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डाउनलोड करेंभारतीय जनता पार्टी की उपाध्यक्ष उमा भारती ने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र का खुल कर समर्थन करने से गुरेज बरता है.
बीबीसी हिंदी के साथ लाइव चैट में पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए उमा भारती ने कहा कि वो इस बारे में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को ही कोई जवाब देंगी.
पढ़िएः बीबीसी हिंदी के साथ बीबीसी हिंदी की लाइव चैट
उन्होंने मोदी के बारे में टिप्पणी करने वाले अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के सिलसिले में कहा कि ऐसे लोगों को अगर राजनीति करनी है तो उन्हें पार्टी की सदस्यता लेनी चाहिए.
अमर्त्य सेन ने कहा था कि वो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के योग्य नहीं समझते हैं.
क्रोधी नहीं, तेजस्विनीलाइव चैट के दौरान जब उमा भारती से पूछा गया कि क्या वो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लायक मानती हैं तो उमा भारती ने कहा, “ये ऐसा विषय है जिस पर मैं राजनाथ जी को ही जबाव दूंगी, क्योंकि इस बारे में घोषणा करना और सार्वजनिक रूप से अपनी राय देने का अधिकार सिर्फ राजनाथ सिंह जी को है. मुझे नहीं. संसदीय बोर्ड को है.”
पिछले दिनों मोदी को लेकर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की टिप्पणी से हुए विवाद पर उमा भारती ने कहा, “वैज्ञानिक, कलाकार, अभिनेता और साहित्यकार, ये सब किसको वोट देते हैं और किसको नहीं, ये बात वो अपने तक ही सीमित रखें, क्योंकि इनके प्रशंसक सभी जगह होते हैं. इसलिए वो किसी को भी ठेस न लगाएं. अगर उन्हें राजनीति करनी है तो फिर वो घोषणा करके किसी पार्टी की सदस्यता लें.”
भाजपा से निकाले जाने के मुद्दे पर बीजेपी की तेज़ तर्रार नेता रहीं उमा भारती ने कहा, “जो लोग ऐसे फैसले कर लेते हैं, वो चतुराई के आभाव में ऐसा कर लेते हैं.”
बीबीसी हिंदी के पाठक अखिल रजावट ने सवाल किया कि उमा भारती को इतना गुस्सा क्यों आता है और क्या एक जनप्रतिनिधि को इतना गुस्सा शोभा देता है.
इस पर उमा भारती का जवाब था, “मुझे ग़ुस्सा बिल्कुल नहीं आता है. मुझे टीवी और मीडिया के सामने खुद को अच्छी तरह पेश करना नहीं आता है.”
उन्होंने कहा, “ये समाज ऐसा है जहां तेस्विनी महिलाओं को क्रोधी बता दिया जाता है. मैं तेजस्वी महिला हूं, क्रोधी नहीं हूं.”
आज तक नहीं अफसोसराम मंदिर आंदोलन में उमा भारती ने अहम भूमिका निभाई थी
उमा भारती का कहना है कि उन्हें भाजपा से निकाले जाने और अपनी पार्टी बनाने का कोई पछतावा नहीं है.
उन्होंने कहा, “मुझे अपनी पार्टी बनाने का कोई अफसोस नहीं हुआ, आज तक नहीं. मैंने बहुत अच्छी पार्टी बनाई और उसने अच्छा काम किया. जनसमर्थन की कमी नहीं थी. हमारे पास धन और कैडर नहीं थे.”
जब उमा भारती से पूछा गया कि क्या वो बहुत भावुक हैं, इस पर उन्होंने कहा, “भावुक होना बहुत अच्छी चीज है, उसने मेरे मानवीय पहलू को बहुत मजबूत रखा है. और मैं आगे भी इस मामले में ऐसी ही रहूंगी.”
पार्टी में अपनी मौजूदा और भावी भूमिका पर पूछे गए सवाल पर उमा भारती ने कहा, “ये सब मैंने राजनाथ जी पर छोड़ दिया है. मैं साढ़े पांच साल भारतीय जनता पार्टी से बाहर रही हूं. इसलिए अगर मैंने अपने लिए कोई फैसला लिया, अपने लिए जगह बनाने की कोशिश की तो परेशानियां खडी़ हो जाएंगी. इसलिए ये फैसला अध्यक्ष करेंगे. गंगा अभियान में मैंने पूरी आजादी ली हुई है, क्योंकि इसमें मैं पहले से जुड़ी हुई हूं.”
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