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बारात लेकर दुल्हन पहुंची दुल्हे के घर, न मंत्र-न दहेज, सिर्फ वरमाला डाल एक-दूजे के हुए

3 वर्ष पहले
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इमामगंज (गया) बिहार के भगहर गांव में अनुराग कुमार और विभा कुमारी की गुरुवार को हुई अनाेखी शादी की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। इसमें तीन नई बातें हुई। खरमास में मांगलिक कार्यों न करने की प्रथा तोड़ी। दुल्हन बारात लेकर दुल्हे के घर पहुंची। और न मंत्र पढ़े गए, न तामझाम और न ही दहेज लिया गया। बस दुल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और विवाह संपन्न। मंडप के बदले स्टेज था। शादी के आमंत्रण कार्ड में भी लिखा कुछ हटके...

 

- मेहमानों के लिए शामियाना के नीचे कुर्सी और दरी बिछाई गई थी। खास बात यह रही कि द्वार पर ही दुल्हा-दुल्हन और उनके माता-पिता की ओर से लिखा गया था कि सड़े-गले रीति-रिवाजों और गलत परंपराओं को तोड़ते हुए यह विवाह हो रहा है।

- करीब 200 बाराती इसमें शामिल हुए थे। गांवभर के लोग भी ये विवाह देखने पहुंचे थे। विभा एमएससी कर रही हैं और अनुराग रेलवे में लोकाे पायलट हैं।

- दाेनों ने एक-दूसरे को पंसद किया और पारिवारिक सहमति से ये अनोखा विवाह रचाया। 

 



क्रांतिकारी गीत भी गाए गए

 गीत के बोल थे...यह जो छाप तिलक लगाए जनेउधारी हैं, यह जो जात-पात पूजक हैं, यह जो भ्रष्टाचारी हैं, उसे मिटाने की तैयारी है। 

- वर-वधु ने कहा-शादी से वे काफी खुश हैं, क्योंकि सामाजिक कुरीतियों और पाखंड के खिलाफ बगैर दहेज के खरमास में शादी की।

- उम्मीद है समाज हमारे इस फैसले से सहमत होगा। 


आमंत्रण कार्ड में भी कर्मकांड पर प्रहार 
- दोनों ने शादी के लिए जो कार्ड छपवाया था, उसमें भी ऊंच-नीच जैसी कुरीतियों का जमकर विरोध किया है।

- विवाह में क्रांतिकारी गीत भी गाए गए, जिसके बोल थे...यह जो छाप तिलक लगाए जनेउधारी हैं, यह जो जात-पात पूजक हैं, यह जो भ्रष्टाचारी हैं, उसे मिटाने और बदलने की तैयारी है।

- अनुराग के पिता रामविलास प्रसाद और विभा के पिता सत्येंद्र प्रसाद ने कहा कि इस विवाह से समाज में नया संदेश जाएगा।

- बेटियां किसी को बोझ नहीं लगेंगी। जब तक कुरीतियां समाप्त नहीं होगी, तब तक लोगों का विकास संभव नहीं है। 

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