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उन्नाव रेप केस: MLA कुलदीप और रेप विक्टिम से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है CBI, फैमिली सहित लखनऊ पहुंची पीड़िता

3 वर्ष पहले
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  • कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी ना होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी।
  • शुक्रवार को तड़के कुलदीप सिंह सेंगर को उसके लखनऊ स्थित पुश्तैनी घर से हिरासत में लिया गया था।

 

लखनऊ. उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सीजेएम सुनील कुमार ने शनिवार को दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद विधायक को 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा है। सीबीआई ने 14 दिन की रिमांड की मांग की थी। कोर्ट ने सीबीआई से विधायक को 21 अप्रैल सुबह 10 बजे दोबारा पेश करने के लिए कहा है। सीबीआई जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका आधिकारिक एलान कर सकती है। 

 

विधायक की मददगार शशि सिंह गिरफ्तार

सीबीआई ने शनिवार को ही विधायक के साथ आरोपी बनाई गईं शशि सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। शशि सिंह पर पीड़िता को विधायक से मिलाने का आरोप है।  उन्हें गिरफ्तार कर सीबीआई मुख्यालय लाया गया है। 

 

सीबीआई ने कराया लड़की का मेडिकल
- इससे पहले सीबीआई 35 घंटे तक पूछताछ करने के बाद शनिवार को करीब 3.30 बजे सेंगर को कोर्ट लेकर पहुंची थी। मीडिया के सामने विधायक ने कहा- मुझे भगवान और न्याय पर भरोसा है इसलिए यहां आया हूं। इससे पहले सीबीआई ने पीड़ित लड़की का लखनऊ में मेडिकल कराया और फिर उसे वापस उन्नाव भेज दिया। बता दें कि विधायक सेंगर को शुक्रवार शाम गिरफ्तार किया गया था।

 

जांच पर नजर रखेगी अदालत 

- सेंगर को लखनऊ स्थित पुश्तैनी घर से सीबीआई की टीम ने शुक्रवार तड़के 5 बजे हिरासत में लिया था। 16 घंटे विधायक से पूछताछ की गई और फिर देर शाम उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 

- कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ धारा 363, 366, 376, 506 और पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।

- इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया था। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा था कि अब तक विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?

- मामले की सुनवाई को दौरान कोर्ट ने कहा था कि हम जांच पर नजर रखेंगे। सीबीआई को अदालत में 2 मई तक प्रोग्रेस रिपोर्ट भी सौंपनी है।

- पीड़िता के चाचा ने कहा,"शुक्रवार को सीबीआई ने घर के सभी सदस्यों से अलग-अलग बातचीत की। हमारे पास जो भी सबूत थे, हमने टीम को सौंप दिए हैं। अभी मेरे पास और सबूत हैं।"

 

 

रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने लिए थे 3 फैसले

- योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''इस मामले में सरकार की जीरो टॉलरेंस है। हमने तत्काल एसआईटी गठित कर कार्रवाई शुरू की। इस मामले में सीबीआई जांच के लिए भी सिफारिश की। अपराध और भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।''
- सरकार ने एसआईटी, जेल डीआईजी और उन्नाव जिला प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी थी। तीनों रिपोर्ट मिलने के बाद गृह विभाग ने बुधवार देर रात फैसले लिए थे।

 

1) पीड़ित परिवार की हिफाजत: पीड़िता के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।

2) तीन डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी: जेल अस्पताल के 3 डॉक्टर डॉ. मनोज कुमार (आर्थोसर्जन), डॉ. जीपी सचान (सर्जन) और डॉ. गौरव अग्रवाल (ईएमओ) के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई के आदेश दिए गए।

3) तीन अफसर सस्पेंड: पीड़िता के पिता के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में उन्नाव जिला अस्पताल के 2 डॉक्टर डॉ. डीके द्वेदी (सीएमएस) और डॉ. प्रशांत उपाध्याय (ईएमओ) को सस्पेंड किया गया। सीओ सफीपुर कुंवर बहादुर सिंह को मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड किया गया है।

 

क्या है पूरा मामला

  • मामला पिछले साल 4 जून का है। 17 साल की किशोरी की मां ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत कुछ लोगों के खिलाफ रेप की शिकायत की थी।
  • 3 अप्रैल को विधायक के भाई अतुल ने मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया।
  • 8 अप्रैल रविवार को पीड़िता ने परिवार समेत मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया था।।
  • 9 अप्रैल को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई। महिला ने उन्नाव में परिवार के खिलाफ कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाने का भी आरोप लगाया था।
  • मामले में माखी थाने के एसओ समेत 6 कॉन्स्टेबल पहले ही सस्पेंड किए जा चुके हैं।

 

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