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देश में सुस्त पड़ती जा रही डिजिटल क्रांति की रफ्तार- करंट अफेयर्स पर अंडर 30 के युवाओं की सोच

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सेलफोन बाजार भारत ही है, उसके बावजूद हम देश में डिजिटल क्रांति नहीं ला पा रहे हैं।

Danik Bhaskar | Jun 30, 2018, 01:13 AM IST
29 वर्षीय अमित पांडेय, गुरु घासी 29 वर्षीय अमित पांडेय, गुरु घासी

देश में दिन-प्रतिदिन मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी वजह से स्मार्टफोन के दामों में भी गिरावट आ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर तीन साल में इंटरनेट उपभोक्ता दोगुने हो जाते हैं, जो 5 वर्षों में 70 करोड़ होने के आसार हैं। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सेलफोन बाजार भारत ही है, जो दो साल में 14 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। उसके बावजूद हम देश में डिजिटल क्रांति नहीं ला पा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने शुरुवात की थी लेकिन, जनता और व्यापारियों ने पूर्ण समर्थन नहीं दिया। व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में स्वाइप मशीन इसलिए नहीं रखना चाहते, क्योंकि उन्हें ग्राहकों से मिलने वाली राशि पर शुल्क देना पड़ेगा। वे जनता से नकद की मांग कर रहे हैं।


शुरुआत में कई राज्यों के विद्यालयों, महाविद्यालयों, शासकीय महकमों को पूर्ण रूप से डिजिटल बनाने का कार्य किया गया परंतु इस दिशा में अभी भी बहुत कुछ किया जाना है। जरूरत कागजी कार्यवाही को खत्म करने की है। कागज बनाने के लिए पेड़ों की कुर्बानी दी जाती है, जबकि भारत अभी भी राष्ट्रीय वन नीति के तहत 33 फीसदी वनक्षेत्र हासिल नहीं कर पाया है। हमारे यहां केवल 24 फीसदी वन ही है। इसी तरह बैंकिंग क्षेत्र में बदलाव की जरूरत है। एटीएम से पैसा निकालने के बाद ग्राहकों को बची राशि की जानकारी देने के लिए पर्ची दी जाती है, जिसे ग्राहक पढ़कर वही फेंक देते हैं। प्रतिदिन ऐसे कागजों से बैंक के कूड़ेदान में ढेर लग जाता है। इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने से लोगों में खरीददारी की आदत बढ़ी है साथ ही प्रतिदिन तीस ऑनलाइन बैंकिंग उपभोक्ता भी बढ़े हैं।


ग्राहक ट्रेन टिकट, सिनेमा टिकट, मोबाइल रिचार्ज, कपड़े खरीददारी आदि सभी कार्य ऑनलाइन कर रहा है। प्रतिदिन के ट्रांजेक्शन से ग्राहकों की पासबुक एक माह में ही भर जाती है। जरूरत है कि यह सभी जानकारियां ग्राहकों को उनके मोबाइल या ईमेल आईडी पर दी जाएं ताकि अपनी जरूरत के अनुसार वे उसका प्रिंट निकलवा लें। इससे न सिर्फ कागज की बर्बादी रुकेगी बल्कि बैंकों में ग्राहकों और कर्मचारियों के समय की बचत भी होगी। पेड़ों की कटाई रुकने से पर्यावरण समृद्ध होगा वह अलग।