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पिक्चर एडिटर
प्रशांत महासागर में किरीबाती एक छोटा सा द्विपीय देश है. इसके किनारे समुद्र के बढ़ते जल स्तर का सामना कर रहे हैं.
आहिस्ता आहिस्ता डूब रहे इस द्वीपीय देश की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का जायज़ा लेने के लिए फोटोग्राफ़र जिउलिएटा वेरडोन रोए ने यहां एक महीना गुज़ारा.
दक्षिणी प्रशांत महासागर में मौजूद 33 द्वीपों के इस समूह के 21 पर आबादी बसी हुई है.
1979 में ब्रिटेन से आज़ादी मिलने से पहले इस द्वीप समूह को गिलबर्ट आईलैंड के नाम से जाना जाता है.
पूरब से पश्चिम की ओर इसके किनारे की लंबाई चार हज़ार किलोमीटर है और उत्तर से दक्षिण दिशा में ये दो हज़ार किलोमीटर लंबा है.
साल 2012 में राष्ट्रपति एनोटे टोंग ने स्वीकार किया था कि उनके द्वीपों को समुद्र से ख़तरा है और वे इसे आख़िरकार खो देंगे.
मुश्किलें यहीं पर ख़त्म नहीं होतीं.
खेती की ज़मीन के न होने का मतलब ये है कि यहां की एक लाख 10 हजार की आबादी को खाद्यान्नों के लिए आयात पर निर्भर रहना होगा.
हालांकि फिजी में ज़मीन ख़रीदे जाने से उम्मीद की जा रही है कि वहां उपजाया जाने वाला अनाज वापस इसी द्वीप पर आएगा और खाद्यान्न के सवाल से निपटने में इससे मदद मिल सकती है.
बीबीसी की जुलियान सिडल ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि किरीबाती द्वीप समूह की तकरीबन आधी आबादी छोटे छोटे द्वीपों की श्रृंखला दक्षिणी तरावा में रहती है और यह धरती की सबसे सघनतम आबादी वाली जगहों में से एक है.
फोटोग्राफर जिउलिएटा वेरडोन रोए ने ब्लैक एंड व्हॉइट तस्वीरों इस द्वीप समूह की पूरी छटा और यहां के लोगों की जिंदगी को समेटा है.
उनकी तस्वीरें चारों तरफ खुले आसमान की रोशनी में भीगी सी लगती हैं.
वे न तो जलवायु परिवर्तन के सवाल पर कुछ कहती हैं और न ही ये जतलाना चाहती हैं कि ये द्वीप समूह धरती पर जन्नत की तरह है.
ये तस्वीरें बस इतना कहती हैं कि फोटोग्राफी का हुनर कितने बेहतर तरीके से कुछ दिखला सकता है, बतला सकता है.
जिउलिएटा वेरडोन रोए की तस्वीरें अपने सब्जेक्ट और किरीबाती द्वीप समूह की ख़ूबसूरत में झांकने का एक मौक़ा देती हैं.
लंदन के रिच मिक्स में ये तस्वीरें देखी जा सकती हैं. सभी तस्वीरें फोटोग्राफ़र जिउलिएटा वेरडोन रोए की हैं.
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