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70 हजार टीचर्स को हर माह 7-8 हजार रुपए कम मिल रहा वेतन

3 वर्ष पहले
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 जयपुर. शिक्षा विभाग में शिक्षकों के वेतन को लेकर गणना का काम भगवान भरोसे चलता है। हाल ही सामने आए एक मामले में तृतीय श्रेणी के करीब 70 हजार शिक्षकों और उनसे चार साल बाद नियुक्त हुए शिक्षकों के मूल वेतन में बड़ी विसंगति है। मूल वेतन में भी ऐसा अंतर है कि वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षकों को अभी ही हर माह सात से आठ हजार रुपए का सीधा नुकसान हो रहा है। अगर इसको अभी नहीं सुधारा गया तो रिटायरमेंट तक इन शिक्षकों को लाखों रुपए का नुकसान हो जाएगा।


मामले के अनुसार वर्ष 2008 से 2009 तक प्रबोधक और तृतीय श्रेणी के करीब 70 हजार शिक्षकों को पोस्टिंग मिली थी। इन शिक्षकों को पे बैंड प्रथम 5200-20200 और ग्रेड पे 2800 के अनुसार तय किया गया था। इसमें मूल वेतन 11,170 रुपए था। इसको बाद में भटनागर समिति ने संशोधित करते हुए पे बैंड द्वितीय 9300-34,800 और ग्रेड पे 3600 के अनुसार कर दिया। इस संशोधन के आधार पर 1 जुलाई, 2013 को मूल वेतन 12,900 रुपए करना था।

 

शिक्षकों का कहना है कि उस समय लेखा कर्मियों की भूल के कारण ग्रेड पे में तो बदलाव कर दिया गया, लेकिन पे बैंड में बदलाव नहीं किया गया। इससे इन शिक्षकों के मूल वेतन में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 11170 रुपए ही रह गया। इसके विपरीत करीब चार साल बाद वर्ष 2012 में नियुक्त हुए शिक्षकों को नए पे बैंड 9300-34,800 और ग्रेड पे 3600 मानते हुए मूल वेतन 12,900 रुपए के आधार पर लाभ दिया जा रहा है। इससे राज्य में समान काम होने के बाद भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के दो प्रकार के वेतनमान हो गए।

 

पुराने शिक्षक वेतन में नए शिक्षकों से पिछड़ गए

इस विसंगति के कारण 2008 के दौरान नियुक्त हुए शिक्षकों को वर्तमान में जो वेतन मिलना चाहिए था, उससे 7 से 8 हजार रुपए कम वेतन मिल रहा है। जबकि उनसे बाद में वर्ष 2012 में नियुक्त हुए शिक्षकों को पूरा वेतन मिल रहा है। सातवें वेतनमान में यह विसंगति काफी बढ़ गई है। अब शिक्षक इस खामी को सुधरवाने के लिए शिक्षा अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।

 

 

बीस साल पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के वेतन में भी थी 10 रुपए की खामी
वर्ष 1996 में नियुक्त हुए शिक्षकों के वेतन में भी 10 रुपए की ऐसी खामी छोड़ दी गई थी। जिसके कारण इन शिक्षकों को हर महीने 2 हजार रुपए का नुकसान हो रहा था। वर्ष 2013 में भटनागर समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन शिक्षकों की एसीपी में संशोधन किया गया था। तब लेखाकर्मियों ने यह खामी छोड़ दी थी। पिछले दिनों जब सातवें वेतनमान के विकल्प-पत्र भरवाए जा रहे थे तब यह खामी उजागर हुई। अधिकांश शिक्षकों ने तो समय रहते इस खामी को दूर करवा लिया। लेकिन अब भी कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने इस खामी को दूर कराए बिना ही सातवें वेतनमान का विकल्प-पत्र लॉक कर दिया था। ऐसे शिक्षक अब भी 10 रुपए की इस खामी को दूर कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।

 

इस विसंगति के कारण प्रत्येक शिक्षक को हर महीने आर्थिक नुकसान हो रहा है। सातवें वेतनमान में इस विसंगति के कारण वेतनमान में अधिक अंतर हो गया। परिवीक्षा काल से ही उनका मूल वेतन 12,900 के आधार पर संशोधित करते हुए सरकार को आगे के वेतन की गणना करनी चाहिए और उनको समस्त लाभ इसी आधार पर दिए जाने चाहिए। 

- श्रीकृष्ण मीना, संयोजक, राजस्थान वेतन विसंगति निराकरण संघर्ष समिति

 

शिक्षकों की वेतन विसंगति को लेकर समय समय पर शिकायतें और ज्ञापन मिलते रहते हैं। उनको अग्रिम कार्रवाई के लिए निदेशालय को भिजवा दिया जाता है। 
- अनिल कौशिक, डीईओ प्रारंभिक प्रथम

 

 

 

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