--Advertisement--

पेट्रोल-डीजल पर शुल्क में राहत और अक्षय ऊर्जा पर जोर दें- करंट अफेयर्स पर अंडर 30 की सोच

भारत अपनी जरूरत का 70 फीसदी तेल आयात करता है यानी हम ऊर्जा के मामले में ज्यादातर दूसरों पर निर्भर हैं।

Danik Bhaskar | May 24, 2018, 12:59 AM IST
22 वर्षीय महेश कुमार सिद्धमुख,  22 वर्षीय महेश कुमार सिद्धमुख,
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से दाम रिकॉर्ड स्तर छू रहे हैं लेकिन, सरकार इसका हल नहीं ढूंढ़ पाई है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते थे तो एनडीए के सभी दल सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते थे लेकिन, आज कीमतें 4 साल के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच चुकी हैं। सरकार के मंत्री उपाय खोजने अथवा राहत देने की बजाय तर्क दे रहे हैं। बढ़ती तेल की कीमतें कृषि, व्यापार से लेकर आम जनता की जरूरतों पर असर डाल रही हैं।
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी से मालभाड़े में काफी वृद्धि होगी, जिससे अनाज, सब्जी जैसी दैनिक जरूरत की चीजेेंं महंगी होंगी यानी थोक महंगाई दर पर असर देखने को मिलेगा। बढ़ती महंगाई के रूप में हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना निश्चित है। भारत अपनी जरूरत का 70 फीसदी तेल आयात करता है यानी हम ऊर्जा के मामले में ज्यादातर दूसरों पर निर्भर हैं। तेल की बढ़ती लागत के कारण व्यापार घाटा और चालू खाते पर घाटा बढ़ेगा।
अमेरिका-ईरान की परमाणु डील विफल होने के कारण भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में लंबे समय तक राहत की उम्मीद नहीं है। सरकार को उत्पादन शुल्क में कमी करने की आवश्यकता है, क्योंकि तेल की कीमतें कम होने पर सरकार ने शुल्क बढ़ाकर फायदा उठाया है। साल 2014 से 2016 के बीच करीब नौ बार उत्पादन शुल्क बढ़ाया, जिससे लगातार दामों में बढ़ोतरी होती रही है। पेट्रोल-डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 23 फीसदी और राज्यों में वैट 34 फीसदी है। इस प्रकार कुल 57 फीसदी होता है, जबकि जीएसटी की दर केवल 28 फीसदी रखी गई है। भारत में पेट्रोल की कीमतें विश्व के 98 देशों से ज्यादा है। दुनिया के निर्धन देश जैसे अफगानिस्तान में 43.86 रुपए, नाईजीरिया में 30.50 रुपए प्रति लीटर है। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों को नियंत्रण करने के लिए नवीकरण ऊर्जा, सीएनजी, इलेक्ट्रॉनिक वाहन, बैटरी चलित वाहनों पर जोर देने की आवश्यकता है लेकिन, इसके परिणाम लंबी अवधि में मिलेंगे।