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DB Special: उन्नाव रेप केस में 4 वजह से पुलिस-सरकार में था विधायक का खौफ, कठुआ मामले में 4 महीने बाद चार्जशीट दाखिल की गई

3 वर्ष पहले
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लखनऊ/नई दिल्ली.  उन्नाव रेप मामले के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, लेकिन तब जब कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए। ये गिरफ्तारी भी घटना के 313 दिनों बाद हुई। विधायक पर रेप का केस भी इसके महज 24 घंटे पहले ही दर्ज हो सका। इसलिए कि पुलिस ही नहीं, उत्तरप्रदेश सरकार तक सेंगर की गिरफ्तारी से खौफ खा रही थी।  खौफ की 4 वजह रहींं...

 

 


1. जातिगत समीकरण: कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव जिले के सवर्ण व मुस्लिम वोटों पर पकड़ रखता है। इस वजह से वह 3 अलग-अलग विधानसभाओं से चौथी बार विधायक बना है। उसने 1997 में कांग्रेस से राजनीतिक करिअर की शुरुआत की थी। वह माखी गांव का प्रधान बना। 2002 में बसपा से उन्नाव सदर सीट का विधायक बना। पांच साल बाद उसने सपा के टिकट पर बांगरमऊ सीट जीती। 2012 में पार्टी ने उसे भगवंत नगर सीट से लड़ाया सेंगर जीत गया। 2017 में भाजपा से जुड़ा। अब बांगरमऊ विधानसभा से विधायक है।
2. विधान परिषद् के चुनाव:  उत्तरप्रदेश के कुछ भाजपा नेता नहीं चाहते थे कि सेंगर पर 23 अप्रैल तक कोई कार्रवाई हो। तब यहां 13 विधान परिषद् के लिए चुनाव होने हैं। कार्रवाई से ठाकुर विधायकों की नाराजगी का डर था।   
3. प्रभावी नेताओं से करीबी:  2017 में सेंगर भाजपा से जुड़ा तो भगवंत नगर की सीट हृदय नारायण दीक्षित के लिए छोड़ी और बांगरमऊ से चुनाव लड़ा। दीक्षित को चुनाव भी जिताया। अब दीक्षित यूपी विधानसभा अध्यक्ष हैं और सेंगर को अहमियत देते हैं। सेंगर बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) का भी करीबी है।
4. बाहुबल: सेंगर के तीनों भाई अतुल, मनोज व अनिल पर आपराधिक प्रकरण हैं। पीड़िता के पिता से मारपीट के आरोप में गिरफ्तार अतुल पर तो 5 केस दर्ज हैं। 2004 में तो उसने जिले के एएसपी रामलाल वर्मा पर गोली चला दी थी। राजनीतिक दबाव में घटना के 5 दिन के भीतर ही वर्मा को समझौता करना पड़ा। 

 

इस मुद्दे पर वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं...

पीड़िता: 312 दिन बाद दर्ज हो सकी रेप की एफआईआर

- उन्नाव जिले के माखी गांव की रहने वाली एक 17 साल की लड़की ने सेंगर पर रेप का आरोप लगाया है। लड़की के मुताबिक विधायक, उसके भाई व अन्य लोगों ने 4 जून 2017 को माखी स्थित अपने घर में उससे रेप किया था। - कुछ दिनों बाद वह चाचा के पास दिल्ली चली गई, परिवार ने भी गांव छोड़ दिया। वहां से लड़की लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायतें भेजती रही।

- जब उसकी गुहार किसी ने नहीं सुनी तो मां ने कोर्ट जाने का फैसला किया और इस साल 24 फरवरी को उन्नाव के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष याचिका पेश की।

- 3 अप्रैल को कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। मगर उसी शाम विधायक के भाई अतुल सिंह ने कुछ लोगों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की पिटाई की और पुलिस ने भी उनपर अवैध हथियार रखने का केस दर्ज कर लिया।

- इसके विरोध में 8 अप्रैल को लड़की ने सीएम हाउस के पास आत्महत्या का प्रयास किया। मगर अगले दिन लड़की के पिता ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। 

 

 

पुलिस:  पिता की मौत के बाद शुरू की छोटी-मोटी कार्रवाई
- महकमे में हड़कंप तो तब मचा जब लड़की के पिता की मौत हो गई। माखी थाने के इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, लड़की के पिता के साथ मारपीट करने के आरोप में चार लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। अगले दिन पांचवें आरोपी के रूप में विधायक के भाई अतुल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। एसआईटी का गठन किया गया।

- सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक ही दिन के भीतर एसआईटी से रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट के आधार पर मौत के दो दिन बाद मंगलवार देर रात प्रदेश सरकार ने विधायक के खिलाफ रेप का केस चलाने और मामला सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया। हालांकि इतने पर भी पुलिस विधायक को गिरफ्तार करने से डरती रही।

- बुधवार रात विधायक समर्थकों के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचे और जरूरत पड़ने पर हाजिर हो जाने की बात कहकर शान से निकल गए। कोर्ट की फटकार के बाद गुरुवार को पुलिस ने विधायक पर पास्को (नाबालिग से यौन अपराध) सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की।

