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महाराजगंज: मधेशी आंदोलन हुआ उग्र, सेनौली बॉर्डर माओवादियों ने की पत्‍थरबाजी

7 वर्ष पहले
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महाराजगंज. पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में नए संविधान के विरोध में मधेशियों का आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को महाराजगंज के सोनौली बॉर्डर पर नेपाल की ओर से माओवादियों ने भारतीय क्षेत्र के लोगों पर जमकर पथराव किया। जवाबी कार्रवाई में भारतीय क्षेत्र से भी लोगों ने पथराव किया। घटना से इंडो-नेपाल बॉर्डर के आस-पास दशहत फैल गई है। वहीं, दोनों देशों के बीच आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।

आंदोलन से पर्यटकों में आई कमी
नेपाल में मधेशी आंदोलन को देखते हुए भारत से नेपाल जाने वाले पर्यटकों में काफी कमी आई है। सोनौली इमीग्रेशन अधिकारी सुभाष चंद तिवारी का कहना है कि जब से आंदोलन शुरु हुआ है तब से पर्यटक वाहन कम आ रहे हैं। पहले जहां प्रतिदिन 10 से 12 पर्यटक वाहन नेपाल जाते रहे। वहीं, सितंबर महीने में अब तक केवल 15 पर्यटक वाहन ही नेपाल गए हैं।
कौन हैं मधेशी
मधेशी मुख्य रूप से नेपाली निवासी हैं, जो नेपाल के दक्षिणी भाग के मैदानी क्षेत्र में रहते हैं। इस क्षेत्र को 'तराई क्षेत्र' भी कहते हैं। इसी क्षेत्र को 'मधेश' भी कहते हैं। मधेश शब्द मध्यदेश का अपभ्रंश है। यहां की जमीन उपजाऊ है और आबादी भी घनी है। मधेशियों में इस बात का आक्रोश है कि उनकी उपेक्षा की जाती है।

क्यों आक्रोशित हैं मधेशी
नेपाल में मधेशियों की संख्या सवा करोड़ से अधिक है। इनकी बोली मैथिली है। ये हिंदी और नेपाली भी बोलते हैं। भारत के साथ इनका हजारों साल पुराना रोटी-बेटी का संबंध है, लेकिन इनमें से 56 लाख लोगों को अब तक नेपाल की नागरिकता नहीं मिल पाई है। जिन्हें नागरिकता मिली भी है, वह किसी काम की नहीं क्योंकि उन्हें ना ही सरकारी नौकरी में स्थान मिलता है और ना ही संपत्ति में। यानी सिर्फ कहने को नेपाली नागरिक। इसी भेदभाव के खिलाफ मधेशी आंदोलन कर रहे हैं।

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