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अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी एटीएंडटी 5.7 लाख करोड़ में टाइम वार्नर को खरीदेगी, दुनिया की चौथी बड़ी डील होगी

दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी तीसरी बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनी का अधिग्रहण करेगी

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 08:31 AM IST
ग्राहम बेल ने 1880 में बेल टेलीफोन कंपनी स्थापित की, बाद में इसका नाम एटीएंडटी हुआ।- फाइल ग्राहम बेल ने 1880 में बेल टेलीफोन कंपनी स्थापित की, बाद में इसका नाम एटीएंडटी हुआ।- फाइल
  • अमेरिकी सरकार की दलील थी कि इस सौदे से कंपीटीशन घटेगा , लोगों के लिए विकल्प कम होंगे
  • 21 जून तक ये डील पूरी होनी है, दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डर की मंजूरी मिल चुकी है

वाशिंगटन. दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी एटीएंडटी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा जीत लिया है। एटीएंडटी 85 अरब डॉलर यानी 5.7 लाख करोड़ रुपए में टाइम वार्नर को खरीदना चाहती है। सरकार ने ये कहते हुए इसे मंजूरी नहीं दी कि इससे प्रतिस्पर्धा घटेगी और लोगों के लिए विकल्प कम होंगे। अमेरिका के कानून मंत्रालय ने नवंबर 2017 में इस अधिग्रहण को रोकने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी।

अमेरिकी सरकार कोर्ट में दलीलें साबित नहीं कर पाई
- छह हफ्ते चली सुनवाई के बाद अपने फैसले में वाशिंगटन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज रिचर्ड लियोन ने कहा कि सरकार अपनी बात साबित करने में नाकाम रही। सरकार चाहती थी कि विलय से पहले दोनों कंपनियां अपना कुछ बिजनेस बेचें, कोर्ट ने इसे भी नहीं माना। जज लियोन ने सरकार से फैसले पर स्टे नहीं लेने के लिए भी कहा। हालांकि ऊपरी अदालत में इसे चुनौती दी जा सकती है।

कॉरपोरेट वर्ल्ड का 12वां सबसे बड़ा मर्जर
- ये अधिग्रहण दुनिया की टेलीकॉम, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में चौथा और पूरे कॉरपोरेट जगत में 12वां सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा। दोनों कंपनियों ने 22 अक्टूबर 2016 को डील की घोषणा की थी। अब अगले हफ्ते इसके पूरी हो जाने की उम्मीद है।

21 जून तक सौदा पूरा करना होगा

- कंपनियों के बीच कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक इस तारीख तक विलय नहीं हुआ तो टाइम वार्नर को एटीएंडटी 3,400 करोड़ रुपए ब्रेक-अप फीस देगी। टाइम वार्नर के शेयरहोल्डर प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके हैं। अमेरिका के बाहर जिन देशों में इन कंपनियों का बिजनेस है, सबसे डील को मंजूरी मिल चुकी है।

एटीएंडटी 138 साल पुरानी कंपनी

- टेलीफोन इजाद करने वाले अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने 1880 में बेल टेलीफोन कंपनी स्थापित की। 1885 में इसका नाम अमेरिकन टेलीफोन एंड टेलीग्राफ कंपनी और बाद में एटीएंडटी कॉर्पोरेशन हुआ।
- 1995 में इसकी सब्सिडियरी साउथवेस्टर्न बेल कॉर्प अलग हुई और 2005 में उसी ने एटीएंडटी कॉर्प को खरीद लिया। इसके बाद अपना नाम बदलकर एटीएंडटी इंक कर लिया।
- मौजूदा एटीएंडटी में बेल टेलीफोन कंपनी की 22 ऑपरेटिंग कंपनियों में से 10 शामिल हैं।
- 2017 में कंपनी का रेवेन्यू 10 लाख करोड़ रुपए रहा।

28 साल पहले टाइम और वार्नर का मर्जर हुआ
- 1990 में टाइम इंक और वार्नर कम्युनिकेशंस के विलय से टाइम वार्नर अस्तित्व में आई।

- 2000 में एओएल ने 11 लाख करोड़ रुपए में टाइम वार्नर को खरीद लिया था।

- 2014 में टाइम इंक को बेच दिया गया, इसके बावजूद टाइम वार्नर नाम बरकरार रहा।
- कॉमकास्ट और वाल्ट डिज्नी के बाद दुनिया की तीसरी बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनी।
- मुख्य ब्रांड सीएनएन, एचबीओ और वार्नर ब्रदर्स हैं।
- 2017 में रेवेन्यू 2.09 लाख करोड़ रुपए रहा।

