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डाउनलोड करेंयूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए बेलारूस की राजधानी मिंस्क में अगले बुधवार 11 फ़रवरी को बैठक होगी.
इसमें रूस, यूक्रेन, जर्मनी और फ़्रांस के शीर्ष नेता शिरकत करेंगे.
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में अलगाववादी विद्रोहियों और सेना के बीच पिछले साल अप्रैल से चल रही झड़पों में 5,300 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके है.
रविवार को चारो नेताओं के बीच टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में बैठक करने पर सहमति बन गई.
विद्रोहियों ने दोनेत्स्क और लुहांस्क पर कब्ज़ा कर इन इलाकों को अलग देश घोषित कर दिया है.
पश्चिमी देश रूस पर इन विद्रोहियों को मदद करने और हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाते आए हैं, जिससे मास्को लगातार इंकार करता आया है.
रूस: शांति वार्ता की शर्तें
जर्मन चांसलर एंगेला मर्कल और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से अलग अलग बात की है.
शांति वार्ता की पूरी रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है, पर समझा जाता है कि मौजूदा नियंत्रण रेखा से 70 किलोमीटर तक के इलाक़े से पूरी तरह सेना और उसके साजो सामान को हटाने पर मुख्य रूप से बात होगी.
पुतिन ने कहा है कि यह बातचीत तभी होगी जब उसके पहले कुछ मुद्दों पर सहमति बन जाए.
इस बैठक में यूरपीय सुरक्षा व सहयोग संगठन यानी ओएससीई के प्रतिधि भी भाग लेंगे.
सितंबर की शांति वार्ता नाकामपिछले सितंबर में भी यूक्रेन संकट पर एक शांति वार्ता मिंस्क में हुई थी, पर वहां लड़ाई थमी नहीं और इसलिए यह बात आगे नहीं बढ़ पाई.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि ज़ल्द व बग़ैर शर्त युद्धविराम हो जाएगा.
बीते दिनों अमरीका ने यूक्रेन को सैन्य साजो सामान देने की पेशकश की थी.
दूसरी ओर, अमरीका के विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि मारीयोपोल और डेबाल्टसेव इलाक़ों में चल रही झड़पों से उनका देश चिंतित है.
उन्होंने सभी पक्षों से कूटनीति के ज़रिए समस्या का समाधान खोजने की अपील की है.
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