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डाउनलोड करेंइंदौर। आंबेडकर जयंती पर शनिवार को बाबा साहब की जन्मस्थली पर आदर्श विवाह देखने को मिला। यहां सुबह 8 बजे दो अधिकारी आंबेडकर प्रतिमा के सामने विवाह बंधन में बंधे। दूल्हा-दुल्हन शोभा यात्रा में शामिल होकर स्वर्ग मंदिर पहुंचे और बाबा साहब के सामने एक-दूसरे को माला पहनाकर एक-दूसरे का हर दम साथ देने की कसम खाई। दूल्हा-दुन्हन की ओर से यहां आए अनुयायियों को बाबा साहब की फोटो और संविधान की प्रतियां भी दी गईं।
बाबा साहब को साक्षी मान दो अधिकारी हुए एक दूजे के
- अादर्श विवाह करने वाला यह जोड़ा शाजापुर बिजली कंपनी के एई सूर्यदेव जयसिंह निवासी खेजरा खुर्द गांव अशोक नगर और इंदौर नगरीय प्रशासन विभाग में पदस्थ सब इंजीनियर रचना सुमन निवासी धार है। दूल्हा-दुन्हन सुबह शोभा यात्रा के साथ स्वर्ग मंदिर पहुंचे और एक दूसरे को माला पहनाई। माला पहनाने के बाद दोनों ने बाबा साहब को साक्षी मानकर मंदिर के फेरे लिए। फेरे लेने के बाद दोनों ने बाबा साहब की तस्वीरें और संविधान की प्रतियां यहां अाए अनुयायियों को दी। इसके बाद परिजनों के साथ दोनों मुख्य विवाह समारोह महू स्थित मोती महल रवाना हो गए।
शादी को नाम दिया आदर्श विवाह
- दूल्हे सूर्यदेव और दुल्हन रचना ने अपनी इस शादी को आदर्श विवाह नाम दिया है। इसके बारे में पूछने पर दूल्हे सूर्यदेव ने कहा कि मैंने 5 साल पहले ही सोच लिया था कि 14 अप्रैल काे बाबा साहब के सामने महू में ही शादी करूंगा। जब मेरी शारी रचना से जुड़ी तो मैंने अपने सामने के बारे में उसे बताया। यह सुन रचना और उसके परिजन खुशी-खुशी राजी हो गए।
- हम अपनी शादी कुछ इस तरीके से करना चाहते थे कि वह लोगों के लिए आदर्श बने। सूर्यदेव ने कहा कि वर्तमान में कुछ दहेज लोभी बहुओं को मार रहे हैं, जला रहे हैं। मैं दहेज के शख्त खिलाफ हूं। मैंने अपनी शादी में लड़की पक्ष से एक रुपए भी दहेज के रूप में नहीं लिया है। हमने तय किया है कि शादी में फिजूलखर्ची के बजाय हम दोनों परिवार ढाई-ढाई लाख रुपए मिलाकर अपने अपने गृह क्षेत्र अशोकनगर में एक स्कूल खोलेंगे और हां बच्चियों को अच्छी शिक्षा देंगे। इसके अलावा हम हर साल गरीब कन्याओं का विवाह करवाएंगे, जिसे हमने आदर्श विवाह नाम दिया है।
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