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प्रेग्नेंट महिला को अल्ट्रासाउंड में बच्चे के मुंह से निकलते दिखे गुब्बारे, डॉक्टर ने अलर्ट करते हुए कहा- तुरंत अबॉर्शन करा लो

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 07:25 PM IST

महिला ने कर दिया इनकार और उसके फैसले से दुनिया को मिला ये तोहफा

Ultrasound Scan Of Baby Blowing Bubble Alert for Doctor
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मियामी. अमेरिका में एक प्रेग्नेंट महिला डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए गई। पर जब अल्ट्रासाउंड हुआ तो बच्चे के मुंह से गुब्बारे निकलते दिखाई दिए। डॉक्टर ने बुरी खबर सुनाई और कहा कि अबॉर्शन करना पड़ेगा, क्योंकि बच्चे के शरीर में ट्यूमर पल रहा है। पर महिला बच्चे को नहीं खोना चाहती थी। उसने सेकंड ओपिनियन लेने के बारे में सोचा। दूसरे डॉक्टर ने गर्भाशय (यूट्रस) में ही बच्चे की सर्जरी का ऑप्शन बताया। हालांकि, इस तरह की सर्जरी किसी पर नहीं की गई थी। पर महिला बच्चे को बचाने के लिए इस पर राजी हो गई। डॉक्टरों ने पहली बार इस तरह की सर्जरी की और सफल रहे। इसके जरिए, जहां महिला की जान बची, वहीं दुनिया को एक नायाब तोहफा मिला।

डॉक्टर ने सुनाई बुरी खबर
- मियामी की रहने वाली टैमी गोनालेज बेटी को जन्म देने की तैयारी कर रही थी, लेकिन तब उनकी खुशियां गम में बदल गई, जब वो रूटीन चेकअप के लिए गईं।
- डॉक्टर ने जब अस्ट्रासाउंड किया तो उसे बच्चे के मुंह से बबल यानी गुब्बारे निकलते दिखाई दिए। डॉक्टर ने बुरी खबर सुनाते हुए कहा कि ये टेराटोमा (ट्यूमर) की वजह से है और ये बहुत तेजी से बढ़ता है।
- डॉक्टर ने मिसकैरिज का खतरा बताते हुए अबॉर्शन की सलाह दी और कहा कि अगर बच्चा बच भी गया तो पैदा होने का बाद उसे ढेरों सर्जरी से गुजरना पड़ेगा।
- टैमी की प्रेग्नेंसी को 17 हफ्ते गुजर चुके थे और वो अपनी बेटी को खोना नहीं चाहती थी। ऐसे में उसने सेकंड ओपिनियन लेने का फैसला किया और डॉक्टर रुबेन क्विंटेरो के पास गई।
- डॉक्टर ने उसे दिलासा देने के लिए एक विकल्प सुझाया। उन्होंने बताया कि वो इंडोस्कोपी सर्जरी के जरिए लेजर तकनीक से इस ट्यूमर को निकाल सकते हैं और ये सब गर्भाशषय के अंदर ही होगा।
- हालांकि, अब तक इस प्रोसीजर का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पर टैमी इस प्रोसीजर के लिए भी राजी हो गई क्योंकि वो किसी भी हालत में अपनी बेटी को खोना नहीं चाहती थी।

महिला ने ली राहत की सांस
- मियामी के जैक्सन मेमोरियल हॉस्पिटल के फीटल थैरेपी सेंटर में डायरेक्टर रुबेन ने टैमी के यूट्रस में ही पहली बार इस इंडोस्कोपी सर्जरी को अंजाम दिया।
- डॉक्टर ने सर्जिकल टूल्स से लेकर छोटे कैमरे तक सबकुछ एक इंच से भी छोटे रास्ते के जरिए टैमी के यूट्रस में डाला और ट्यूमर को काटने का काम शुरू किया।
- डॉक्टर्स को अल्ट्रासाउंड के जरिए गाइड किया जा रहा था। वहीं, टैमी को लोकल एनस्थीसिया पर रखा गया था। डॉक्टर ने क्लोजर लुक मिलने के बाद ट्यूमर को काटकर अलग किया।
- टैमी खुद भी इस प्रोसीजर को देख रही थी। उसने बेटी के चेहरे से ट्यूमर काटे जाने के बाद इसे पेट में तैरते देखा और राहत की सांस ली। उसने बताया कि ऐसा लगा जैसे उसके ऊपर से कितना बड़ा बोझ हट गया।

दुनिया को मिला नायाब तोहफा
- इस प्रोसीजर के चार महीने बाद टैमी ने बेटी को जन्म दिया। वो पूरी तरह से स्वस्थ और बाकी बच्चों की तरह सामान्य थी। बस सर्जरी के चलते उसके मुंह पर एक छोटा सा निशान था।
- इस प्रोसीजर के जरिए जहां टैमी को उसकी मिरैकल बेटी मिली। वहीं, दुनिया में पहली बार इंडोस्कोपी सर्जरी के जरिए फीटल ओरल टेराटोमा को हटाया गया।
- इस केस के बारे में अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनकोलॉजी से लेकर दुनियाभर के मीडिया हाउसेज में रिपोर्ट पब्लिश की गई थी। हालांकि, डॉ. रुबेन को करीब दो साल बाद अपने इस काम के बदले पहचान मिली।

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