टेलीकॉम, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में चौथा सबसे बड़ा मर्जर
1) 13.5 लाख करोड़ रुपए में वोडाफोन ग्रुप ने मैनेसमैन को खरीदा था। यह किसी भी इंडस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण है। ये डील 1999 में हुई थी।

2) 11 लाख करोड़ रुपए में एओएल ने टाइम वार्नर को खरीदा। वर्ष 2000 में ये सौदा हुआ था।

3) 8.7 लाख करोड़ रुपए में वेराइजन कम्युनिकेशंस ने वेराइजन वायरलेस को खरीदा। डील 2013 में हुई।

4) 5.7 लाख करोड़ रुपए में एटीएंडटी, टाइम वार्नर को खरीदेगी।

मीडिया इंडस्ट्री के लिए टर्निंग प्वाइंट हो सकता है यह फैसला
एटीएंडटी को तत्काल क्या फायदा मिलेगा ?

एटीएंडटी की ‘डायरेक्ट-टीवी नाउ’ नाम से स्ट्रीमिंग सर्विस है। ‘एटीएंडटी वाच’ नाम से सस्ता ऑनलाइन चैनल खोलने जा रही है। इनके लिए टाइम वार्नर से कंटेंट मिलेगा।

फैसले से मीडिया इंडस्ट्री पर क्या असर होगा ?
फैसला मीडिया इंडस्ट्री के लिए टर्निंग प्वाइंट है। अमेजन, नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों ने इस बिजनेस में हाल ही कदम रखा है। लेकिन वे तेजी से विस्तार कर रही हैं। ये खुद कंटेंट तैयार कर ग्राहकों को सीधे बेच रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे मुकाबला करने के लिए कंटेंट क्रिएशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का एक होना जरूरी है।

आगे इंडस्ट्री में किस तरह के बदलाव हो सकते हैं ?
ऐसे बहुत से विलय-अधिग्रहण देखने को मिलेंगे। अगली डील ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी फॉक्स की हो सकती है। कॉमकास्ट और वाल्ट डिजनी में इसे खरीदनेकी होड़ लगेगी। फैसले के इंतजार में कॉमकास्ट बोली नहीं लगा रही थी। फैसला खिलाफ में जाता तो डिज्नी, फॉक्स और कॉमकास्ट जैसी कंपनियां आगे नहीं बढ़तीं।

राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यह झटका कैसे है ?
डोनाल्ड ट्रंप टाइम वार्नर के चैनल सीएनएन के बड़े आलोचक हैं। अक्टूबर 2016 में डील की घोषणा हुई, तभी ट्रंप ने विरोध किया था। सीएनएन ने ट्रंप के खिलाफ कवरेज की थी। राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा डील का विरोध करने की यही मुख्य वजह थी। रोचक तथ्य यह भी है कि एटीएंडटी ने ट्रंप के वकील माइकल कोहेन से डील पर सलाह ली थी और इसके बदले उन्हें चार करोड़ रुपए दिए थे।

एटीएंडटी की मार्केट कैप एयरटेल से 89% ज्यादा
- एटीएंडटी- 14.1 लाख करोड़
- वेराइजन- 13.6 लाख करोड़
- चाइना मोबाइल- 12.5 लाख करोड़
- भारत की सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल की मार्केट कैप 1.5 लाख करोड़ रुपए है।

2017 में टाइम वार्नर का रेवेन्यू 2.09 लाख करोड़ रुपए रहा।- फाइल 2017 में टाइम वार्नर का रेवेन्यू 2.09 लाख करोड़ रुपए रहा।- फाइल
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ग्राहम बेल ने 1880 में बेल टेलीफोन कंपनी स्थापित की, बाद में इसका नाम एटीएंडटी हुआ।- फाइलग्राहम बेल ने 1880 में बेल टेलीफोन कंपनी स्थापित की, बाद में इसका नाम एटीएंडटी हुआ।- फाइल
2017 में टाइम वार्नर का रेवेन्यू 2.09 लाख करोड़ रुपए रहा।- फाइल2017 में टाइम वार्नर का रेवेन्यू 2.09 लाख करोड़ रुपए रहा।- फाइल
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