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अंडर 30Y कॉलम: क्या रुपए में 12 फीसदी गिरावट भी चिंता का विषय नहीं?

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Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 12:11 AM IST
अनुराग तिवारी अनुराग तिवारी

रुपया वैसे तो हमेशा ही लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन हाल के दिनों में रुपया राजनीतिक गलियारों से लेकर आर्थिक मंचों तक पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह यह है कि इसी साल रुपया डॉलर के मुकाबले 12 फीसदी तक टूट चुका है और एक डॉलर की कीमत 72 रुपए को पार कर चुका है।
रुपए का लगातार गिरना बेशक चिंता का विषय है, हालांकि इसको किसी एक कदम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। जानकार मानते हैं कि रुपए में गिरावट के मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय हैं। चीन और तुर्की के साथ अमेरिकी ट्रेड वॉर से आयात शुल्क में बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर भारतीय रुपए के साथ अन्य देशों की मुद्राओं पर भी देखा जा रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल के भाव लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे भारत को डॉलर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले छह महीनों में विदेशी निवेशकों ने अपने 48,000 करोड़ रुपए भारतीय बाजारों से डॉलर के रूप में निकाले हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है। भारत अभी भी निर्यात के मुकाबले आयात ज्यादा करता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है और रुपया कमजोर होता जा रहा है । रुपए के कमजोर होने का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं के भाव भी बढ़ रहे है, जिसका असर आम-जन पर होना तय है। साथ ही विदेश में पढ़ना भी महंगा हो गया है ।
वित्त मंत्री अरुण जेटली रुपए की गिरावट को चिंता का विषय नहीं मानते लेकिन, जब गिरावट साल में 12 फीसदी हो जाए तो इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। मालूम हो कि भारत अपनी मांग का सिर्फ 20 फीसद कच्चा तेल का उत्पादन कर पाता है, ऐसे में इसकी उत्पादकता बढ़ाने के साथ वैकल्पिक स्रोतों पर भी जोर देने की जरूरत है। जानकार मानते है कि रुपए में गिरावट का दौर आगे भी जारी रहेगा, इसलिए रिज़र्व बैंक और सरकार को रुपए की चाल पर कड़ी नजर रखने के साथ तमाम उपायों को लागू करने की आवश्यकता है।

- अनुराग तिवारी, 22

सह-संस्थापक, लेक्चर देखो डॉट कॉम

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