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डाउनलोड करेंन्यूज डेस्क। मोदी सरकार अब यूपीएससी के जरिए चुने जाने वाले आईएएस, आईपीएस जैसे अफसरों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके बाद सिर्फ यूपीएससी में टॉप करना आखिरी नियुक्ति का आधार नहीं रह जाएगा।
# 15 हफ्तों का फाउंडेशन कोर्स होता है
दरअसल सरकार लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) में होने वाले फाउंडेशन कोर्स को भी कैंडीडेट्स के परफॉर्मेंस में शामिल करना चाहती है। मौजूदा नियमों में मुताबिक, यूपीएससी क्लियर करने वाले कैंडीडेट्स को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरे सेंट्रल डिपार्टमेंट में नियुक्त किया जाता है। इसके बाद इन्हें LBSNAA में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। यहां 3 महीने का फाउंडेशन कोर्स होता है।
#PMO चाहता है दोनों प्रॉसेस को मिलाना
एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र को मिले डॉक्युमेंट के मुताबिक, प्राइम मिनिस्टर ऑफिस अब इन दोनों प्रॉसेस को मिलाना चाहता है। मतलब फाउंडेशन कोर्स में दिए जाने वाले परफॉर्मेंस के बेस पर कैंडीडेट्स को सर्विसेज और कैडर अलॉट किए जाएंगे। यह लेटर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) से कैडर कंट्रोलिंग से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों को भेजा जा चुका है। इस पर सभी से उनकी राय मांगी गई है। इसमें सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन के साथ फाउंडेशन कोर्स के स्कोर को कम्बाइंड करके कैडर अलॉट करने की बात लिखी गई है।
#फाउंडेशन कोर्स के 400 मार्क्स हैं
फाउंडेशन कोर्स में एकेडमी कई तरह की एक्टिविटी करवाती है। पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, लॉ, पॉलिटिकल साइंस के साथ ही एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज जैसे ट्रैकिंग, गांव का दौरा, अलग-अलग लोगों से इंटरेक्शन करवाया जाता है। अभी फाउंडेशन कोर्स के 400 मार्क्स हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आइडिया बुरा नहीं है, क्योंकि सिर्फ यूपीएससी इंटरव्यू के आधार पर किसी कैंडीडेट को जज करना पर्याप्त नहीं है। फाउंडेशन कोर्स को असेसमेंट में शामिल करने के बाद सही व्यक्ति को सही सर्विस अलॉट की जा सकेगी।
#1989 में भी उठाया जा चुका है मुद्दा
यह आइडिया कोई नया नहीं है, बल्कि 1989 में इतिहासकार सतीश चंद्रा की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने भी रिकमंड किया था कि रिक्रूटमेंट को तीन स्टेज में डिवाइड करना चाहिए। इसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा के बाद तीसरी स्टेज फाउंडेशन कोर्स की होना चाहिए। इसके बाद ही कैंडीडेट्स को सर्विस और कैडर अलॉट करना चाहिए। मंत्रालयों से राय आने के बाद इस मुद्दे पर डिस्कश किया जाएगा। इसके बाद सरकार आखिरी निर्णय लेगी।
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