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डाउनलोड करेंवाराणसी. कैंट स्टेशन से 100 मीटर दूर मंगलवार शाम एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर की बीम गिरने से 18 लोगों की मौत हो गई। इस मामले में चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर समेत चार अफसर सस्पेंड कर दिए गए। बीम करीब 200 मीटर लंबी और 100 टन वजनी थी। इसकी चपेट में छह कार, एक मिनी बस, एक ऑटोरिक्शा, मोटरसाइकिल समेत कई पैदल यात्री भी आए। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी बने लोगों ने आपबीती शेयर की।
लहरतारा फ्लाई ओवर हादसे में शकरतालाब के रहने वाले दो चचेरे भाइयों ने पचीस मिनट तक मौत से जंग लड़ी। कबीर चौरा हॉस्पीटल में एडमिट शकील ने बताया, "हम दोनों बाइक से राजतालाब गए थे। अचानक पहाड़ की तरह कुछ गिरा और हम दोनों बस और कार के बीच स्लैब में दब गए। हमारा शरीर का हिस्सा टच कर रहा था। मेरे भाई नसरूद्दीन को सिर में चोट लग चुकी थी। बॉडी पर बोझ इतना पड़ रहा था कि चीख तो दूर मुंह से आह भी नहीं निकल रही थी। लगभग 25-30 मिनट बाद लोग मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने हमें खींचकर किसी तरह से बाहर निकाला।"
- मंडलीय हॉस्पिटल में एडमिट प्रद्युम्न ने बताया, "मैं मिर्जापुर का रहने वाला हूं। बनारस सामान लेने ऑटो से जा रहा था। हम जाम में फंसे थे तभी अचानक ऑटो के ऊपर कुछ भड़भड़ाकर गिरा और ऑटो का किनारे का हिस्सा दब गया। शेयर्ड ऑटो में मैं कॉर्नर पर ही बैठा था। किस्मत यह रही कि सिर पर कुछ नहीं गिरा। भारी सा सामान मेरे सीने के ऊपर गिरा था। मैं गर्दन पीछे करके बैठा रहा। हिलना मुश्किल था। बचाने पहुंचे लोगों ने कहा कि सांस रोक-रोककर बाहर आने की कोशिश करो। वो जैसे कहते गए, मैं करता गया और बाहर आ गया।"
- कबीर चौरा अस्पताल में मंगलवार रात चंदन नाम की लड़की अपनी मां को खोजती रही। वो हर डेडबॉडी को देखकर कहती रही, मेरी मां जिन्दा है, आखिर कहां गयी।
- चंदन ने बताया, "मां शांति देवी बनारस के डीआरएम के बंगले में काम करती हैं। वो कहां हैं, पता नहीं। सभी घायलों और मृतकों को जाकर देखा, लेकिन वो नहीं मिलीं।"
- "छुट्टी होने के कई घंटे बाद भी मां घर नहीं पहुंची तो मैं अपने चचेरे भाई के साथ उनको ढूंढने निकल पड़ी।"
- घायल रिंकू के भाई मोनू ने बताया, "भइया अपने ससुर भैरोनाथ के साथ रेनाल्ट क्विड कार खरीद कर नख्खीघाट की तरफ आ रहे थे। तभी उनके ऊपर वो पुल गिर गया। हादसे में अंकल की डेथ हो गई है, भइया रिंकू ट्रॉमा में एडमिट हैं।"
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