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जिन चार जिलों में जैविक खेती को देना था बढ़ावा, वहीं मुफ्त बांट रहे हैं दो करोड़ के हाईब्रिड बीज

2 वर्ष पहले
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रायपुर. छत्तीसगढ के जिन पांच जिलों में शासन ने जैविक खेती करने की घोषणा की है, उनमें से चार जिलों में हाइब्रिड बीज बांटा जा रहा है। जबकि दावा किया गया था कि इन जिलों को जैविक जिले के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन जिलों में हाइब्रिड बीज क्यों बांटा जा रहा है। इसके लिए बीज निगम ने खरीदी भी शुरू कर दी है। 

 


इसके बाद भी रायपुर समेत प्रदेश के सभी 26 जिलों के लिए कृषि विभाग करोड़ों रुपए के हाइब्रिड मक्का बीज खरीद रहा है। इसमें प्रदेश के वे चार जिले भी शामिल हैं, जिनको सरकार जैविक जिले के रूप में विकसित कर रही है। शासन की तरफ से पिछले साल भी करोड़ों रुपए के हाइब्रिड धान के बीज कंपनियों से खरीदकर किसानों के बांटे गए थे। इस तरह से प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की कोशिशों को अफसर नाकाम करने में जुटे हैं। दबी जुबान में विभाग के अफसर भी मान रहे हैं कि इन जिलों में रासायनिक खाद का उपयोग बंद होना चाहिए, लेकिन हाइब्रिड बीज की खरीदी कर बांटने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

 

15 करोड़ रुपए के मक्का बीज
बीज निगम प्रदेश के सभी 26 जिलों के लिए 15 करोड़ रुपए के मक्का बीज की खरीदी कर रहा है। इसमें से 2 करोड़ 4 लाख रुपए के मक्का बीज केवल चार जैविक जिलों के लिए है। इसमें 1 करोड़ 12 लाख रुपए के हाइब्रिड मक्के के बीज अकेले गरियाबंद जिले में खरीदे जाने हैं। इसके अलावा नारायणपुर में 80 लाख रुपए, सुकमा 8 लाख रुपए और बीजापुर के लिए 4 लाख रुपए के बीज खरीदे जाने हैं। हालांकि दंतेवाड़ा जिले में कृषि विभाग बीज की खरीदी नहीं कर रहा है। 

 

मुख्य सचिव की कमेटी ने लिया यह फैसला 
मक्का बीज की खरीदी का यह निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति (एसएलएससी) की बैठक में लिया गया है। किसानों को 4 किलोग्राम के हाईब्रिड मक्का बीज मिनिकिट मुफ्त में बांटा जाना है। सौर सुजला योजना के तहत पंप लगाने वाले किसानों को प्राथमिकता से यह बीज उपलब्ध कराया जाना है।


दंतेवाड़ा को बनाया केंद्र ने मॉडल जिला
प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पहले चरण में पांच जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, गरियाबंद और नारायणपुर को जैविक खेती वाले जिले के रूप में घोषित किया है। दंतेवाड़ा जिले को केंद्र सरकार ने भी जैविक खेती के लिए मॉडल माना है। इसके अलावा प्रदेश के सभी 22 जिलों के चयनित विकासखंडों में जैविक खेती के लिए तैयार किया जा रहा है।

 

 

खेती के लिए हर साल 20-25 करोड़ का बजट
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार हर साल लगभग 20-25 करोड़ रुपए का बजट है। इसमें जैविक बीज से लेकर जैविक खाद को तैयार करना है। अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार किसानों की जरूरत के अनुसार प्रदेश में न तो जैविक बीज न तो जैविक खाद तैयार हो पा रहा है। इसकी वजह से जिलों में जैविक खेती का विकास नहीं हो पा रहा है। 


जैविक फसल प्रदर्शन में हाईब्रिड पर है रोक 
जैविक प्रसल प्रदर्शन के तहत किसानों को बांटे जाने वाले बीज के लिए तय मानदंड के अनुसार जैविक पद्धति से उत्पादित बीज, प्रमाणित बीज/स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वयं का बीज का उपयोग कर सकते हैं। इसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड बीज का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है।


केमिकल खाद व हाईब्रिड बीज पर बैन जरूरी 
आरटीआई एक्टिविस्ट उचित शर्मा का कहना है कि शासन स्तर पर इस तरह की नीति बननी चाहिए, जिसमें जैविक जिले और ब्लॉक में रासायनिक खाद व हाईब्रिड बीज पर पूरी तरह से प्रतिबंध हो। शासन ही हाईब्रिड बीज बांटेंगे तो जैविक खेती को बढ़ावा कैसे मिलेगा।

 

 

पॉलिसी में कोई गाइडलाइन नहीं है
डीडीए गरियाबंद नरसिंह ध्रुव ने कहा कि पॉलिसी लेवल पर अभी हाईब्रिड बीज और रासायनिक खाद पर प्रतिबंध के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुआ है।
 

 

 

किसानों की मांग के आधार पर खरीदी
कृषि विभाग संचालक एमएस केरकेट्‌टा ने बताया कि जिलों को जैविक बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कुछ किसानों की मांग पर ही उन्हें हाईब्रिड बीज दे रहे हैं।
 

 

 

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