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उमंग बेदी का कॉलम: अब भारत में मोबाइल विज्ञापन का युग

संदर्भ: सस्ते हैंडसेट, डेटा की गिरती दरें और इंटरनेट के विस्तार से बढ़ते मोबाइल यूज़र का परिणाम

Dainik Bhaskar

May 25, 2018, 11:39 PM IST
उमंग बेदी प्रेसीडेंट, डेली हंट उमंग बेदी प्रेसीडेंट, डेली हंट

आज डिजिटल विज्ञापन मार्केटिंग की किसी भी रणनीति का अभिन्न अंग है। दिसंबर 2017 में प्रकाशित एक ग्रुप एम टीवाईएनवाई वर्ल्डवाइड की रिपोर्ट के अनुसार भारत में डिजिटल विज्ञापन का 9,490 करोड़ रुपए का बाजार है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिशन ऑफ इंडिया और कंटार आईएमआरबी की रिपोर्ट कहती है कि डिजिटल विज्ञापन पर खर्च 30 फीसदी की कम्पाउंड एन्यूअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से बढ़ने की अपेक्षा है और 2018 के अंत तक यह 12,046 करोड़ रुपए होगा।


सस्ते हैंडसेट, डेटा की गिरती दरें और मोबाइल इंटरनेट की बढ़ती पैठ के कारण मोबाइल फोन के यूज़र बढ़ रहे हैं। 2017 में मोबाइल से 59.9 फीसदी इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता था, जिसके और बढ़ने की अपेक्षा है। स्टेटिस्टा के अनुसार 2022 में डिजिटल विज्ञापन की कुल आमदनी का 55 फीसदी मोबाइल से पैदा होगा। यह वृद्धि संकेत देती है कि मार्केटीयर युवाओं की नई पीढ़ी और डिजिटल सेवी उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए यह माध्यम अधिक अपनाएंगे। आज एडवर्टाइजिंग अधिक डेटा पॉइंट दे रही है, जिससे उपभोक्ता को लक्ष्य बनाना ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।


अभी का ट्रेंड, बदलती कथ्यशैली : आज के बाजार में ग्राहकों पर फोकस है। यदि एडवर्टाइजर को अपने मार्केट में पहुंच बनानी है और यह पक्का करना है कि ग्राहक उसकी ओर आए तो उन्हें इनोवेशन करना होगा। अब सूचनाओं का सरल-सा बैनर वाला विज्ञापन पर्याप्त नहीं रहा। एडवर्टाइजर परफॉर्मेंस और प्रमोशन पर ही अपने निवेश को फोकस नहीं कर सकते। एक अच्छी तरह बुनी हुई कहानी एडवर्टाइजर को अपने लक्षित वर्ग से बेहतर ढंग से जोड़ सकती है। अपने ग्राहक वर्ग की आवश्यकताओं को समझकर एडवर्टाइजर संदेश को अंकों और आंकड़ों से आगे ले जाकर उसमें मानवीय पहलू जोड़कर एक कहानी कह सकते हैं। कहानियां ही तो लोगों का ध्यान खींचती हैं। स्टैनफोर्ड के एक अध्ययन ने पाया कि 63 फीसदी श्रोता-दर्शकों को कहानियां याद थीं, जबकि सिर्फ 5 फीसदी ही कोई आंकड़ा याद रख पाए। कहानी कहने की यही नवीनता एडवर्टाइजर्स को ग्राहक से बेहतर संवाद व संबंध निर्मित करने और बेहतर अवसर पैदा करने में मदद करेगी।


देशज विज्ञापनों की बढ़ती लोकप्रियता : जब एडवर्टाइजर मोबाइल बाजार में संभावित वृद्धि को भुनाने के लिए उस ओर जा रहे हैं तो उन्हें विज्ञापनों के ऐसे फॉर्मेट विकसित करने होंगे, जो इस माध्यम के लिए अधिक उपयुक्त हों। और यहीं पर देशज या स्थानीय शैली के मोबाइल फोन वाले विज्ञापन आगे आ रहे है। बिज़नेस इन्साइडर के अनुसार 2021 तक कुल विज्ञापन आमदनी का 74 फीसदी नैटिव यानी देशी थीम पर आधारित एडवर्टाइजिंग से आने का अनुमान है। परम्परागत डिस्प्ले विज्ञापनों की तुलना में नैटिव एड भरोसा निर्मित करने और ग्राहकों से जोड़ने में बेहतर हैं। नैटिव एंड कॉमस्कोरफोर ने पाया कि नैटिव एड ने परचेस फनल (खरीदी के पहले के चरण जैसे जागरूकता, राय निर्माण होना, प्राथमिकता आदि) के सभी चरणों में महत्वपूर्ण प्रभाव दिखाया। इससे ब्रैंड के प्रति ऊंची जागरूकता और प्रोडक्ट को फिर याद करने की ऊंची दर निर्मित हुई, जो क्रमश: 11 फीसदी और 18 फीसदी रही। जहां टैक्स्ट आधारित नेटिव एड अब भी लोकप्रिय हैं वहीं, वीडियो फॉर्मेट की लोकप्रियता भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।

