसे के दिन भी दोनों साथ दुकान पर नमकीन लाने किराने की दुकान पर गए थे। दोनों हर शाम साथ साइकिल भी चलाते थे। दोनों को कार से घूमने का बहुत शौक था।
- ऐसा लगता था कि दोनों एक ही घर में रहते हैं। चार-पांच मकान की दूरी उन्होंने खत्म कर दी थी। जबसे स्कूल की छुट्टी हुई थी, दोनों एक ही घर में ज्यादा समय बिताते थे।
- मैं दोनों के लिए खाना भी पकाती थी। पिछले चार-पांच महीने से मुझे किसी अनहोनी की आशंका हो रही थी। घबराहट सी होती थी।
- सोशल मीडिया पर मैसेज चल रहे थे कि बच्चों का अपहरण करने वाली गैंग सक्रिय है। भेस्तान इलाके में कुछ बच्चों का अपहरण भी हुआ था, इसलिए मुझे डर लगता था। मुझे क्या पता था कि हमारे दोनों बच्चों के साथ भी ऐसा हो जाएगा।
- किसी पर शंका नहीं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि जैसे बच्चों के साथ किसी ने कुछ अनहोनी कर दी हो। ऐसा इसलिए कि जहां पर कार खड़ी थी, वहां आस-पास के सभी घर बंद थे। हो सकता है कि किसी ने बच्चों को उन घरों में बंद करके रखा हो और बाद में कार में डाल दिया।
लॉक होने से कार के भीतर की गर्मी 51 डिग्री तक हो गई
डीसीपी राकेश बारोट ने बताया कि कार रविवार सुबह से मानसी रेजिडेंसी में खड़ी थी, जो शायद अनलॉक थी। बच्चे खेलते-खेलते कार में चले गए और उनसे अंदर से लॉक हो गई। गर्मी, उमस और सांस नहीं ले पाने के कारण बच्चों ने दम तोड़ दिया। फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ. पृथुल देसाई के मुताबिक, बंद कार से गर्मी बाहर नहीं आ पाती। खुले में खड़ी कार के भीतर का तापमान एक घंटे में 35.6 डिग्री से बढ़कर 51 तक पहुंच गया होगा।
बच्चों को देखकर लगा जैसे तंदूर में जल गए हैं
मैं भी मानसी रेजिडेंसी में ही रहता हूं। बच्चों के लापता होने से पूरी सोसायटी परेशान थी। हर कोई एक-एक गली में जाकर दोनों को तलाश रहा था, जैसे खुद के बच्चे खो गए हों। शाम 7 बजे के करीब कार के पास कुत्तों को भौंकता देख कुछ बच्चे वहां गए तो अंदर दो बच्चे दिखे। उन बच्चों ने इसकी जानकारी मुझे दी। वहां जाकर देखा तो वाकई में दोनों बच्चे कार में थे। एक पल सुकून महसूस हुआ, लेकिन फिर अनहोनी की आशंका हुई। तत्काल दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुला। पत्थर से लेफ्ट साइड का कांच तोड़कर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। शरीर देखकर लगा जैसे तंदूर में जल गए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन देर हो चुकी थी।
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