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1965 में इस हीरो को देख हथियार छोड़ भाग गए थे पाकिस्तानी, जानिए कहानी

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को 50 साल पूरे हो गए हैं। इस लड़ाई में 28 अगस्त को पाक के खिलाफ भारतीय सेना ने पहली जीत दर्ज की थी। मेजर आरएस दयाल के साहस से भारत ने हाजीपीर पर तिरंगा फहराया था। इसके साथ ही पाकिस्तान का श्रीनगर पर कब्जा करने का मंसूबा भी खत्म हो गया। लड़ाई 22 सितंबर 1965 तक चली। 23 सितंबर को युद्धविराम हुआ। हमारे तीन हजार जवान शहीद हुए थे। इस जीत के 50 साल पूरे होने पर शुक्रवार से कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ है...
हाजीपीर के हीरो की कहानी
हाजीपीर की लड़ाई 48 घंटे चली थी। 1-पैराशूट रेजिमेंट को हमले की जिम्मेदारी दी गई थी। मेजर रंजीत सिंह दयाल 27 अगस्त को अपनी कंपनी के साथ दोपहर 2 बजे हाजीपीर के लिए रवाना हुए। वह जैसे ही घाटी तक पहुंचे पाकिस्तानी सैनिकों ने गोलीबारी शुरू कर दी। मेजर दयाल की टुकड़ी ने भी जवाबी हमला बोला। दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। इस बीच शाम हो चुकी थी। कुछ ही देर में बारिश भी शुरू हो गई। चारों तरफ घना धुंध छा गया। मेजर दयाल के जवान दो दिन से लड़ रहे थे। बेहद थक चुके थे, पर रुके नहीं।
हाजीपीर पास की शुरुआत तक पहुंचे तो मेजर दयाल ने सीधे रास्ते की बजाय खड़ी चढ़ाई के रास्ते जाना तय किया। घुटनों तक पानी, बारिश, पीठ पर हथियार और गोले-बारूद का बोझ। लेकिन चढ़ते रहे। सुबह साढ़े चार बजे टुकड़ी उड़ी-पुंछ हाईवे पर पहुंच गई। दयाल कुछ देर थमे। थोड़ी सांस ली। और सुबह छह बजे वह दुश्मन के सामने थे। गोलीबारी फिर शुरू हो गई। कुछ जवानों को गोलीबारी में वहीं उलझाकर मेजर दयाल दूसरी तरफ की चढ़ाई से दुश्मन के सामने पहुंच गए। पाकिस्तानी सिपाही तो ऐसे चौंक पड़े कि हथियार छोड़कर भागने लगे। 28 अगस्त सुबह साढ़े दस बजे हाजीपीर पास फिर से भारत के कब्जे में था। लड़ाई में 21 भारतीय सैनिक घायल हुए थे। हमने पाक के 10 जवान मार गिराए थे। एक को बंदी बनाया।
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