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डाउनलोड करेंब्रजेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अलाबामा के मैडिसन इलाक़े में एक भारतीय बुज़ुर्ग के ख़िलाफ़ ज़्यादती के मामले में एक पुलिस अधिकारी को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
मैडिसन पुलिस प्रमुख लैरी मंसी ने इस मामले से जुड़े पुलिस अधिकारी एरिक पार्कर को विभाग से मुअत्तल करने की सिफ़ारिश की है.
भारत से अमरीका में अपने बेटे-बहू के पास अपने नवजात पोते की देखरेख के लिए आए सुरेशभाई पटेल अपने घर के पास टहल रहे थे, जब पुलिस ने उन्हें रोका.
पुलिस के अनुसार उन्हें किसी पड़ोसी ने फ़ोन किया था कि एक संदिग्ध सा व्यक्ति वहां घूम रहा है.
सुरेशभाई पटेल अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते और पुलिस का कहना है कि उन्हें रोककर तलाशी लेने की कोशिश की गई तो वह अपनी जेब में हाथ डालने लगे. इसके बाद उन्हें ज़मीन पर गिरा दिया गया और वह ज़ख़्मी हो गए.
उनके बेटे चिराग पटेल ने कहा है कि उनके पिता आंशिक रूप से लकवे का शिकार हो गए हैं और उन्हें ठीक होने में महीनों लग सकते हैं.
पुलिस की माफ़ीमैडिसन के पुलिस प्रमुख ने पूरी घटना का वीडियो जारी किया है जिसमें सुरेशभाई पटेल को ज़मीन पर गिराते दिखाया गया है.
पुलिस प्रमुख का कहना था, \'\'मैं मिस्टर पटेल और उनके परिवार और स्थानीय समुदाय से तहेदिल से माफ़ी मांगता हूं..हमारी कोशिश रहती है कि हम उम्मीदों से बढ़-चढ़कर खुद को साबित करें.\"
पुलिस अधिकारी एरिक पार्कर के खिलाफ़ हमला करने का मुक़दमा तो दर्ज हुआ ही, एफ़बीआई ने भी नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले की जांच शुरू कर दी है.
सुरेशभाई पटेल के बेटे चिराग पटेल ने भी स्थानीय अदालत में पुलिस विभाग और अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया है.
इसके पहले अमरीकी विदेश विभाग ने भी बृहस्पतिवार को इस घटना पर अफ़सोस ज़ाहिर किया था.
चिराग पटेल ने बुधवार को मीडिया को दिए बयान में कहा था कि वह बेहद साधारण परिवार से हैं और उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी कि जिस इलाक़े में वह रहते हैं वहां इस तरह की घटना भी हो सकती है.
उनके पिता के इलाज में काफ़ी खर्च आएगा और स्थानीय भारतीय समुदाय उसके लिए चंदा भी इकट्ठा कर रहा है.
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