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अनिवार्य शिक्षा रोजगार दिलाने में सक्षम हो तो बात बने: करंट अफेयर्स पर अंडर 30 युवाओं की सोच

क्या यह संभव है कि मात्र प्राथमिक शिक्षा ही रोजगार दिलाने में सक्षम हो?

Danik Bhaskar | May 31, 2018, 12:43 AM IST
18 वर्षीय शिवेन्द्र तिवारी, दिल 18 वर्षीय शिवेन्द्र तिवारी, दिल

देशभर में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आ रहे हैं। सीबीएसई के भी आए हैं। क्या 12वीं पास करने वाले सभी विद्यार्थी उच्च शिक्षा में प्रवेश लेंगे? नहीं, क्योंकि देश में लगभग 20 फीसदी विद्यार्थी ही उच्च शिक्षा ले पाते हैं और शेष यहीं से पढ़ाई को अलविदा कह देते हैं। हमारे संविधान के मूल अधिकार के अनुच्छेद 21 (क) में शिक्षा के अधिकार को परिभाषित किया गया है कि 6 से 14 वर्ष की उम्र तक नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा दी जाएगी।


आज हम इन्फॉर्मनेशन टेक्नोलॉजी के युग में हैं, जिसमें शिक्षा कि परिभाषा समयानुसार बदल चुकी है अर्थात अब शिक्षा का सही मतलब तभी माना जाएगा जब वह रोजगार दिला सके। क्या यह संभव है कि मात्र प्राथमिक शिक्षा ही रोजगार दिलाने में सक्षम हो? इसके लिए हमें देश में उच्च शिक्षा के लिए शुल्क रूपी बोझ को भी विद्यार्थियों के सिर पर से हल्का करना होगा तभी ‘सब पढ़ें सब बढ़े’ का सपना साकार हो पाएगा और समानता का अधिकार भी उचित रूप से परिभाषित किया जा सकेगा।

दुनिया में ब्राजील, जर्मनी, अर्जेंटीना, स्वीडन, नार्वे, फिनलैंड जैसे देशों में लगभग हर स्तर पर मुफ्त शिक्षा दी जाती है और इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनकी साक्षरता दर भी 90 से 100 फीसदी के आसपास है। इसका सीधा प्रभाव हम अपनी शिक्षा व्यवस्था पर ऐसे देख सकते हैं।

वर्तमान में विश्व के सर्वश्रेष्ठ 200 शिक्षण संस्थाओं में हमारे बमुश्किल गिने-चुने संस्थान ही हैं। परंतु एक तरफ हम विकसित राष्ट्र की संकल्पना संजोए बैठे हैं जो हमारे महान शिक्षाविद व भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का सपना भी था कि 2020 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बने। हालांकि, सरकारें इस दिशा में बेहतर कार्य कर सकती हैं यदि नीतियों व योजनाओं को समुचित तरीके से ढाला जाए खासकर शिक्षा बजट में और इजाफा करने की जरूरत है। इस प्रकार हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। नेल्सन मंडेला ने भी कहा था, " शिक्षा वो हथियार है जिससे आप पूरी दुनिया बदल सकते हैं।"