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डेटा स्टोरेज पर भारतीय और विदेशी पेमेंट कंपनियों में विवाद, भारतीय कंपनियों ने बताया देशहित का मामला

आरबीआई ने भारत में डेटा स्टोर का निर्देश दिया है, विदेशी कंपनियां इसमें ढील चाहती हैं

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 25, 2018, 09:58 AM IST

डेटा स्टोरेज पर भारतीय और विदेशी पेमेंट कंपनियों में विवाद, भारतीय कंपनियों ने बताया देशहित का मामला

- यूपीआई आधारित पेमेंट में पेटीएम की 33% हिस्सेदारी

-2020 में 35 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचेगा डिजिटल पेमेंट

नई दिल्ली. भारतीय और विदेशी पेमेंट कंपनियों के बीच इन दिनों जंग छिड़ी हुई है। यह झगड़ा डेटा स्टोरेज से जुड़ा है। रिजर्व बैंक ने अप्रैल में कहा था कि सभी पेमेंट कंपनियों को भारत में डेटा स्टोर करना पड़ेगा। इसके लिए 6 माह दिए थे। वीसा, मास्टर कार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी विदेशी कंपनियां इसमें छूट चाहती हैं तो पेटीएम जैसी भारतीय कंपनियां देश में डेटा स्टोरेज के पक्ष में हैं। विदेशी कंपनियों इसलिए विरोध में हैं क्योंकि यहां डेटा स्टोरेज के लिए उन्हें काफी खर्च करना पड़ेगा। भारतीय कंपनियां इसे राष्ट्रहित से जोड़ रही हैं।
रिजर्व बैंक जारी कर सकता है स्पष्टीकरण : सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों आर्थिक मामलों के सचिव एस.सी. गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारतीय कंपनियों ने राष्ट्रहित का हवाला देते हुए भारत में डेटा स्टोरेज की बात कही। हालांकि गर्ग ने इसमें राष्ट्रहित का मुद्दा नहीं उठाने की सलाह दी। भारतीय कंपनियों ने मई में पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया में भी यह मुद्दा उठाया था। सरकार नियमों में कुछ ढील देने के पक्ष में है, इसलिए रिजर्व बैंक कुछ स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।
विदेशी कंपनियों की स्ट्रैटजी बिगड़ सकती है : पेटीएम की प्रवक्ता ने कहा कि डेटा प्राइवेसी की जरूरत को देखते हुए भारतीय यूजर्स के लेन-देन के आंकड़े भारत में ही स्टोर होने चाहिए। दो भारतीयों के ट्रांजैक्शन का आंकड़ा विदेश में रखने का कोई मतलब नहीं है। काउंटर पॉइंट रिसर्च में रिसर्च डायरेक्टर नील शाह के अनुसार भारतीय कंपनियों द्वारा नए नियम लागू करवाने पर जोर देना बिजनेस की रणनीति है। विदेशी कंपनियों को ग्रोथ के बजाय कंप्लायंस पर फोकस करना पड़ेगा। उनकी स्ट्रैटजी बिगड़ सकती है।
ज्यादा पेमेंट कंपनियां चाहता है आरबीआई : अप्रैल में 55% डिजिटल पेमेंट पेटीएम और यस बैंक के जरिए हुए थे। जून में रिजर्व बैंक ने कहा कि चुनिंदा बड़ी कंपनियों के हाथ में डिजिटल पेमेंट का सिमटना ठीक नहीं। इस क्षेत्र में और कंपनियां आएं। इसके लिए वह 30 सितंबर तक कंसल्टेशन पेपर जारी करने वाला है।
मोबाइल वॉलेट से पेमेंट 5 गुना बढ़ा : मई में 96.4 करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए 3.5 लाख करोड़ रु. के डिजिटल पेमेंट हुए। यह नवंबर 2016 की तुलना में दोगुना है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान मोबाइल वॉलेट से पेमेंट 5 गुना बढ़ कर करीब 13,500 करोड़ रुपए हो गया है।

यूपीआई आधारित ट्रांजैक्शन

महीनासंख्या (करोड़)रकम (रुपए)
अक्टूबर 20177.687,058 करोड़
नवंबर 201710.489,640 करोड़
दिसंबर 201714.5513,144 करोड़
जनवरी 201815.1815,571 करोड़
फरवरी 201817.1419,126 करोड़
मार्च 201817.8124,172 करोड़

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