 

सीबीआई : रेप , पिता की मौत, उन पर केस की जांच
- शुक्रवार तड़के सीबीआई ने आरोपी भाजपा विधायक सेंगर को हिरासत में ले लिया। करीब 17 घंटे तक पूछताछ की और फिर रात करीब साढ़े नौ बजे उसे गिरफ्तार कर लिया। वैसे इस पूरे घटनाक्रम में सीबीआई ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं।

-  पहली रेप के संबंध में। दूसरी पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत से जुड़ी है। तीसरी पीड़िता के पिता के खिलाफ उन आरोपों से जुड़ी है, जिसमें उन्हें शस्त्र कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया था। 

 

कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल को मामले में स्वत: संज्ञान लिया। अगले दिन सुनवाई में विधायक की गिरफ्तारी न होने और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 13 अप्रैल को विधायक को गिरफ्तार करने के आदेश दिया है। कहा कि आरोपी की हिरासत काफी नहीं है। 2017 में दर्ज केस के तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर जेल भेजने के लिए भी कहा।

 

बचते रहे योगी, मोदी को छठे दिन आई याद 

योगी: उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे मामले में बचते नजर आए। पीड़िता के पिता की मौत के बाद उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवा रहे हैं। दोषी पर कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि वे एसआईटी को एक दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए जरूर कहते हैं।

मोदी: लड़की के पिता की मौत के छह दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा -देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें, मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं। कोई अपराधी बचेगा नहीं, न्याय होगा और पूरा होगा। उन्होंने कठुआ तथा उन्नाव दोनों के संदर्भ में यह कहा।

 

तब तक विरोधियों ने जमकर भुनाया इस मुद्दे को
- लड़की के पिता की मौत के बाद से राहुल गांधी सक्रिय हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा-‘बेटी बचाओ-खुद मर जाओ’ आगे लिखा एक युवती भाजपा विधायक पर रेप का आरोप लगाती है। उसके पिता को पुलिस कस्टडी में ले लिया जाता है। बाद में उनकी मौत हो जाती है।

- 12 अप्रैल की रात राहुल गांधी, बहन प्रियंका और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा उन्नाव तथा कठुआ रेप कांड के विरोध में सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ इंडिया गेट पर केंडल मार्च निकालते हैं। हालांकि मार्च में आम लोग भी बड़ी संख्या में शामिल थे। 

 

सर्वाधिक दागी विधायक कहां?

- 1765 मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ 2014 से 2017 के बीच 3816 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए देशभर में। इनमें से 3045 लंबित हैं।

- 248 सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज हुए उत्तरप्रदेश में, इन तीन वर्षों में। यानी देश में सबसे ज्यादा। तमिलनाडु में 178, बिहार मेंं 144 और पश्चिम बंगाल में 139 मामले रहे। वैसे पुराने मामलों को मिलाकर सबसे ज्यादा मामले लंबित भी उत्तरप्रदेश में ही हैं। इनकी संख्या 539 है।

- 403 में से 143 वर्तमान विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उत्तरप्रदेश में। इनमें 107 के अपराध हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, रेप जैसे गंभीर हैं। 

 

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें,  कठुआ में भी कोर्ट को होना पड़ा सख्त...

- उत्तरप्रदेश के उन्नाव की तरह जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप के मामले ने भी देश की भावनाओं को ठेंस पहुंचाई है। कठुआ में 10 जनवरी को बच्ची को अगवा किया गया था। उसे रासना गांव के एक मंदिर में बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया। बाद में उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। फिर पत्थर से सिर कुचल दिया गया।

- मारने से पहले साजिश में शामिल पुलिसकर्मी दीपक खजूरिया ने सभी को रोका और एक बार और रेप किया। 17 जनवरी को बच्ची का शव मिला। इस गैंगरेप का मास्टरमाइंड मंदिर का पुजारी संजी राम है, जिसने कठुआ से बकरवाल समुदाय को हटाने के लिए यह साजिश रची थी।

- उसने अपने नाबालिग भतीजे से मासूम को किडनैप करवाया। बच्ची को एक नशीली दवा दी, ताकि वो चीख ना सके। इसके बाद उसे मंदिर में लाकर गैंगरेप किया गया। आरोपियों में 60 साल का सांजी राम, उसका बेटा, नाबालिग भतीजा, दीपक खजूरिया सहित चार पुलिसकर्मी, और एक अन्य शामिल हैं। 


अब तक क्या-क्या हुआ?
-  इस मामले में पुलिस ने 4 महीने बाद 10 अप्रैल को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। 
-  सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह खुद इस घटना का संज्ञान लेगा। जम्मू के वकीलों द्वारा आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर करने से रोके जाने पर भी नाराजगी जताई।
-  आरोपियों के समर्थन में निकली रैली में हिस्सा लेने के बाद निशाने पर आए बीजेपी के दो मंत्रियों को भी शुक्रवार को इस्तीफा देना पड़ा है।

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