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ट्रेड वॉर: अमेरिका ने चीन पर फिर से 10% आयात शुल्क लगाया, 13.77 लाख करोड़ रुपए के इंपोर्ट पर लागू होगा

अमेरिका और चीन पिछले हफ्ते एक-दूसरे पर 2.34 लाख करोड़ के इंपोर्ट पर टैरिफ लागू कर चुके हैं।

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 12:07 PM IST
  • अमेरिका चीन से इंपोर्ट होने वाले 6000 उत्पादों पर 10% ड्यूटी लगाएगा
  • चीन ने अमेरिका के फैसले को इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड वॉर बताया

वाशिंगटन. अमेरिका ने चीन से इंपोर्ट किए जाने वाले 200 बिलियन डॉलर (13.77 लाख करोड़ रुपए) मूल्य के उत्पादों पर 10% इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है। सितंबर से यह शुल्क लागू होने की संभावना है। अमेरिका अगस्त के आखिरी हफ्ते तक उन सामानों की लिस्ट जारी कर सकता है जिन पर टैरिफ लगाया गया है। इसमें खाद्य सामग्री, मिनरल्स और हैंडबैग जैसे 6000 उत्पाद शामिल होंगे। इस फैसले का चीन के शेयर बाजार और वहां की मुद्रा युआन पर असर हुआ है। बुधवार को चीन के शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले और युआन अमेरिकी डॉलर मुकाबले 0.5% गिरकर करीब 11 महीने के सबसे निचले स्तर 6.69 पर पहुंच गया।
ट्रेड वॉर तेज हो सकता है : जून में अमेरिका ने 34 बिलियन डॉलर (2.34 लाख करोड़) के चाइनीज इंपोर्ट पर 25% शुल्क लगाने की घोषणा की थी जो 6 जुलाई से लागू हो चुकी है। चीन ने अमेरिका पर इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड वॉर छेड़ने का आरोप लगाते हुए इतने ही मूल्य के अमेरिकी इंपोर्ट पर ड्यूटी लगा दी। अमेरिका की नई घोषणा चीन के इसी कदम का जवाब है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कहा था कि अगर चीन जवाबी कार्रवाई करेगा तो अमेरिका और ज्यादा टैरिफ लगाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 500 बिलियन डॉलर (34.46 लाख करोड़ रुपए) तक के इंपोर्ट पर शुल्क लगाया जा सकता है। पिछले साल अमेरिका का चीन से कुल इंपोर्ट करीब इतना ही (500 बिलियन डॉलर) रहा था।
अमेरिका ने कहा- चीन गलत है, हम समाधान चाहते हैं : अमेरिका का कहना है कि चीन ने जो इंपोर्ट ड्यूटी लगाई है उसके पक्ष में वह कोई तर्क नहीं दे सकता। अमेरिका के प्रति चीन गलत रवैया अपना रहा है। उसके साथ व्यापार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कोशिशें जारी रहेंगी। हम चाहते हैं कि चीन अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच आसान करे। हम अपने देश के कारोबारियों के हितों का ध्यान रखेंगे।
चीन के खिलाफ टैरिफ लगाने के फैसले का अमेरिका में कई कंपनियां विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे कारोबार और अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।