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सीरिया में अमेरिका की साल में दूसरी एयर स्ट्राइक, रासायनिक हमलों के बाद की कार्रवाई

3 वर्ष पहले
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- ट्रम्प ने केमिकल अटैक पर कहा- यह एक शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई हरकत है। 

 

 

वॉशिंगटन.  सीरिया में 7 अप्रैल को बेगुनाह लोगों पर किए गए रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया पर शुक्रवार रात मिसाइलों से हमला किया। इसमें फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, दमिश्क और होम्स में 103 मिसाइलें दागी गईं। फ्रांस ने दावा किया है हमले में बड़ी मात्रा में रासायनिक हथियार तबाह हुए। वहीं, सीरियाई समर्थक रूस की सेना ने कहा है कि सीरिया के एयर डिफेंस सिस्टम ने 71 हमलावर मिसाइलों को मार गिराया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब है। उन्होंने ट्वीट किया- मिशन पूरा हुआ। रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान और ट्रम्प को मौजूदा दौर का हिटलर बताया है। 

 

फ्रांस-ब्रिटेन का शुक्रिया- ट्रम्प

- डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया, "पिछली रात सटीक हमला किया गया। फ्रांस और ब्रिटेन का सैन्य सहयोग के लिए शुक्रिया। इससे बेहतर नतीजे नहीं हासिल किए जा सकते थे। मिशन पूरा हुआ।"

 

हवाई हमलों में रासायनिक शस्त्रागर का बड़ा हिस्सा तबाह: फ्रांस

-  फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-वेस ले द्रां ने कहा, "रात में किए हवाई हमलों में उनके (सीरिया) रासायनिक शस्त्रागार का बड़ा हिस्सा तबाह हुआ है।'' 

- "एक रेड लाइन है, जो क्राॅस नहीं होनी चाहिए। अगर क्रॉस होगी तो फिर हस्ताक्षेप की जरूरत होगी। हालांकि, मुझे लगता है कि सबक सीखा जा चुका है।" 

 

हमले क्यों किए गए?  

- ऐसा आरोप है कि पिछले हफ्ते 7 अप्रैल को सीरिया के पूर्वी घोउटा में विद्रोहियों के कब्जे वाले आखिरी शहर डूमा में हुए संदिग्ध रासायनिक हमले में 80 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। 1000 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। स्थानीय स्वयंसेवी संस्था ह्वाइट हेलमेट्स ने हमले के बाद की तस्वीरें पोस्ट की थीं। 

- सीरिया की बशर-अल-असद की सरकार ने इन खबरों को झूठा करार दिया था। हालांकि, ट्रम्प ने इस पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

 

दमिश्क, होम्स समेत 3 जगहों को निशाना बनाया
- सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया। 
पहला: दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं। 
दूसरा: होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है। 
तीसरा: होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है। 

 

ट्रम्प ने कहा- ये शैतान का काम, ब्रिटेन बोला- कोई ऑप्शन नहीं था
- डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा- "यह किसी इंसान की हरकत नहीं हो सकती है। यह एक शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई हरकत है। हमारे हवाई हमले सीधे तौर पर रूस की नाकामी का नतीजा हैं। रूस असद को रासायनिक हथियारों से दूर नहीं रख पाया। आज की रात की गई कार्रवाई का उद्देश्य रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाना है। जब तक उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता हर तरह की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।" 

 

रूस ने कहा- इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

- रूस ने यूएस, ब्रिटेन और फ्रांस की इस कार्रवाई को राष्ट्रपति पुतिन का अपमान करार दिया है। रूस ने कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

- हालांकि रूस ने कहा है कि इन हमलों में उसके किसी भी ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया है।

 

हमले सही और कानूनी: थेरेसा

- ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा, "सीरिया में ब्रिटेन, फ्रांस और यूएस के हवाई हमले "सही और कानूनी' हैं। रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ "स्पष्ट संदेश' भेजा है। 

 

हम मामले की निष्पक्ष जांच की मांंग करते हैं: भारत 

- विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, "हाल ही में सीरिया में हुए हमलों को संज्ञान में लिया। हम मामले पर लगातार नजर बनाए हैं। अगर वाकई में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया है तो यह दुखद है। हम आॅर्गेनाइजेशन फॉर प्रॉहिबेशन ऑफ केमिकल वेपन्स (ओपीईसीडब्लू) से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं, जिससे कि मामला आगे न बढ़े। इसको अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर के सिद्धांतों के तहत बातचीत और समझौता कर सुलझाया जा सकता है।''

 

पिछली बार से ज्यादा ताकतवर हमला
- अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि इन हमलों में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की नौसेना और वायुसेना शामिल थीं। इसमें पिछले साल किए गए हमले से दोगुना गोला-बारूद का इस्तेमाल किया गया। तब 59 टॉमहॉक मिसाइल दागी गई थीं। 
- पिछले साल के हमले में 20 सीरियाई विमान नष्ट हो गए थे। अनुमान है कि यह सीरियाई एयरफोर्स के कुल विमानों का करीब 20% हिस्सा था। 

 

क्या है सीरिया का संकट?

- 2011 में सीरिया में सिविल वॉर हुआ। कुछ मुट्ठीभर बच्चों की गिरफ्तारी से शुरू हुआ ये संघर्ष सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया के लिए अब तक का सबसे बड़ा ह्यूमन  क्राइसिस बन चुका है। इसके बाद जुलाई 2011 में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए सीरियन आर्मी के अफसरों के एक ग्रुप ने सेना छोड़ फ्री सीरियन आर्मी का गठन किया।

- दिसंबर 2011 से लेकर 2012 तक जगह-जगह सुसाइड बम ब्लास्ट हुए। इसके बाद अल कायदा के लीडर अयमान अल जवाहिरी ने सीरियाई लोगों से जिहाद के लिए आगे आने की अपील की। बीते दो साल में आईएस ने भी अपने आतंकी भेजने शुरू कर दिए।

- 2015 में रूस ने बशर अल-असद  को सपोर्ट कर दिया। असद के लिए सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) को रूस और ईरान सपोर्ट कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका पर आरोप है कि वह असद के खिलाफ विद्रोहियों की मदद कर रहा है।

- प्रेसिडेंट बशर अल-असद के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों और संघर्ष में अब तक करीब 4 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

 

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