अधिकाधिक वीडियो आधारित संचार माध्यम नैटिव एड्स को अपने बिज़नेस मॉडल में अपनाएंगे। एडवर्टाइजर को एक और निर्णायक तत्व की ओर ध्यान देना होगा और वह है प्रत्येक प्लेटफॉर्म के लिए प्रचार सामग्री को ग्राहक के अनकूल बनाना। मसलन, अध्ययनों में पता चला है कि 85 फीसदी लोग बिना आवाज के वीडियो देखते हैं। एडवर्टाइजर अपने वीडियो में सब-टाइटल डाल सकते हैं ताकि वे अपने श्रोता-दर्शक वर्ग से बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।


मोबाइल पर वीडियो का बढ़ता बाजार : हम देख रहे हैं कि मोबाइल पर विज्ञापनों के वीडियों की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। मोबाइल फोन पर वीडियो के जरिये कंटेट ग्रहण करने वाले लोगों के बढ़ने और हर साल वीडियो देखने में बिताया जा रहा समय बढ़ने से यह बढ़ोतरी हो रही है। सिस्को के विज़ुअल नेटवर्किंग इंडेक्स 2016-2021 का पूर्वानुमान है कि 2019 तक सारे इंटरनेट ट्रैफिक का 80 फीसदी वीडियो से संचालित होगा। यूके में इंटरनेट एडवर्टाइजिंग ब्यूरो और पीडब्ल्यूसी3 ने पाया कि वीडियो सबसे तेजी से बढ़ने वाला एड फॉर्मेट है, जहां इंडस्ट्री अपने कुल डिजिटल वीडियो एड स्पेंड का 35 फीसदी खर्च करती है।


2018 में हमें उम्मीद है कि इंडस्ट्री वर्टिकल वीडियो, आउट स्ट्रीम वीडियो, 360 वीडियो और इंटरेक्टिव वीडियो एड जैसे विभिन्न वीडियो आउटलेट के आसपास विस्तार के साथ इनोवेट करेगी। एडवर्टाइजर्स को यह भी अहसास हुआ है कि फेसबुक व इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर छोटे मोबाइल वीडियो चलाना अधिक उपयोगी है। यह यूज़र का ध्यान ज्यादा खींचता है, रचनात्मकता को अधिक फोकस्ड रखता है। यह उन एड नेटवर्क पर भी असरदार सिद्ध होगा, जहां पांच सेकंड के बाद विज्ञापन से बाहर जाने का विकल्प होता है।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सुधार का परिणाम यूज़र टार्गेटिंग में होगा, जिससे अधिक व्यक्ति केंद्रित सामग्री आएगी और गुणवत्ता से समझौता किए बिना अधिक मात्रा की गुंजाइश रहेगी। विभिन्न दर्शकों के लिए उनके हिसाब से कस्टमाइज किए वीडियो एड देना व्यवहार्य हो जाएगा। इस तरह विज्ञापनों को व्यक्ति केंद्रित बनाने से क्लिक-थ्रो रेट (सीटीआर) और कनवर्ज़न रेट (सीवीआर) दोनों बढ़ेंगे। यूज़र जनरेटेड कंटेन्ट (यूजीसी) का उपयोग विश्वसनीयता बढ़ाने में हो सकता है। इसमें ऐसे विज्ञापन होंगे, जो विज्ञापन नहीं लगेंगे बल्कि दर्शक के साथ तालमेल बिठा लेंगे।


वीडियो : मोबाइल एडवर्टाइजिंग के ट्रेंड में अगला चरण : भारत में मोबाइल एडवर्टाइजिंग मार्केट का भविष्य वीडियो में है। इन्फ्लूएंसर कैम्पेन और वर्चुअल रियलिटी अन्य ट्रेंड्स के साथ बढ़ने लगे हैं। इससे विज्ञापन को लंबे समय तक याद रखने और एंगेजमेंट लेवल बढ़ने की उम्मीद है। उम्मीद है कि मोबाइल फोन की लोकप्रियता और वीडियो आधारित विज्ञापन माध्यम दोनों के योग वाली मोबाइल एडवर्टाइजिंग ही भारत में डिजिटल एडवर्टाइजिंग को आगे बढ़ाएगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

उमंग बेदी
प्रेसीडेंट, डेली हंट, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर, फेसबुक इंडिया
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