RSS ने माउथपीस पांचजन्य में लिखा राष्ट्रविरोधी ताकतों का अड्डा है JNU / RSS ने माउथपीस पांचजन्य में लिखा राष्ट्रविरोधी ताकतों का अड्डा है JNU

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) पर पांचजन्य में 'दरार का गढ़' नाम से छपी कवर स्टोरी में जेएनयू को नक्सल गतिविधियों का केंद्र बताया गया है।

dainikbhaskar.com

Nov 03, 2015, 12:57 PM IST
पाञ्चजन्य मैगजीन का कवर पेज। पाञ्चजन्य मैगजीन का कवर पेज।
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) को देश विरोधी ताकतों का अड्डा बताया है। संघ की मैगजीन पाञ्चजन्य में ‘दरार का गढ़’ टाइटल वाले आर्टिकल में जेएनयू को नक्सल एक्टिविटीज का सेंटर प्वाइंट करार दिया गया है। मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू में एक बड़ी देश विरोधी लॉबी तैयार हो चुकी है, जो देश को तोड़ने में लगी है।
पाञ्चजन्य में जेएनयू पर क्या लगाए गए आरोप?
> मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू का स्टूडेंट्स यूनियन नक्सल समर्थक है। 2010 में जब नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 75 जवानों की हत्या कर दी थी, तब जेएनयू में खुलेआम जश्न मनाया गया था। यह सब जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन की नाक के नीचे हुआ था।

>जेएनयू ऐसी जगह है जहां राष्ट्रवाद को अपराध माना जाता है। इंडियन कल्चर को गलत ढंग से पेश करना यहां आम बात है। यहां कश्मीर से सेना हटाने का समर्थन होता है। यहां के लोग देश के खिलाफ होने वाले कामों का समर्थन करते हैं।
>यहां लोगों का धर्म परिवर्तन कराए जाने का काम चल रहा है। राष्ट्रीय प्रतीकों और चिह्नों का अपमान किया जाता है। एक पोस्टर में अशोक के चिह्न को जूते के तले में लगाकर दिखाया गया है।
>जब पूरे देश में मां दुर्गा की पूजा होती है तो यहां छद्म ईसाई और नए वामपंथी स्टूडेंट और प्रोफेसर 'महिषासुर दिवस' मनाते हैं।
>1969 में शुरू हुआ जेएनयू एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में सबसे ऊपर है, लेकिन यह एजुकेशन को छोड़ दूसरी वजहों से ज्यादा चर्चा में रहता है।

>दुर्गा पूजा के पंडालों पर नाराज होने वाले अफसर अफजल और याकूब जैसे आतंकियों के पक्ष में जेएनयू में निकाले गए मशाल जुलूसों और मातम मनाए जाने पर चुप रहते हैं।

> जेएनयू के फूड फेयर में कश्मीर का एक अलग देश के तौर पर स्टॉल लगाने की कोशिश की जाती है।

>जब सोवियत संघ टूटा तो जेएनयू जैसे संस्थानों में एक नया राजनीतिक विचार सामने आया। इसके तहत, यहां के लोगों ने अपना राजनीतिक नारा 'क्लास स्ट्रगल' से 'कास्ट स्ट्रगल' में बदलना शुरू कर दिया।
आगे की स्लाइड में देखें, जेएनयू में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां होने का आरोप लगाते हुए मैगजीन की ओर से छापे गए फोटोग्राफ्स और दूसरे कंटेंट...
अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कथित तौर पर जेएनयू  में निकाले गए मशाल जुलूस की फोटो मैगजीन ने पब्लिकश की है। अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कथित तौर पर जेएनयू में निकाले गए मशाल जुलूस की फोटो मैगजीन ने पब्लिकश की है।
पाञ्चजन्य के आर्टिकल में इस्तेमाल ग्राफिक्स। पाञ्चजन्य के आर्टिकल में इस्तेमाल ग्राफिक्स।
जेएनयू कैंपस में बना मुख्य प्रशासनिक भवन। जेएनयू कैंपस में बना मुख्य प्रशासनिक भवन।
अशोक चिह्न का मजाक उड़ाता जेएनएयू में कथित तौर पर लगा पोस्टर। अशोक चिह्न का मजाक उड़ाता जेएनएयू में कथित तौर पर लगा पोस्टर।
मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू के एक पोस्टर में जूते के तले में राष्ट्रीय चिह्न दिखाया गया है। मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू के एक पोस्टर में जूते के तले में राष्ट्रीय चिह्न दिखाया गया है।
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पाञ्चजन्य मैगजीन का कवर पेज।पाञ्चजन्य मैगजीन का कवर पेज।
अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कथित तौर पर जेएनयू  में निकाले गए मशाल जुलूस की फोटो मैगजीन ने पब्लिकश की है।अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कथित तौर पर जेएनयू में निकाले गए मशाल जुलूस की फोटो मैगजीन ने पब्लिकश की है।
पाञ्चजन्य के आर्टिकल में इस्तेमाल ग्राफिक्स।पाञ्चजन्य के आर्टिकल में इस्तेमाल ग्राफिक्स।
जेएनयू कैंपस में बना मुख्य प्रशासनिक भवन।जेएनयू कैंपस में बना मुख्य प्रशासनिक भवन।
अशोक चिह्न का मजाक उड़ाता जेएनएयू में कथित तौर पर लगा पोस्टर।अशोक चिह्न का मजाक उड़ाता जेएनएयू में कथित तौर पर लगा पोस्टर।
मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू के एक पोस्टर में जूते के तले में राष्ट्रीय चिह्न दिखाया गया है।मैगजीन के मुताबिक, जेएनयू के एक पोस्टर में जूते के तले में राष्ट्रीय चिह्न दिखाया गया है।
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