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​​भास्कर अंडर-30Y कॉलम: आर्थिक की बजाय अब ‘पर्यावरण जीडीपी’ की बात हो

जिस तरह से ‘ग्लोबल वार्मिंग’ का असर दिख रहा है, उन हालातों में ‘आपदा प्रबंधन’ महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा है।

Danik Bhaskar | Sep 04, 2018, 12:13 AM IST

जिस तरह से ‘ग्लोबल वार्मिंग’ का असर दिख रहा है, उन हालातों में ‘आपदा प्रबंधन’ महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा है। हाल के दिनों में केरल में आई बाढ़ ने कहीं न कहीं इकोलॉजी में आए असंतुलन की तरफ संकेत किया है। अब यह आवश्यकता है कि देश में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में विस्तार और विकास की पहल की जाए। अगर इसे केवल मौसम आधारित मानकर औपचारिक रूप में मान लेना ठीक नहीं है। अब प्राकृतिक आपदाएं मौसम आधारित न होकर वर्षभर कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में घटित हो रही हैं। अतः सरकार को नए सिरे से ‘आपदा-प्रबंधन’ को शैक्षिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर इसके बारे में प्रचार प्रसार करना चाहिए।


बचाव, सुरक्षा और प्रबंधन की जानकारी होना अब जरूरी हो गया है। कभी पूर्वोत्तर में तो कभी उत्तर भारत में भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने, जंगलों में आग लगने, सूखा पड़ने जैसी घटनाएं होती हैं। उनके लिए राहत अभियान भी चलते रहते हैं। ऐसी स्थिति में हर नागरिक को इस विषय के बारे में सटीक और संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। जहां तक सवाल है हमारी आपदा प्रबंधन फोर्स का, तो वह बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसका उदाहरण केरल में देखने को मिल रहा है। वहां सेना के जवानों के साथ एनजीओ भी हाथ से हाथ मिलाकर चल रहे हैं।
विभिन्न राज्यों से केरल में राहत सामग्री और आर्थिक मदद मुहैया कराना मानवता का अद्वितीय उदाहरण हमारे देश की पहचान बना है। जिस तरह हम तकनीकी एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में अन्य देशों से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, वैसे ही हमारी आपदा प्रबंधन फोर्स के लिए कुशल तकनीकी उपकरणों एवं रणनीति हेतु तकनीकी विशेषज्ञों से मदद लेनी चाहिए। अब संपूर्ण विश्व पर्यावरणीय समस्याओं से प्रभावित है। ऐसे में आवश्यकता है कि ‘आर्थिक जीडीपी’ के स्थान पर अब ‘पर्यावरण जीडीपी’ की बात की जाए। साथ ही पर्यावरण के साथ-साथ जीवन भी सुरक्षित किया जाए। तेजी से बढ़ते इकोलॉजी असंतुलन को देखते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आपदा प्रबंधन के प्रति हमें गंभीर होने की आवश्यकता है।